धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 09 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 09 मार्च 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 07:45 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 11:55 PM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति और राशि स्वामी बुध हैं।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 02:58 PM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : गर – 07:45 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 07:41 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:10:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:50:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:00 ए एम से 05:49 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:24 ए एम से 06:38 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:08 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:23 पी एम से 06:48 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:26 पी एम से 07:39 पी एम
💧 अमृत काल : 09:28 पी एम से 11:06 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, मार्च 10 से 12:56 ए एम, मार्च 10
🌸 रवि पुष्य योग : 11:55 पी एम से 06:36 ए एम, मार्च 10
सर्वार्थ सिद्धि योग : 11:55 पी एम से 06:36 ए एम, मार्च 10
❄️ रवि योग : 06:38 ए एम से 11:55 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में सवाकिलो गुड़ चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/भद्रा/ राजनीतिज्ञ नवीन जिंदल जन्म दिवस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का स्थापना दिवस, भालेसुलतान क्षत्रिय शहीद दिवस, राष्ट्रीय बार्बी दिवस, राष्ट्रीय डिशवॉशर दिवस, राष्ट्रीय मीटबॉल दिवस, राष्ट्रीय केकड़ा मांस दिवस, राष्ट्रीय ड्राई शैम्पू दिवस, विजय दिवस, हरि नारायण आप्टे जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, राष्ट्रीय मीटबॉल दिवस, भारतीय अभिनेत्री देविका रानी पुण्य तिथि, प्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर शर्मा स्मृति दिवस, मशहूर तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन जयन्ती, भारतीय राजनेता कर्ण सिंह, जन्म दिवस, प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार डॉ. नगेन्द्र जन्म दिवस, राष्ट्रीय पोषण माह (1 से 31 मार्च)
✍🏼 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🏘️ Vastu tips_ 🏡
घर में सप्ताह में एक बार गूगल का धुआं करना शुभ होता है।
गेहूं में नागकेशर के 2 दाने तथा तुलसी की 11 पत्तियां डालकर पिसाया जाना शुभ है।
घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालकर लगाना शुभ है।
हर गुरुवार को तुलसी के पौधे को दूध चढ़ाना चाहिए।
तवे पर रोटी सेंकने के पूर्व दूध के छींटें मारना शुभ है।
पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें।
मकान में 3 दरवाजे एक ही रेखा में न हों।
सूखे फूल घर में नहीं रखें।
संत-महात्माओं के चित्र आशीर्वाद देते हुए बैठक में लगाएं।
घर में टूटी-फूटी, कबाड़, अनावश्यक वस्तुओं को नहीं रखें।
दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में हरियाली से परिपूर्ण चित्र लगाएं।
घर में टपकने वाले नल नहीं होना चाहिए।
घर में गोल किनारों के फर्नीचर ही शुभ हैं।
घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान के पास रखें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ब्लड सर्कुलेशन और ह्रदय : कई लोगों का यह मानना है कि लहसुन खाने से हाइपरटेंशन के लक्षणों से बहुत आराम मिलता है। यह न केवल ब्लड सर्कुलेशन को नियमित करता है, बल्कि दिल से संबंधित गंभीर समस्याओं को भी दूर करता है। साथ ही, लीवर और मूत्राशय को भी सुचारू रूप से काम करने में सहायक होता है।
भूख बढाए : यह डाइजेस्टिव सिस्टम को पूरी तरह ठीक करता है और भूख भी बढ़ाता है। जब भी आपको घबराहट होती है तो पेट में एसिड बनता है। लहसुन इस एसिड को बनने से पूरी तरह रोकता है। यह तनाव को कम करने में भी सहायक होता है।
डाइबिटीज़, ट्युफ्स, डिप्रेशन और कैन्सर : जब डिटॉक्सिफिकेशन की बात आती है तो वैकल्पिक उपचार के रूप में लहसुन बहुत प्रभावी होता है। लहसुन शरीर को सूक्ष्मजीवों और कीड़ों से बचाता है। अनेक तरह की बीमारियों जैसे डाइबिटीज़, ट्युफ्स, डिप्रेशन और कुछ प्रकार के कैंसर की रोकथाम में भी यह सहायक होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी
☘️
अचानक गिरना – अगर आप किसी कठोर सतह पर सीधे नितंबों के बल गिरते हैं, तो गुदे की हड्डी पर सीधा झटका लगता है, जिससे यह हड्डी चोटिल हो सकती है।
लंबे समय तक कठोर सतह पर बैठना – कई बार लोग बिना कुशन या सपोर्ट के ज्यादा देर तक सख्त सतह पर बैठते हैं, जिससे गुदे की हड्डी पर दबाव बढ़ता है और दर्द होने लगता है।
डायरेक्ट ट्रॉमा (सीधा आघात) – किसी दुर्घटना, खेल-कूद या किसी ठोस वस्तु से टकराने की वजह से गुदे की हड्डी में चोट लग सकती है।
प्रसव (डिलीवरी) के दौरान दबाव – महिलाओं में डिलीवरी के समय अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण यह हड्डी चोटिल हो सकती है या डिसलोकेट हो सकती है।
📚 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
चरणामृत से सम्बन्धित एक पौराणिक गाथा काफी प्रसिद्ध है जो हमें श्रीकृष्ण एवं राधाजी के अटूट प्रेम की याद दिलाती है। कहते हैं कि एक बार नंदलाल काफी बीमार पड़ गए। कोई दवा या जड़ी-बूटी उन पर बेअसर साबित हो रही थी।
तभी श्रीकृष्ण ने स्वयं ही गोपियों से एक ऐसा उपाय करने को कहा जिसे सुन गोपियां दुविधा में पड़ गईं।
दरअसल श्रीकृष्ण ने गोपियों से उन्हें चरणामृत पिलाने को कहा। उनका मानना था कि उनके परम भक्त या फिर जो उनसे अति प्रेम करता है तथा उनकी चिंता करता है यदि उसके पांव को धोने के लिए इस्तेमाल हुए जल को वे ग्रहण कर लें तो वे निश्चित ही ठीक हो जाएंगे।
लेकिन दूसरी ओर गोपियां और भी चिंता में पड़ गईं। श्रीकृष्ण उन सभी गोपियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे, वे सभी उनकी परम भक्त थीं लेकिन उन्हें इस उपाय के निष्फल होने की चिंता सता रही थी।
उनके मन में बार-बार यह आ रहा था कि यदि उनमें से किसी एक गोपी ने अपने पांव के इस्तेमाल से चरणामृत बना लिया और कृष्णजी को पीने के लिए दिया तो वह परम भक्त का कार्य तो कर देगी। परन्तु किन्हीं कारणों से कान्हा ठीक ना हुए तो उसे नर्क भोगना पड़ेगा।
अब सभी गोपियां व्याकुल होकर श्रीकृष्ण की ओर ताक रहीं थी और किसी अन्य उपाय के बारे में सोच ही रहीं थी कि वहां कृष्ण की प्रिय राधा आ गईं। अपने कृष्ण को इस हालत में देख के राधा के तो जैसे प्राण ही निकल गए हों।
जब गोपियों ने कृष्ण द्वारा बताया गया उपाय राधा को बताया तो राधा ने एक क्षण भी व्यर्थ करना उचित ना समझा और जल्द ही स्वयं के पांव धोकर चरणामृत तैयार कर श्रीकृष्ण को पिलाने के लिए आगे बढ़ी।राधा जानतीं थी कि वे क्या कर रही हैं। जो बात अन्य गोपियों के लिए भय का कारण थी ठीक वही भय राधा को भी मन में था लेकिन कृष्ण को वापस स्वस्थ करने के लिए वह नर्क में चले जाने को भी तैयार थीं।
आखिरकार कान्हा ने चरणामृत ग्रहण किया और देखते ही देखते वे ठीक हो गए। क्योंकि वह राधा ही थीं जिनके प्यार एवं सच्ची निष्ठा से कृष्णजी तुरंत स्वस्थ हो गए। अपने कृष्ण को निरोग देखने के लिए राधाजी ने एक बार भी स्वयं के भविष्य की चिंता ना की और वही किया जो उनका धर्म था।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

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