Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 08 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 08 मई 2025
आप सभी देशवासियों को मोहिनी एकादशी व्रत के पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 12:29 PM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 09:06 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का देवता अर्यमा है।
⚜️ योग – हर्षण योग 01:56 AM तक, उसके बाद वज्र योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 12:29 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 01:41 ए एम, मई 09 तक बालव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:27:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:33:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:10 ए एम से 04:53 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:31 ए एम से 05:35 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:32 पी एम से 03:26 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:59 पी एम से 07:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:01 पी एम से 08:04 पी एम
💧 अमृत काल : 01:03 पी एम से 02:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:39 ए एम, मई 09
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर स्वर्ण चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मोहिनी एकादशी/ श्री लक्ष्मी नारायण एकादशी व्रत/ (सर्वे)/भद्रा/मुण्डन/द्विरागमन/ विश्व रेड क्रॉस दिवस, विश्व थैलेसीमिया दिवस, मदर्स डे, रवींद्रनाथ टैगोर जयंती, अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस, रणबिंद्र भारती विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस, पूर्व भारतीय सेना प्रमुख प्राणनाथ थापरी जन्म दिवस, स्वामी चिन्मयानंद जयन्ती, भारतीय क्रांतिकारी वासुदेव चाफेकर स्मृति दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🗼 *_Vastu tips* 🗽
व्यापार में लाभ पाने के लिए वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की पूजा करते समय उनके पास एक रुपये का सिक्का रखें और फिर वहां सिक्के की भी रोली और फूलों से पूजा करें और फिर उसे एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर तिजोरी में या फिर गल्ले में रख दें. इससे आपके व्यापार में वृद्धि होने लगेगी और निश्चय ही कार्य में बढ़ोतरी होगी.
गृह क्लेश दूर करें के लिए वरुथिनी एकादशी के दिन शंख लेकर आएं या फिर अगर आपके पास पहले से शंख रखा हुआ है तो सुबह स्नान करने के बाद एक पात्र में शंख रखकर उसपर दूध की धारा अर्पित करें और फिर उसको जल से साफ करके कपड़े से अच्छे से पोछ लें व घी का दीया जलाएं. इसके बाद उसमें दूध और केसर मिलाकर उस मिश्रण को समर्पित करें. फिर इसके बाद श्री लिखकर कुमकुम, चावल और पुष्प अर्पित करें और फिर भोग लगाकर पूजा संपन्न करें.
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यदि एक माह तक रोज आपके घर के अंदर कबूतर आने लगे तो समझ लीजिए आपके जीवन पर संकट का इशारा है. ऐसी स्थिति में आपको अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए.
यदि आपके घर में बंदूक, फरसा, तलवार आदि कोई अस्त्र-शस्त्र हैं और उन पर कोई मांस खाने वाला पक्षी आकर बैठ जाए. समझ लीजिए आपकी मृत्यु बहुत निकट है.
यदि आपके घर में मधुमक्खियां ने कई छत्ते लगा रखे हैं और उन छत्तों में से शहद अपने आप टपक रहा है तो समझिए घर में किसी की मृत्यु का संकेत है.
मत्स्य पुराण की अनुसार यदि सफेद रंग का कौवा आपको मैथुन या संभोग करते हुए दिख जाए तो यह बहुत गंभीर संकेत है. इसका अर्थ है कि निकट भविष्य में आपकी मृत्यु हो सकती है.
यदि आपके द्वार पर रोज या अक्सर उल्लू बोल रहा है तो मत्स्य पुराण के अनुसार उस घर के स्वामी की मृत्यु निश्चित है अथवा ऐसे घर का विनाश हो जाता है.
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍻
पैर के तलवे में जलन होना और गर्म हो जाना क्या कारण हो सकता है? पैर के तलवे में जलन और गर्मी महसूस होने के कई कारण हो सकते हैं। नीचे कुछ सामान्य कारण दिए गए हैं:
मधुमेह न्यूरोपैथी (मधुमेह न्यूरोपैथी)की वजह से वॅन्टलपता , जिससे ताल मिलता हैकी वजह से तारामंडल को नुकसान का पता चलता है, जिससे तलवों में जलन, झनझनाहट या सुन्नपन हो सकता है।
विटामिन की कमी विशेष रूप से विटामिन बी12 , बी6 , या फोलेट की कमी सेप्रतिभा से की कमी से स्पेक्ट्रम प्रभावित होता है, जिससे घाव हो सकता है।
रक्तचाप में रक्त शर्करा की समस्या जैसे पेरिफेरल धमनी डिजीज (PAD) या तंत्रिकाकम या फिर रेलवे में खून का प्रवाह कम हो गया।
थकान या अधिक थकान अधिकतर देर तक रहना, चलना या भारी काम करना तलवों में तनाव और जलन पैदा हो सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बार भगवान शिव माता सती को श्रीराम की महिमा बता रहे थे। वे कह रहे थे —सती, श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। वे स्वयं परब्रह्म, साक्षात् नारायण हैं जो इस पृथ्वी पर लीला करने आए हैं।
माता सती ने श्रद्धा से सुना, पर उनके मन में एक हल्का सा संदेह उठ गया —अगर वे भगवान हैं, तो फिर क्यों सीता के वियोग में दुखी होकर वन-वन भटक रहे हैं? इसी बीच भगवान शिव और माता सती ऋषि अगस्त्य के आश्रम पहुंचे, जहाँ श्रीराम की कथा का वर्णन हो रहा था।
राम कथा और सती का संशय
अगस्त्य मुनि बड़े भाव से बता रहे थे कि कैसे श्रीराम सीता माता के अपहरण के बाद व्याकुल हो गए, उन्हें ढूंढते रहे, रोए, पेड़ों से पूछते रहे, वनवासियों से पूछते रहे…सती ने देखा कि कोई व्यक्ति अगर भगवान है तो उसे तो सब पता होना चाहिए। फिर ये दुःख, ये खोज, ये अश्रु क्यों?उनके मन में एक सवाल गूंजा — क्या ये सच में वही भगवान हैं जिनकी महिमा शिवजी ने कही?
सती की परीक्षा और श्रीराम की अंतर्यामी दृष्टि जैसे ही शिवजी और सती वापस लौटने लगे, सती ने मन में सोचा —”मैं स्वयं जाकर देखती हूँ। अगर ये सच में नारायण हैं तो मुझे पहचान लेंगे।”उन्होंने माया से सीता माता का रूप धारण किया और श्रीराम के समक्ष प्रकट हुईं।
श्रीराम मुस्कराए।
उन्होंने सिर झुकाया और कहा —
“प्रणाम माता। क्या सब कुशल है?” माता सती हैरान रह गईं। उन्हें समझ आ गया कि श्रीराम तो सब कुछ जानने वाले हैं, उन्होंने सती को तुरंत पहचान लिया।वो शर्म से भर गईं और सिर झुका लिया। शिवजी का मौन और सती का मानसिक त्याग जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ कि सती ने श्रीराम की परीक्षा ली है, तो उन्होंने मन में सती का त्याग कर दिया।
उन्होंने सती से कोई कटु वचन नहीं कहे, कोई तिरस्कार नहीं किया, परंतु मौन हो गए। उनका यह मौन बहुत कुछ कह गया। सती भी समझ गईं कि उन्होंने जो किया वह ठीक नहीं था।
उन्होंने पश्चाताप किया, पर अब शिवजी की भक्ति एक ओर और श्रीराम के अनादर का बोझ दूसरी ओर था।
इस कथा से हमें क्या सीख मिलती है? भगवान की लीला को हमारी छोटी- सी बुद्धि से समझ पाना कठिन है। उनके दुख भी प्रेम के ही रूप हैं, और हर क्रिया में एक दिव्य उद्देश्य छुपा होता है।
हमें श्रद्धा रखनी चाहिए, न कि संदेह। और सबसे बड़ी बात — जो भगवान की परीक्षा लेने चलता है, वह खुद परीक्षा में फेल हो जाता है।
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके मन में प्रभु की लीला को लेकर कोई प्रश्न उठे, तो उत्तर खोजिए, पर श्रद्धा मत छोड़िए।क्योंकि श्रद्धा से भगवान मिलते हैं, और संदेह से दूर हो जाते हैं।
प्रिये पाठकों, कैसी लगी आपको यह कथा, अवश्य बताये। अगली कहानी के साथ आपके अपने परिवार आप हंसते रहें, मुस्कराते रहें और प्रभु को याद करते रहें।
धन्यवाद!
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।



