Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 02 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 02 अप्रैल 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – बुधवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 11:50 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 08:49 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य है। तथा राशि स्वामी शुक्र है।
⚜️ योग – आयुष्मान योग 02:49 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : बव – 01:07 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – बालव – 11:49 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:24 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:01 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:38 पी एम से 07:01 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:40 पी एम से 07:49 पी एम
💧 अमृत काल : 06:39 ए एम से 08:06 ए एम 04:04 ए एम, अप्रैल 03 से 05:33 ए एम, अप्रैल 03
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अप्रैल 03 से 12:47 ए एम, अप्रैल 03
❄️ रवि योग : 06:10 ए एम से 08:49 ए एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी मंदिर में हरे मूंग दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थिसिद्धि योग/श्री पंचमी/रवियोग/मंगल गोचर/ राष्ट्रीय फेरेट दिवस, राष्ट्रीय अपने उत्पाद प्रबंधक से प्यार करो दिवस, राष्ट्रीय मूंगफली का मक्खन और जेली दिवस, राष्ट्रीय आशा दिवस, अभिनेता विशाल वीरू “अजय” देवगन जन्म दिवस, राष्ट्रीय सुलह दिवस, भारतीय क्रिकेटर प्रिंस रणजीत सिंहजी स्मृति दिवस, विश्व आत्मकेंद्रित जागरूकता दिवस, स्वतंत्रता सेनानी वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर जयन्ती, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी टी. बी. कुन्हा जन्म दिवसविश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day)
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
घर में कलह होना: घर में लोगों के बीच में बिना किसी वजह के लड़ाई झगड़ा हो रहा है, तो यह वास्तु दोष के कारण हो सकता है.
स्वास्थ्य समस्याएं होना: अगर परिवार के लोग बार-बार बीमार हो रहें हैं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहें हैं, तो यह वास्तु दोष का संकेत हो सकता है.
आर्थिक परेशानी होना: अच्छी आर्थिक व्यवसाय और कमाई होने के बावजूद भी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, तो यह वास्तु दोष का कारण हो सकता है.
मुख्य दरवाजा दक्षिण दिशा में होना: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य दरवाजा दक्षिण दिशा में होना अशुभ माना जाता है.
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पेट के अल्सर की समस्या भी अक्सर अत्यधिक तनाव और गलत खानपान के कारण होती है। अमरूद के पत्ते पेट के अल्सर को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। इन पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट की दीवारों को मजबूत बनाते हैं और अल्सर से राहत देते हैं। इसके सेवन से गैस्ट्रिक जूस का संतुलन बना रहता है और पेट में जलन कम होती है।
त्वचा की समस्याओं का समाधान अमरूद के पत्तों के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी कई समस्याओं से निजात पाई जा सकती है। ये पत्ते एंटीआॅक्सिडेंट्स और विटामिन्स से भरपूर होते हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करते हैं। अगर आपको चेहरे पर मुहांसे, त्वचा पर दाग-धब्बे या रैशेज की समस्या है, तो अमरूद के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, इन पत्तों का काढ़ा पीने से भी आपकी त्वचा पर निखार आ सकता है।
दांतों और मसूड़ों की देखभाल अमरूद के पत्तों का उपयोग मुंह के स्वास्थ्य के लिए भी किया जा सकता है। इन पत्तों में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो दांतों और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से अमरूद के पत्तों का काढ़ा या रस मुंह में रखने से मसूड़ों से खून आना, सांस की बदबू और अन्य संक्रमणों से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, अमरूद के पत्तों को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
घरेलू नुस्खे:
गाजर और पालक का कमाल: गाजर में विटामिन A भरपूर होता है, जो आंखों के लिए बहुत अच्छा है। गाजर का जूस पिएं या सलाद खाएं। पालक भी बढ़िया है—ये रेटिना को मज़बूत करता है। मैं खुद गाजर का जूस रोज़ पीता हूँ और मेरी नज़र पहले से तेज़ लगती है!
बादाम और दूध: 5-6 बादाम रातभर पानी में भिगो दें, सुबह छीलकर दूध में मिलाकर पिएं। इसमें विटामिन E और ओमेगा-3 होता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाता है। मेरी दादी का ये फेवरेट नुस्खा था!
त्रिफला चूर्ण: एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी में मिलाकर रात को पिएं। ये आंखों की सेहत सुधारता है और जलन कम करता है। ये आयुर्वेदिक नुस्खा बहुत असरदार है।
गुलाब जल: थकी हुई आंखों पर 2-3 बूंद गुलाब जल डालें या रुई से आंखों पर रखें। इससे आंखों को ठंडक मिलती है और ताज़गी आजाए
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
प्राचीन काल की बात है, शेषनाग का एक महा बलवान पुत्र था। उसका नाम मणिनाग था। उसने भक्ति भाव से भगवान शंकर की उपासना कर गरुड़ से अभय होने का वरदान माँगा। भगवान् शंकर ने कहा–‘ठीक है, गरुड़ से तुम निर्भीक हो जाओ।तब वह नाग गरुड़ से निर्भय हो क्षीरसागर भगवान् विष्णु जहाँ निवास करते हैं, वहाँ क्षीर सागर के समीप विचरण करने लगा। उसकी इस प्रकार की धृष्टता देखकर गरुड़ को बड़ा क्रोध आया और उसने मणिनाग को पकड़ कर गरुड़ पाश में बाँधकर अपने घर में बन्द कर दिया।
इधर जब कई दिन तक मणिनाग भगवान शंकर के दर्शन को नहीं आया, तो नन्दी ने भगवान शंकर से कहा–‘हे देवेश ! मणिनाग इस समय नहीं आ रहा है, अवश्य ही उसे गरुड़ ने खा लिया होगा या बाँध लिया होगा। यदि ऐसा न होता तो वह क्यों न आता ?’तब नन्दी की बात सुनकर देवाधिदेव भगवान शिव ने कहा–‘नन्दिन् ! मणिनाग गरुड़ के घर पर बँधा हुआ पड़ा है, इसलिये शीघ्र ही तुम भगवान् विष्णु के पास जाओ और उनकी स्तुति करो। साथ ही स्वयं मेरी ओर से कहकर गरुड़ द्वारा बाँधे गये उस सर्प को ले आओ।
अपने स्वामी भगवान शिव का वचन सुनकर नन्दी ने लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के पास जाकर उनकी स्तुति की और उनसे भगवान शंकर का सन्देश कहा।
भगवान शंकर का सन्देश और नन्दी की स्तुति सुनकर नारायण विष्णु बड़े प्रसन्न हुए, उन्होंने गरुड़ से कहा–‘हे वैनतेय ! तुम मेरे कहने से मणिनाग को बन्धन मुक्त कर नन्दी को सौंप दो।’यह सुनकर गरुड़ क्रोधित हो गया। अहंकार में आकर बोला कि ‘स्वामी जन अपने भृत्यों को पुरस्कार देते हैं और एक आप हैं, जो मेरे द्वारा प्राप्त वस्तु को भी हर लेना चाहते हैं। हे नारायण ! मेरे बल से ही आप दैत्यों पर विजय प्राप्त करते हैं और स्वयं ‘मैं महाबलवान हूँ’, ऐसी डींग हाँकते हैं।
गरुड़ की अहंकारपूर्ण बातें सुनकर भगवान विष्णु ने हँसते हुए कहा–‘पक्षिराज ! तुम सचमुच मुझे पीठ पर ढोते-ढोते दुर्बल हो गये हो। हे खगश्रेष्ठ ! तुम्हारे बल से ही मैं सब असुरों को जीतता हूँ, जीतूँगा भी। अच्छा, तुम मेरी इस कनिष्ठि का अँगुली का भार वहन करो।’
यह कहकर भगवान विष्णु ने अपनी कनिष्ठिका अँगुली गरुड़ के सिर पर रख दी। अँगुली के रखते ही गरुड़ का सिर दबकर कोख में घुस गया और कोख भी दोनों पैरों के बीच घुस गयी, उसके समस्त अंग चूर-चूर हो गये ।तब वह अत्यन्त लज्जित, दीन, व्यथा से कराहता हुआ हाथ जोड़कर विनीत भाव से बोला–‘हे जगन्नाथ ! मुझ अपराधी भृत्य की रक्षा करो–रक्षा करो। प्रभो ! सम्पूर्ण लोकों को धारण करने वाले तो आप ही हैं। हे पुत्रवत्सल ! हे जगन्माता ! मुझ दीन-दुखी बालक की रक्षा करो।’ यह कहकर गरुड़ ने भगवान की प्रार्थना की।
यह देखकर करुणामयी भगवती लक्ष्मी ने भगवान जनार्दन से प्रार्थना की कि ‘प्रभु ! गरुड़ आपका सेवक है, उसका अपराध क्षमा कर उसकी रक्षा करें।’
भगवान् ने भी गरुड़ को विनीत और अहंकार रहित देखकर कहा कि ‘गरुड़ ! अब तुम भगवान शंकर के पास जाओ। भगवान शंकर की कृपा दृष्टि से ही तुम स्वस्थ हो सकोगे।’
गरुड़ ने प्रभु की आज्ञा स्वीकार कर नन्दी और मणिनाग के साथ गर्वरहित हो मन्दगति से भगवान शंकर के दर्शन के लिये प्रस्थान किया। उनका गर्व दूर हो चुका था। भगवान शंकर का दर्शनकर और उनके कहने से गौतमी गंगा में स्नानकर वे पुनः वज्रसदृश देहवाले और वेगवान हो गये।
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✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।


