धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 18 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 18 जून 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 01:35 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 12:23 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है।पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता हैं, अज एकपाद। एक पैर वाला अजन्मा।
⚜️ योग : प्रीति योग 07:40 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग 05:24 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
प्रथम करण : बव – 01:34 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 12:48 ए एम, जून 19 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 04:36 पी एम से 06:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जून 19 से 12:42 ए एम, जून 19
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय- गणेश मंदिर में कांस्य पात्र भेंट करें।
🌳 *वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार : कालाष्टमी/ पंचक जारी/ स्वतंत्रता संग्राम की नायिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई शहीद दिवस (तिथि अनुसार), घृणास्पद भाषण का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अभिनेत्री नसीम बानो पुण्य तिथि, सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी डे, ऑटिस्टिक प्राइड डे, मछली पकड़ने जाओ दिवस, अंतर्राष्ट्रीय आतंक दिवस, गोवा क्रांति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय पिकनिक दिवस, प्रसिद्ध राष्ट्रीय नेता सी. विजय राघवा चारियर जन्म दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 🪺 *Vastu tips* 🦚
भगवान श्रीकृष्ण और राधा की तस्वीर ईश्वर और भक्ति का प्रतीक है। यह प्रेम, भावना और समर्पण का सूचक है, इसलिए प्रेम-भाव में डूबी श्रीकृष्ण-राधा की तस्वीर घर में लगाने से दाम्पत्य संबंधों में मधुरता आती है, नीरसता का अंत होता है।
इसी प्रकार श्रीकृष्ण के मुकूट का मोर पंख सुख-समृद्धि का सूचक है, जिसका सकारात्मक प्रभाव घर-परिवार में खुशहाली लाता है। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर कर्म के लिए ही प्रेरित नहीं करती, बल्कि दाम्पत्य जीवन में स्नेह और प्यार की भावना पैदा करती है। वहीं माता राधिका की तस्वीर से समर्पण भावना जागती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
साधारण जीवन रख कर सभी बीमारियो को दूर किया जा सकता है
सुबह जल्दी जागे गरम पानी का सेवन करे ।
सुबह नास्ता के स्थान पे भरपूर खाना खाएं ।
सुबह से दोपहर के बीच मे कोई भी जीवित फल {बिना डिब्बा वाला} पत्ती किसी भी पेड़ की जैसे पान की बेल की मूली की पालक खाये ।
दोपहर में नास्ता करे भूख के हिसाब से .मन से नही शाम के समय भुना चना और गुड़ खाये ।
व्यायाम जरूर करे जिससे तन और मन दोनों स्वस्थ रहता है पुरुष है तो पैरो की एक्सरसाइज और महिला है तो दोनों पैरों को सीधे कर दोनों हाथों को एक साथ मिलकर चक्की चलने वाली एक्सरसाइज करें
हफ्ते में व्रत रहे जरूर ।काली मिर्च दालचिली सहद को एक मे मिलाकर चाय की तरह या ऐसे ही मुह में रखे ।
हफ्ते में दो दिन मंगरैल का सेवन करे ।
हो सके तो नॉन वेज का त्याग कर जिससे आप जानवरों को जीवीत देखे सकेंगे।
🍶 आरोग्य संजीवनी ☘️
इसे लेते समय किन बातों से बचना चाहिए
जबकि अश्वगंधा, सफेद मूसली और कौंच के बीज का पाउडर आमतौर पर सेवन के लिए सुरक्षित है, इसे लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सबसे पहले, जड़ी-बूटियों को एक विश्वसनीय और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता से प्राप्त करना महत्वपूर्ण है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे शुद्ध और दूषित पदार्थों से मुक्त हैं।
दूसरे, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श किए बिना पाउडर लेने से बचना चाहिए।
अंत में, अश्वगंधा, सफ़ेद मूसली और कौंच बीज समान मात्रा में एक शक्तिशाली पूरक हो सकते हैं जो समग्र स्वास्थ्य और भलाई को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। पाउडर बनाने की सही विधि का पालन करके, सही मात्रा में लेकर, और किसी भी संभावित जोखिम से बचकर, आप इन जड़ी-बूटियों के कई लाभ उठा सकते हैं और स्वाभाविक रूप से अपने समग्र स्वास्थ्य में वृद्धि कर सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग
🕯️
महाभारत में एकलव्य की कथा तो सभी जानते ही होंगे। हालांकि इस कथा के संबंध में लोगों के बीच बहुत भ्रांतियां फैलाई गई है।
महाभारत काल में प्रयाग (इलाहाबाद) के तटवर्ती प्रदेश में सुदूर तक फैला श्रृंगवेरपुर राज्य निषादराज हिरण्यधनु का था। गंगा के तट पर अवस्थित श्रृंगवेरपुर उसकी सुदृढ़ राजधानी थी। एक मान्यता अनुसार वे श्रीकृष्ण के चाचा का पुत्र था जिसे उन्होंने निषाद जाति के राजा को सौंप दिया था। हिरण्यधनु के मृत्यु के बाद एकलव्य वहां का राजा बना।
विष्णु पुराण और हरिवंश पुराण के अनुसार एकलव्य अपनी विस्तारवादी सोच के चलते जरासंध से जा मिला था। जरासंध की सेना की तरफ से उसने मथुरा पर आक्रमण करके यादव सेना का लगभग सफाया कर दिया था।
यादव सेना के सफाया होने के बाद यह सूचना जब श्रीकृष्‍ण के पास पहुंचती है तो वे भी एकलव्य को देखने को उत्सुक हो जाते हैं। दाहिने हाथ में महज चार अंगुलियों के सहारे धनुष बाण चलाते हुए एकलव्य को देखकर वे समझ जाते हैं कि यह पांडवों और उनकी सेना के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। तब श्रीकृष्‍ण का एकलव्य से युद्ध होता है और इस युद्ध में एकलव्य वीरगति को प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि युद्ध के दौरान एकलव्य लापता हो गया था। अर्थात उसकी मृत्यु बाद में कैसे हुई इसका किसी को पता नहीं है।
एकलव्य के वीरगति को प्राप्त होने के बाद उसका पुत्र केतुमान सिंहासन पर बैठता है और वह कौरवों की सेना की ओर से पांडवों के खिलाफ लड़ता है। महाभारत युद्ध में वह भीम के हाथ से मारा जाता है।
अब आते है आपके प्रश्न पर की श्री कृष्ण ने उसका वध क्यूं किया। श्री कृष्ण ने एकलव्य का वध इसीलिए किया क्यूंकि वो अधर्म का साथ दे रहा था। अधर्मी राजा जरासंध की तरफ से युद्ध कर रहा था। और श्री कृष्ण का तो धरती पर अवतरित होने का कारण ही अधर्म को मिटाना था इसीलिए उन्होंने वही किया।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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