धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 02 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 02 अगस्त 2024
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 03:27 PM तक उपरांत चतुर्दशी
📝 तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के देवता हैं त्रयोदशी और शिव। त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 10:59 AM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है। भगवान शिव के रुद्र रूप को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है।
⚜️ योग – हर्षण योग 11:45 AM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : वणिज – 03:26 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 03:35 ए एम, अगस्त 03 तक शकुनि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:25:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:35:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:19 ए एम से 05:01 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:40 ए एम से 05:43 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:11 पी एम से 07:32 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:11 पी एम से 08:14 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग : 10:59 ए एम से 05:44 ए एम, अगस्त 03
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 03 से 12:49 ए एम, अगस्त 03
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मखाने से बनी खीर अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/मास शिवरात्रि/सर्वार्थसिद्धि योग/ सावन शिवरात्रि/ सूर्य अश्लेशा नक्षत्र में प्रवेश/ भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ की रचना करने वाले पिंगली वेंकैया जन्म दिवस, टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार पुण्य तिथि, दादरा एवं नगर हवेली को मुक्त कराए जाने की वर्षगांठ, ब्रहम पाई दिवस, राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस, राष्ट्रीय सीएडी दिवस, राष्ट्रीय आइसक्रीम सैंडविच दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बीयर दिवस, अभिनेता कमल कपूर पुण्य तिथि, पद्म भूषण से सम्मानित रामकिंकर बैज स्मृति दिवस, विश्व स्तनपान दिवस (अगस्त का प्रथम सप्ताह)
✍🏼 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗽 Vastu tips_
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार घर में पूजा का स्थान का भी विशेष महत्व होता है। वास्तु के अनुसार पूजा स्थान अलग कमरे में होना चाहिए। साथ ही कमरे के दीवार का रंग हल्का होना चाहिए। इससे ईश्वर का वास होता है।
घर में रखी झाड़ू भी आपकी तकदीर बदल सकती है। इसलिए इसे भूलकर भी पैर न लगाएं। साथ ही इसे सार्वजनिक जगह पर न रखें। इसे हमेशा छुपाकर और लेटे हुए रखें। इससे घर में धन की कभी कमी नहीं होगी।
ग्रह दोषों से बचने के लिए घर की दीवारों पर हरियाली वाले चित्र लगाने चाहिए। इससे मन प्रसन्न रहेगा, जिससे खुशहाली का महौल बनेगा।
गंदे घर में कभी भी मां लक्ष्मी नहीं टिकती हैं, इसलिए इसे हमेशा साफ-सुथरा रखें। साथ ही रोजाना शाम को घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यात्रा की कुशलता व दु:स्वप्न-नाश का वैदिक उपाय
जातवेद्से सुनवाम सोममरातीयतो नि दहाति वेद : |
स न: पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्नि: ||
‘जिस उत्पन्न हुए चराचर जगत को जाननेवाले और उत्पन्न हुए सर्व पदार्थों में विद्यमान जगदीश्वर के लिए हम लोग समस्त ऐश्वर्ययुक्त सांसारिक पदार्थो का निचोड़ करते हैं अर्थात यथायोग्य सबको बरतते हैं और जो अधर्मियों के समान बर्ताव रखनेवाले दुष्ट जन के धन को निरंतर नष्ट करता है वह अनुभवस्वरूप जगदीश्वर जैसे मल्लाह नौका से नदी या समुद्र के पार पहुँचाता हैं, वैसे हम लोगों को अत्यंत दुर्गति और अतीव दुःख देनेवाले समस्त पापाचरणों के पार करता है | वाही इस जगत में खोजने के योग्य है |’ (ऋग्वेद : मंडल 1, सूक्त 99, मंत्र 1 )
यात्री उपरोक्त मंगलमयी ऋचा का मार्ग में जप करें तो वह समस्त भयों से छुट जाता है और कुशलपूर्वक घर लौट आता है | प्रभातकाल में इसका जप करने से दु:स्वप्न का नाश होता है |
(वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने में कठिनाई होती हो तो लौकिक भाषा में केवल इनके अर्थ का चिंतन या उच्चारण करके लाभ उठा सकते है | )
आरोग्य संजीवनी 🍶
जोड़ों के दर्द की दवा
एक चम्मच मेथी दाना, आधा चम्मच हल्दी और आधा चम्मच पीपरामूल चूर्ण रात को एक गिलास पानी में भिगो दिया | सुबह उबलने रख दिया, आधा हो जाय तो छान के खाली पेट पी लिया | 20 से 30 दिन तक यह प्रयोग करें, जोड़ों के दर्द में लाभ स्पष्ट महसूस होगा | दर्द अधिक हो तो ज्यादा दिन भी कर सकते हैं |
🌷 गुरु भक्ति योग_
🌸
शिवलिंग में विराजते हैं तीनों देव:-सबसे निचला हिस्सा जो नीचे टिका होता है वह ब्रह्म है, दूसरा बीच का हिस्सा वह भगवान विष्णु का प्रतिरूप और तीसरा शीर्ष सबसे ऊपर जिसकी पूजा की जाती है वह देवा दी देव महादेव का प्रतीक है, शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है तथा अन्य मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का निचला नाली नुमा भाग माता पार्वती को समर्पित तथा प्रतीक के रूप में पूजनीय है… अर्थात शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है। अन्य मान्यता के अनुसार, शिवलिंग का निचला हिस्सा स्त्री और ऊपरी हिस्सा पुरुष का प्रतीक होता है। अर्थता इसमें शिव और शक्ति, एक साथ में वास करते हैं।
शिवलिंग का अर्थ:-शास्त्रों के अनुसार ‘लिंगम’ शब्द ‘लिया’ और ‘गम्य’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ ‘शुरुआत’ व ‘अंत’ होता है। तमाम हिंदू धर्म के ग्रंथों में इस बात का वर्णन किया गया है कि शिव जी से ही ब्रह्मांड का प्राकट्य हुआ है और एक दिन सब उन्हीं में ही मिल जाएगा।
शिवलिंग में विराजते त्रिदेव:- हम में लगभग लोग यही जानते हैं कि शिवलिंग में शिव जी का वास है। परंतु क्या आप जानते हैं इसमें तीनों देवताओं का वास है। कहा जाता है शिवलिंग को तीन भागों में बांटा जा सकता है। सबसे निचला हिस्सा जो नीचे टिका होता है, दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरा शीर्ष सबसे ऊपर जिसकी पूजा की जाती है।
निचला हिस्सा ब्रह्मा जी (सृष्टि के रचयिता), मध्य भाग विष्णु (सृष्टि के पालनहार) और ऊपरी भाग भगवान शिव (सृष्टि के विनाशक) हैं। अर्थात शिवलिंग के जरिए ही त्रिदेव की आराधना हो जाती है। तो वहीं अन्य मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का निचला हिस्सा स्त्री और ऊपरी हिस्सा पुरुष का प्रतीक होता है। अर्थता इसमें शिव-शक्ति, एक साथ वास करते हैं।
शिवलिंग की अंडाकार संरचना:-कहा जाता है शिवलिंग के अंडाकार के पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक, दोनों कारण है। अगर आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो शिव ब्रह्मांड के निर्माण की जड़ हैं। अर्थात शिव ही वो बीज हैं, जिससे पूरा संसार उपजा है। इसलिए कहा जाता है यही कारण है कि शिवलिंग का आकार अंडे जैसा है। वहीं अगर वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो ‘बिग बैंग थ्योरी’ कहती है कि ब्रह्मांड का निमार्ण अंडे जैसे छोटे कण से हुआ है।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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