
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 18 मार्च 2026
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। *बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 08:25 AM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 05:21 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं। इसके देवता अजैकपाद (शिव का एक रूप) हैं।
⚜️ योग : शुभ योग 04:01 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण – शकुनि 08:25 AM तक
✨ द्वितीय करण – चतुष्पद 07:43 PM तक, बाद नाग
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:13:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 04:52 ए एम से 05:40 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या – 05:16 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त – 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 06:29 पी एम से 06:53 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या – 06:31 पी एम से 07:43 पी एम
💧 अमृत काल – 09:37 पी एम से 11:10 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:05 ए एम, मार्च 19 से 12:53 ए एम, मार्च 19
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दर्श अमावस्या/ अन्वाधान/ पञ्चक जारी न/आडल योग/ अमावस्या प्रारम्भ सुबह 08.25/ शाहाजी राजा भोसले जयन्ती (अंग्रेजी दिनांक के अनुसार)/ बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्माता शशि कपूर जन्म दिवस, आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी गुरबख्श सिंह ढिल्लों जन्म दिवस, विश्व पुनर्चक्रण दिवस, क्रिकेटर एकनाथ धोंडू सोलकर जयन्ती, राष्ट्रीय सर्वोच्च बलिदान दिवस, राष्ट्रीय जैवडीजल दिवस, राष्ट्रीय बाल शोषण जागरूकता दिवस, प्रसिद्ध पंजाबी गायक बाबू मान जन्म दिवस, भारतीय चित्रकार विश्वनाथ नागेशकर स्मृति दिवस, भारत में आयुध निर्माण दिवस (Ordnance Factory Day)
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗺️
वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा फोटो फ्रेम लगाने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। इस दिशा में परिवार की सामूहिक तस्वीर लगाने से रिश्तों में स्थिरता आती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
*वास्तु में कुछ दिशाओं में तस्वीरें लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में पति-पत्नी या वैवाहिक जीवन से जुड़ी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। इससे रिश्तों में अनबन या तनाव की स्थिति बन सकती है। *इसके अलावा वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है, इसलिए इस दीवार पर कपल फोटो लगाने से बचना बेहतर माना जाता है। वहीं, पूर्व दिशा में उदासी या नकारात्मक भाव वाली तस्वीरें लगाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।
*घर का ईशान कोण बेहद पवित्र माना जाता है। इस स्थान पर भगवान की तस्वीर या धार्मिक चित्र लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन यहां दंपति की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
किशमिश आमतौर पर छोटे आकार की होती है और इसे छोटे अंगूरों को सुखाकर बनाया जाता है। इसका रंग हल्का भूरा या सुनहरा होता है और इसमें अक्सर बीज नहीं होते। इसे लोग मिठाइयों, खीर, पुलाव या सूखे मेवे के रूप में खाते हैं।
*वहीं मुनक्का आकार में किशमिश से बड़ा होता है और आमतौर पर गहरे भूरे या काले रंग का होता है। इसमें अक्सर एक या दो बीज भी होते हैं। मुनक्का का स्वाद थोड़ा ज्यादा मीठा और भारी होता है, इसलिए आयुर्वेद में इसे खास महत्व दिया गया है। *अब बात करें कि मुनक्का सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है।
*सबसे पहले, मुनक्का को ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा देने में मदद करती है। इसलिए कमजोरी या थकान महसूस होने पर लोग मुनक्का खाना पसंद करते हैं। *मुनक्का का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि यह खांसी और गले की समस्या में राहत देने में मदद कर सकता है। कई लोग रात में 4–5 मुनक्के दूध में उबालकर खाते हैं, जिससे गले को आराम मिलता है और सूखी खांसी में भी राहत मिल सकती है।
*इसके अलावा मुनक्का पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसमें फाइबर होता है जो पेट साफ रखने और कब्ज की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। जो लोग पेट की गड़बड़ी से परेशान रहते हैं, उनके लिए सीमित मात्रा में मुनक्का फायदेमंद हो सकता है। 🍻 *आरोग्य संजीवनी* 🥃
अगर आपको बिना किसी कारण के पैरों में दर्द के साथ ऐंठन और मांसपेशियों में खिंचाव हो रहा है, तो यह खून के थक्के का संकेत हो सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों को पेट में भी दर्द जैसा हो सकता है। यह दर्द कुछ सेकंड या फिर कई मिनटों तक हो सकता है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज न करें और फौरन डॉक्टर से दिखाएं।
सांस लेने में परेशानी होना नसों मेें खून की रुकावट के कारण सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसे संकेत पल्मोनरी एम्बोलिज्म (पीई) का संकेत हो सकता है एक्सपर्ट का कहना है कि अगर खून का क्लॉट जम गया है, तो सांस लेने में तकलीफ घंटों, यहां तक कि कई दिनों तक भी रह सकती है। अगर आपको ऐसे संकेत दिख रहे हैं, तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
सीने में दर्द दिल की समस्या होना भी नसों में खून की रुकावट होने का संकेत हो सकता है, लेकिन यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) का भी संकेत हो सकता है। सीने में दर्द या तो लगातार बना रहेगा या गहरी सांस लेने में ऐसी परेशानी दिखेगी। अगर आपको इस तरह की दिक्कत महसूस हो रही है, तो एक बार अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
ब्रह्मा जी की पुत्री #अहिल्या को यह वरदान प्राप्त था कि वह सदा ही 16 वर्ष की आयु के सदृश ही रहेंगी।
ब्रह्मा जी ने एक स्पर्धा करवाई, जिसे गौतम ऋषि ने जीता और अहिल्या को पत्नी रूप में प्राप्त किया।
अहिल्या के रूप की चर्चा तीनों लोकों में थी। अपने रूप, गुण, सौन्दर्य और पतिव्रत धर्म के पालन के कारण ही वह भक्तों के मन में बसी हुई हैं।
देवराज इन्द्र ने जब अहिल्या के बारे में सुना तो उन्होंने सूर्य से उसकी सुन्दरता के बारे में पूछा।* सूर्यदेव ने इन्द्र देव की भावना भांप कर अपनी असमर्थता जताई। तब इंद्र ने चंद्रमा से पूछा तो उसने कहा कि अहल्या से अधिक रूपवती, गुणवान और पतिव्रता स्त्री सारी सृष्टि में कोई और नहीं है। ऐसा सुनकर इन्द्र ने छल रूप से अहिल्या को पाने का प्रयास करते हुए चंद्रमा की सहायता ली। योजना बनाई कि जब ऋषि गौतम प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान को जाते हैं वही समय अहिल्या को पाने के लिए सही है।
इंद्र ने चन्द्रमा को अपने काम में साथ देने के लिए उन्हें ऋषि के आश्रम के ऊपर ही टिके रहने के लिए कहा ताकि जब वह किसी को आश्रम की ओर आता देखे तो वह आश्रम के ऊपर से हट जाए क्योंकि चंद्रमा के हटने पर किसी को शक भी नहीं होगा तथा इन्द्र को ऋषि के आने की सूचना भी चंद्रमा के इस संकेत से मिल जाएगी।
अहिल्या को पाने की लालसा से आधी रात को ही इंद्र ने मुर्गा बन कर बांग लगाई और ऋषि गौतम प्रात: हो गई सोचकर गंगा स्नान के लिए आश्रम से निकल गए।
तब इंद्र ने झट से ऋषि गौतम का वेश बनाया और आश्रम में जाने लगे तो अहिल्या ने अपने तपोबल के प्रभाव से इंद्र को पहचान लिया और कहा कि ‘यदि मेरे पति हो तो आश्रम में आ जाओ’। इंद्र के छल की लालसा को देखकर अहिल्या ने उसे श्राप दिया कि तुम्हें कोढ़ हो जाए। दूसरी तरफ जब ऋषि गौतम ने गंगा स्नान करने के लिए कमंडल में जल भरा तो गंगा मां ने कहा कि अभी तो आधी रात हुई है, तो ऋषि आश्रम की ओर वापस चल पड़े।*
आश्रम के बाहर उन्होंने अपने वेश में ही इन्द्र को अपने साथ टकरा कर जाते हुए देखा और छत पर चन्द्रमा को पहरेदारी करते देखकर सारी स्थिति को भांप लिया। ऋषि पत्नी अहिल्या उनके जल्दी आश्रम में लौट आने की चिंता में जैसे ही बाहर आई तो ऋषि गौतम ने अहिल्या को शिला होने और चन्द्रमा को इन्द्र का साथ देने के लिए उसमें दाग होने और ग्रहण लगने का तत्काल श्राप दे दिया।* जिसके प्रभाव से अहिल्या आश्रम के बाहर एक पत्थर की शिला बन गई। देवर्षि नारद ने तब ऋषि गौतम को अहिल्या के बेकसूर होने के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि श्राप तो नहीं मिटाया जा सकता परन्तु उन्होंने अहिल्या को एक वरदान भी दिया कि सूर्यवंशी भगवान श्री राम जब उस शिला के साथ अपने चरणों का स्पर्श करेंगे तो वह पूर्ववत हो जाएगी।*
धर्मग्रंथों में चंद्रमा के कलंक लगने और ग्रहण लगने के बारे में भी अनेक कथाएं मिलती हैं, परंतु ऋषि गौतम का श्राप भी उनमें से एक है।* मिथिला में राजा जनक के धनुष यज्ञ को दिखाने के लिए गुरु विश्वामित्र उन्हें साथ लेकर जा रहे थे तो ‘आश्रम एक दीख मग माहीं, खग, मृग, जीव जन्तु तंह नाहीं, पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी, सकल कथा मुनि कहा बिसेषी’।*
गुरु विश्वामित्र ने बताया ‘गौतम नारी श्राप बस उपल देह धरि धीर, चरण कमल रज चाहति, कृपा करो रघुबीर’।* श्री राम जी के पवित्र एवं शोक का नाश करने वाले चरणों का स्पर्श पाते ही वह तपोमूर्ति अहल्या प्रकट हो गई और भक्तों को सुख देने वाले प्रभु को सामने देखकर वह प्रभु चरणों से लिपट गई।*
परसत पद पावन सोकनसावन प्रगट भई तपपुंज सही।* देखत रघुनायक जन सुखदायक सनमुख होइ कर जोरि रही॥*
अति प्रेम अधीरा पुलक शरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।
अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही॥
भावार्थ:-श्री रामजी के पवित्र और शोक को नाश करने वाले चरणों का स्पर्श पाते ही सचमुच वह तपोमूर्ति अहल्या प्रकट हो गई। भक्तों को सुख देने वाले श्री रघुनाथजी को देखकर वह हाथ जोड़कर सामने खड़ी रह गई। अत्यन्त प्रेम के कारण वह अधीर हो गई। उसका शरीर पुलकित हो उठा, मुख से वचन कहने में नहीं आते थे। वह अत्यन्त बड़भागिनी अहल्या प्रभु के चरणों से लिपट गई और उसके दोनों नेत्रों से जल (प्रेम और आनंद के आँसुओं) की धारा बहने लगी॥* धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।*
अति निर्मल बानी अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई॥* मैं नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।*
राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई॥* भावार्थ:-फिर उसने मन में धीरज धरकर प्रभु को पहचाना और श्री रघुनाथजी की कृपा से भक्ति प्राप्त की। तब अत्यन्त निर्मल वाणी से उसने (इस प्रकार) स्तुति प्रारंभ की- हे ज्ञान से जानने योग्य श्री रघुनाथजी! आपकी जय हो! मैं (सहज ही) अपवित्र स्त्री हूँ, और हे प्रभो! आप जगत को पवित्र करने वाले, भक्तों को सुख देने वाले और रावण के शत्रु हैं। हे कमलनयन! हे संसार (जन्म-मृत्यु) के भय से छुड़ाने वाले! मैं आपकी शरण आई हूँ, (मेरी) रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए॥*
मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।
देखेउँ भरि लोचन हरि भव मोचन इहइ लाभ संकर जाना॥
बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।* पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना॥ भावार्थ:-मुनि ने जो मुझे शाप दिया, सो बहुत ही अच्छा किया। मैं उसे अत्यन्त अनुग्रह (करके) मानती हूँ कि जिसके कारण मैंने संसार से छुड़ाने वाले श्री हरि (आप) को नेत्र भरकर देखा। इसी (आपके दर्शन) को शंकरजी सबसे बड़ा लाभ समझते हैं। हे प्रभो! मैं बुद्धि की बड़ी भोली हूँ, मेरी एक विनती है। हे नाथ ! मैं और कोई वर नहीं माँगती, केवल यही चाहती हूँ कि मेरा मन रूपी भौंरा आपके चरण-कमल की रज के प्रेमरूपी रस का सदा पान करता रहे॥*
जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।
सोई पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।
एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।* जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पति लोक अनंद भरी॥*
*_भावार्थ:-जिन चरणों से परमपवित्र देवनदी गंगाजी प्रकट हुईं, जिन्हें शिवजी ने सिर पर धारण किया और जिन चरणकमलों को ब्रह्माजी पूजते हैं, कृपालु हरि (आप) ने उन्हीं को मेरे सिर पर रखा। इस प्रकार (स्तुति करती हुई) बार-बार भगवान के चरणों में गिरकर, जो मन को बहुत ही अच्छा लगा, उस वर को पाकर गौतम की स्त्री अहल्या आनंद में भरी हुई पतिलोक को चली गई॥
- *अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित दयाल।
- *तुलसिदास सठ तेहि भजु छाड़ि कपट जंजाल *भावार्थ:-प्रभु श्री रामचन्द्रजी ऐसे दीनबंधु और बिना ही कारण दया करने वाले हैं। तुलसीदासजी कहते हैं, हे शठ (मन)! तू कपट-जंजाल छोड़कर उन्हीं का भजन कर॥
*!!राम राम सब कोई कहे,ठग ठाकुर और चोर!! !! जिस राम से मीरा तले,वह राम कोई और!! •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ *अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
*_ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।



