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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 21 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 21 जनवरी 2026
21 जनवरी 2026 दिन बुधवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया उपरांत तृतीया तिथि है। आज सूर्य भगवान उत्तराषाढा नक्षत्र से चलकर (दिन में 10.12 AM पर) अभिजीत् नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। हेमू कल्याणी जो सिंध प्रदेश के रहने वाले थे। उनका शहिद दिवस भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “हेमू कालाणी जी के शहिद दिवस” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है। बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – बुधवार माघ माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 02:47 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 01:58 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र के देवता अष्ट वसु हैं, जो धन, समृद्धि और प्रकृति के दिव्य नियम से जुड़े आठ मूल देवता हैं, और इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह मंगल हैं।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 06:58 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : तैतिल 02:48 PM तक, बाद गर 02:47 AM तक
द्वितीय करण : वणिज पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:55:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त 05:27 ए एम 06:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या 05:54 ए एम से 07:14ए एम
✡️ विजय मुहूर्त 02:19 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त 05:49 पी एम से 06:15 पी एम तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या 05:51 पी एम 07:11 पी एम तक
💧 अमृत काल 07:06 ए एम 08:44 ए एम (22 जनवरी)
🗣️ निशिता मुहूर्त 12:06 पी एम से 12:59 पी एम (22 जनवरी)
❄️ रवि योग : 01:58 पी एम – 07:14 ए एम (22 जनवरी)
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पञ्चक जारी/ रवि योग/ विडाल योग/ द्विपुष्कर योग/ राज योग/ हेमू कालाणी जी शहिद दिवस, भारतीय फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जन्म दिवस, व्लादिमीर लेनिन पुण्य तिथि, भारतीय क्रांतिकारी नेता रास बिहारी बोस स्मृति दिवस, विश्व धर्म दिवस, राष्ट्रीय गले लगाने का दिवस, पंजाब के मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ जन्म दिवस, प्रसिद्ध लेखिका प्रतिभा राय जयन्ती, मेघालय स्थापना दिवस, मणिपुर स्थापना दिवस, त्रिपुरा स्थापना दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वॉशरूम में नीले रंग की बाल्टी रखें और नहाने के लिए लकड़ी या पत्थर का पाट रखें। स्नानघर में किसी भी तरह की तस्वीर नहीं लगाना चाहिए बल्की उचित दिशा में एक छोटासा दर्पण होना चाहिए। स्नानघर में मनी प्लांट लगाना अच्‍छा होता है। स्नानघर में वास्तुदोष दूर करने के लिए नीले रंग के मग और बाल्टी का उपयोग करना चाहिए।
*घर के आसपास केला, तुलसी, मनी प्लांट, अनार, पीपल, बड़, आम, नारियल, बांस, जामुन और जामफल के पेड़ पौधे होना चाहिए, कांटेदार नहीं। *हमेशा समय समय पर द्वार और देहली की पूजा करें और इसे साफ सुथरा रखें।
*किसी भी दिशा में गलत रंग के पत्थर का फर्श ना बनवाए। उत्तर में काले, उत्तर-पूर्व में आसमानी, पूर्व में गहरे हरे, आग्नेय में बैंगनी, दक्षिण में लाल, नैऋत्य में गुलाबी, पश्चिम में सफेद और वायव्य में ग्रे रंग के फर्श होना चाहिए। यदि आप अलग अलग रंग के पत्थर नहीं लगवाना चाहते हैं तो आप सभी कमरों में गहरे हरे या फिर पीले रंग का फर्श लगवा सकते हैं, पीले में पिताम्बर उत्तम है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां*⚜️ सोमरस सोम के पौधे से प्राप्त होता था, आज सोम का पौधा लगभग विलुप्त है। *सोमरस, सोम नाम की जड़ीबूटी थी जिसमे दूध और दही मिलाकर ग्रहण किया जाता था, इससे व्यक्ति बलशाली और बुद्धिमान बनता था।
*जब यज्ञ होते थे तो सबसे पहले अग्नि को आहुति सोमरस से दी जाती थी। *ऋग्वेद में सोमरस पान के लिए अग्नि और इंद्र का सैकड़ो बार आह्वान किया गया है।
*आज का चरणामृत/पंचामृत सोमरस की तर्ज पर ही बनाया जाता है बस प्रकृति ने सोम जड़ीबूटी हमसे छीन ली। 🫚 *आरोग्य संजीवनी* 🧄 सर्दियों के मौसम में लहसुन का सेवन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाता है। सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में लहसुन की 2 से 3 कलियां ही खानी चाहिए। अगर आप इसे कच्चा खा रहे हैं, तो 1 या 2 कली पर्याप्त है, क्योंकि बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन या एसिडिटी की समस्या हो सकती है। लहसुन का पूरा लाभ लेने का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप इसे सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ खाएं, जिससे यह खून को साफ करने और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सबसे ज्यादा असरदार होता है। जहाँ तक सुबह और शाम दोनों वक्त खाने की बात है, तो आप इसे बिल्कुल खा सकते हैं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, जबकि शाम को या रात के खाने में आप इसे सब्जी या दाल में पकाकर शामिल कर सकते हैं। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, अगर आप कच्चा लहसुन खा रहे हैं, तो उसे बारीक काटकर या कूटकर 5-10 मिनट के लिए छोड़ दें; ऐसा करने से उसमें ‘एलिसिन’ नाम का तत्व सक्रिय हो जाता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। 🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
पूजा में बैठ कर जो कार्य नही करने चाहिए..
👉🏼 यें सामान्य ज्ञान हर हिन्दू को होना चाहिए..
🔸इन 21 वस्तुओं को सीधे पृथ्वी पर रखना वर्जित होता है।ये वस्तुएं पृथ्वी की ऊर्जा को अव्यवस्थित करती हैं और उस स्थान को अशुभ बनाती हैं। मोती, शुक्ति (सीपी), शालिग्राम, शिवलिंग, देवी मूर्ति, शंख, दीपक, यन्त्र, माणिक्य, हीरा, यज्ञसूत्र (यज्ञोपवीत), फूल, पुष्पमाला, जपमाला, पुस्तक, तुलसीदल, कर्पूर, स्वर्ण, गोरोचन, चंदन और शालिग्राम को स्नान कराया अमृत जल॥
🔸- मूर्ति स्नान में मूर्ति को अंगूठे से न रगड़ें।
🔸- पीपल को नित्य नमस्कार पूर्वाह्न के पश्चात् दोपहर में ही करना चाहिए।इसके बाद न करें।
🔸 – जहां अपूज्यों की पूजा होती है और विद्वानों का अनादर होता है,उस स्थान पर दुर्भिक्ष, मरण और भय उत्पन्न होता है।
🔸भैरव की पूजा में तुलसी स्वीकार्य नहीं है।
🔸- भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।
🔸- देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।
🔸- किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।
🔸- एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए।
🔸- बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।
🔸- शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।
🔸- शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुमकुम नहीं चढ़ते।
शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा,देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।
🔸 अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावे।
🔸- एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।
🔸- सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।
🔸- बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छू कर प्रणाम करें।
🔸 जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं।इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
🔸- जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।
🔸- जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
🔸- संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
🔸 दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
🔸 यज्ञ,श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।
🔸- शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए।परिक्रमा करना श्रेष्ठ है।
🔸- नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।
🔸- विष्णु भगवान को चावल गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।
🔸- पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।
🔸 बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।
🔸- पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।
🔸- सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।
🔸- गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।
*
🔸- पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।
🔸- दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।
🔸- सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।
🔸- पूजन करने वाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।
🔸 पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा,धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।
🔸- घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।
🔸- गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं।
🔸- कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोड़कर निषेध है।
🔸- बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नहीं करते।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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