20 एकड़ जमीन पर 1100 तुलसी गमलों के साथ होगा तुलसी विवाह, यजमानों के साथ प्रसिद्व संत होंगे शामिल
संत अयोध्या से भगवान शालिग्राम की बारात लेकर आएंगे, यजमान करेंगे कन्यादान, बढ़ती है सुख समृद्वि
सिलवानी । तहसील के ग्राम सांईखेड़ा में आयोजित होने वाले तुलसी विवाह को लेकर गांव में पिछले 1 माह से तैयारियां की जा रही थी, इस बार 13 से 15 नंवबर के बीच तुलसी शालिगराम विवाह कार्यक्रम आयेाजित किया जाएगा। जिसमें 20 एकड़ जमीन पर ग्रामीणों के सहयोग से 11 सौ तुलसी पौधे के साथ भगवान शालिगराम का विवाह सम्पन्न होगा। भगवान की बारात जन्मेजय शरण महाराज भगवान की बारात लेकर गांव आएंगे, जहां ग्रामीण घराती बनकर बारात की आगवानी करेंगे। तीन दिवसीय इस विवाहोत्सव में 13 नवंबर को तेल, हल्दी, 14 नवंबर को मंडप तथा 15 नवंबर को बारात आगमन और तुलसी-शालिगराम विवाह होगा। 1100 जोड़े यजमान तुलसी विवाह में कन्यादान करेंगे। कथा वाचक विपिन बिहारी महाराज कथा का वाचन करेंगे। तुलसी शालिग्राम विवाह की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए 1100 तुलसी पौधे, खांभ तैयार किए जा रहे है। विवाह उपरांत यह तुलसी के गमले यजमानों को वितरित किए जाएंगे जो अपने अपने घरों में नित्य तुलसी और शालिगराम जी की पूजा अर्चना करेंगे। आयोजकों ने 20 एकड़ भूमि पर विशाल पांडाल, पार्किंग एवं भोजन शाला का निर्माण किया जाएगा।
वर पक्ष से श्री लक्ष्मीनारायण बड़ा मंदिर साईखेड़ा के पुजारी शिवकुमार शुक्ला एवं समस्त ग्रामवासी होंगे।
वर वधु पक्ष से प्रसिद्व संत निभाएंगे भूमिका
कार्यक्रम में वर पक्ष से श्री श्री 1008 अनंत थी विभूषित रसिक पीठाधीश्वर महान्त जन्मेजय शरण जी महाराज जानकी घाट बड़ास्थान अयोध्या, सांवरे सरकार गौ पीठाधीश्वर महंत 108 विपिन बिहारी दास महाराज, श्री 1008 महंत विजय रामदास जी महाराज, श्री श्याम शरण जी महाराज अयोध्या, श्री 108 रामदास महाराज, आचार्य प्रद्युम्न द्विवेदी झंडा वाले एवं वधु पक्ष से 1008 बापौली धाम के ब्रह्मचारी, श्री नागा 1008 रामदास महाराज पासीघाट, 1008 रामकृष्ण दास महाराज रोसरा, श्री 1008 बृजकिशोर दास बोरास, श्री 1008 महंत नीलमणि दास महाराज, वेदाचार्य रामकृपाल महाराज अपनी अपनी भूमिका निभाएंगे।
पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार माता तुलसी ने भगवान विष्णु को नाराज होकर श्राप दिया था कि वे काला पत्थर बन जाएं। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु ने शालिगराम पत्थर के रूप में अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया। पद्म पुराण के मुताबिक तुलसी जी, लक्ष्मी का ही रूप हैं और भगवान विष्णु ने शालिगराम का रूप लिया था। पंडित शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि तुलसी विवाह करने से पति-पत्नी के बीच विश्वास का संबंध मजबूत बनता है। हर तरह की दिक्कतें दूर हो जाती हैं। तुलसी विवाह करने से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां लक्ष्मीनारायण की कृपा बनी रहती है।
बाइट 01 शिवशंकर शुक्ला पुजारी
बाइट 02 सत्यम मिश्रा शिक्षक
बाइट 03 रमेश सिंह रघुवंशी
बाइट 04 शिवकुमार साहू



