मध्य प्रदेश

उमरियापान के बड़े देवाला की अनूठी महिमा, शुभ कार्यों से पहले बड़ी माई को देते हैं निमंत्रण

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  आस्था, विश्वास और प्राचीन परंपराओं की अनूठी पहचान उमरियापान का बड़ा देवाला मंदिर क्षेत्र की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है ।  यहां विराजमान बड़ीमाई के दरबार में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है ।  मान्यता है कि इस विशाल मंदिर का निर्माण दैवीय शक्ति से महज एक रात में हुआ था ।  कलचुरीकालीन विरासत से जुड़ी लोकमान्यताओं के कारण यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है ।
*एक रात में मंदिर निर्माण की लोकमान्यता*
बड़े देवाला मंदिर को लेकर क्षेत्र में अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं । लोकमान्यता के अनुसार, कलचुरी राजाओं ने बड़ीमाई के इस विशाल मंदिर का निर्माण कराया था और इसका निर्माण दैवीय शक्ति से एक ही रात में पूरा हुआ था ।  हालांकि, एक रात में मंदिर निर्माण की मान्यता की ऐतिहासिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही यह कथा मंदिर की विशिष्ट पहचान का हिस्सा बन चुकी है ।  समय के साथ मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बन गया है ।
*एक परिसर में अनेक देवी-देवताओं के दर्शन*
बड़े देवाला मंदिर परिसर की विशेषता यह है कि यहां बड़ीमाई के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को कई अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने का अवसर भी मिलता है । परिसर में गणेश मंदिर, बद्री विशाल मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, राम-जानकी दरबार, भोलेनाथ मंदिर और हनुमान मंदिर स्थित हैं ।  एक ही परिसर में अनेक मंदिर होने के कारण यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है ।  विशेष रूप से नवरात्र पर्व और अन्य मांगलिक अवसरों पर मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है ।
*शुभ कार्यों से पहले बड़ीमाई को देते हैं निमंत्रण*
बड़े देवाला मंदिर की सबसे खास परंपराओं में घर में होने वाले शुभ कार्यों से पहले बड़ीमाई को निमंत्रण देने की परंपरा शामिल है ।  क्षेत्र में किसी परिवार में शादी-विवाह या अन्य मांगलिक आयोजन होने पर लोग सबसे पहले बड़ीमाई के दरबार में पहुंचते हैं ।  यहां माता रानी के दर्शन-पूजन कर उन्हें आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की परंपरा निभाई जाती है ।  श्रद्धालु माता रानी से परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय आयोजन की कामना करते हैं ।
मान्यता है कि माता रानी का आशीर्वाद लेने के बाद ही परिवारों में शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है ।  आयोजन संपन्न होने के बाद भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माता रानी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं ।  यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी अभिन्न हिस्सा बन चुकी है ।  पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही इस परंपरा ने बड़े देवाला मंदिर को लोगों के पारिवारिक जीवन से गहराई से जोड़ रखा है ।
*नवरात्र में महाआरती और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व*
शारदीय नवरात्र के अवसर पर बड़े देवाला मंदिर में भक्ति और आराधना का विशेष माहौल बना हुआ है ।  श्रद्धालु बड़ीमाई के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं ।  मंदिर में प्रतिदिन शाम को महाआरती का आयोजन किया जा रहा है । आरती के दौरान माता रानी के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है ।  श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना के साथ माता रानी के चरणों में शीश नवाते हैं ।
प्राचीन विरासत, धार्मिक मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के कारण उमरियापान का बड़ा देवाला मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है ।

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