श्रीराम यज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस हुये मूर्तियोे के विभिन्न संस्कार हुये
सिलवानी। सिलवानी तहसील के ग्राम देवरी जागीर में सप्त दिवसीय श्रीरामयज्ञ प्रतिष्ठा समारोह के चतुर्थ दिवस प्रातः पंचाग पूजन के साथ यज्ञ का शुभारंभ किया गया। राम दरबार एवं मां दुर्गा, षिवजी की मूर्तियों का अन्नादिवास, पुष्पादिवास, मिष्ठादिवास, घृतादिवास संस्कार सम्पन्न किये गये।
यज्ञ का आयोजन लोकविजय शाह, निर्मल शाह, नीलमणी शाह के परिवार द्वारा ग्राम के मंदिरों में मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा एवं यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञाचार्य पंडित रेवाषंकर शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंडप पूजन किया गया। पंडित रेवाषंकर शास्त्री ने यज्ञ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्रमुख अंग है। सनातन धर्म में प्रति देने यज्ञ करने की बात कही है। वर्तमान समय में समयाभाव के कारण यह संभव नहीं है। लेकिन जीवन में प्रत्येक सनातन प्रेमी को यज्ञ में प्रतिवर्ष सम्मिलित होना ही चाहिए क्योंकि यज्ञ से श्रेष्ठ कोई दूसरा धर्म नहीं है। यज्ञ में दान करने से धन पवित्र होता है। यज्ञ में श्रम करने से तन पवित्र होता है। यज्ञ में आहुति देने से मन पवित्र होता है। यज्ञनारायण की परिक्रमा करने से तीर्थों से दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है इस हेतु एक का सर्वोत्तम साधन है मुक्ति का।
यज्ञ में समस्त देवताओं का आह्वान किया गया है। यज्ञ सदैव विश्व कल्याण की भावना से किया जाता है। यज्ञ सम्पूर्ण संपूर्ण प्राणियों का भौतिक (सांसारिक) आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। इस कारण यज्ञ नारायण भगवान मैं पूर्ण श्रद्धा होना चाहिए। हमें सनातन धर्म से सूत्रों का पालन करना चाहिए उससे ही हमें मोक्ष प्राप्त होगा। आज सनातन धर्म को आघात पहुंचाने के लिए कई कलयुग हे भगवान उत्पन्न हो गए हैं। वह हमारे सनातन धर्म को हानि पहुंचाना चाहते हैं लेकिन सनातन धर्म अविनाशी अनंत है किसी भी काल में यह संभव नहीं है।



