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कब है दशा माता व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, तथा व्रत कथा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
श्री हरि‌ नारायण
🚩 कब है दशा माता व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, तथा व्रत कथा
🔘 HEADLINES
▪️ दशा माता व्रत 25 मार्च 2025 को मनाया जाएगा.
▪️ पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:45 से 10:15 बजे तक रहेगा.
▪️ दशा माता की पूजा से घर की दशा सुधरती है.
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता का व्रत किया जाता है। दशा माता का यह व्रत मां पार्वती को समर्पित है। यह व्रत करने से दसों दिशाओं से आपके घर में धन-धान्य सुख शांति समृद्धि की वृद्धि होती है। यह व्रत होली के दूसरे दिन से दशमी तिथि तक किया जाता है। ऐसा संभव न हो तो मात्र दशमी तिथि को भी इस व्रत को किया जाता है। धर्म की अच्छी खासी जानकारी रखने वाली आचार्य श्री गोपी राम ने दशा माता व्रत, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
💁🏻 दशा माता व्रत कब रखा जाएगा?
दशा माता व्रत चैत्र माह की दशमी को रखा जाता है। इस बार 24 मार्च सोमवार को ये व्रत रखा जाएगा। दशमी तिथि की शुरुआत 24 मार्च को सुबह 5:39 पर होगी। तिथि की समाप्ति 25 मार्च मंगलवार को सुबह 5:05 पर होगी।
✡️ दशा माता 2025 शुभ मुहूर्त

  • सुबह 06:30 से 08:01 तक
  • सुबह 09:31 से 11:02 तक
  • दोपहर 12:08 से 12:57 (अभिजीत मुहूर्त)
    🙇🏻 दशा माता पूजन की विधि
    24 मार्च, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। दोपहर 12 बजे से पहले दशा माता की पूजा कर लेनी चाहिए।
    इस व्रत में त्रिवेणी यानी पीपल, नीम और बरगद के पेड़ों की पूजा की जाती है। इन पेड़ों को देवताओं का स्वरूप माना जाता है।
    सबसे पहले त्रिवेणी वृक्षों के नीचे शुद्ध घी का दीपक लगाएं। अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, फूल आदि चीजें एक-एक कर चढ़ाएं।
    इसके बाद जल चढ़ाएं और इन वृक्षों की परिक्रमा करें। वृक्षों के नीचे बैठकर नल-दमयंती की कथा सुनें। इस दिन बिना नमक का भोजन करें।
    इस प्रकार जो दशा माता की पूजा करता है, उसकी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    📖 ये है दशा माता व्रत की कथा

    किसी समय नल नाम के एक राजा थे। वे बहुत ही पराक्रमी और दानवीर थे। दमयंती उनकी पत्नी थी। एक बार रानी दमयंती ने दशा माता का व्रत किया और पूजा का धागा गले में बांध लिया। राजा ने उस धागे को निकालकर फेंक दिया।
    उसी रात दशा माता ने राजा के सपने में आकर कहा कि ‘तूने मेरा अपमान किया है, इसलिए तेरा अच्छा समय जा रहा है।’ इसके बाद किसी वजह से राजा के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें अपनी पत्नी के साथ वन-वन में भटकना पड़ा।
    फिर एक दिन राजा को सपने में फिर दशा माता दिखाई दी। राजा ने उनसे अपने किए की माफी मांगी और समय आने पर पत्नी सहित उनकी पूजा भी की। राजा नल के ऐसा करने से उन्हें अपना राज्य पुन: मिल गया।
    👉🏼 व्रत का नियम- चैत्र कृष्ण दशमी के दिन दशा माता का यह व्रत यदि एक बार रख लिया तो इसे जीवनभर किया जाता है और इसका उद्यापन नहीं होता है। इस व्रत को बीच में छोड़ नहीं सकते। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। यदि सेहत संबंधी समस्या या और कोई समस्या हो तो उद्यापन करने के बाद इसे छोड़ सकते हैं।

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