
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔮 कब है नए साल 2026 की पहली पूर्णिमा? नोट कर लें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
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🔳 पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान से मिटते हैं पाप* 🔳 इस दिन व्रत करने से मनोकामनाएं होती हैं पूरी 🔳 दान करने से मिलती है देवी-देवताओं की कृपा 🔔 पौष पूर्णिमा आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह माना जाता है कि पौष पूर्णिमा के दिन किए गए पुण्य कर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं। *यह पूर्णिमा शरद ऋतु की अंतिम पूर्णिमा मानी जाती है और इसके बाद माघ मास का शुभारंभ होता है। श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना या अन्य तीर्थ स्थलों में स्नान कर सूर्य देव और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। माना जाता है कि इस दिन किया गया स्नान, ध्यान और दान पापों का नाश कर मन, शरीर और आत्मा को पवित्र बनाता है।
📅 *पौष पूर्णिमा 2026 की तिथि* आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट पर होगी. तिथि का समापन 3 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा. इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 6 बजकर 11 मिनट पर होगा. ⚛️ पौष पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
पौष पूर्णिमा के दिन दान और स्नान के लिए विशेष समय शुभ माना गया है. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इन समयों में किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है.
💰 पौष पूर्णिमा के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है?
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक) स्नान सबसे शुभ होता है।
📖 पौष पूर्णिमा व्रत विधि
पौष पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।* यदि संभव हो तो पवित्र नदियों जैसे गंगा या यमुना में स्नान करें*
घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है।* स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें।*
एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करें।* पूजा में धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य, तुलसी पत्र और पंचामृत अर्पित करें। भगवान विष्णु को केला और पंजीरी का भोग लगाएं।*
दिनभर भक्ति और श्रद्धा के साथ व्रत रखें। मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।* शाम को अपने समक्ष जल से भरा कलश रखें और पुनः भगवान विष्णु की पूजा करें।*
सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है। परिवार और पड़ोसियों को कथा में आमंत्रित करें।* पूजा और कथा के बाद प्रसाद बांटें और गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।*
इस व्रत को श्रद्धा से करने पर व्यक्ति को पुण्य, समृद्धि, शांति और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।* पौष पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। 👉🏼 पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर निम्न कार्य करने चाहिए:
सत्यनारायण व्रत कथा: इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने का विधान है। इस दिन श्रद्धालु पूर्णिमा का व्रत रखते हैं एवं सत्यनारायण व्रत कथा पढ़ते हैं। ऐसा माना जाता है कि पौष पूर्णिमा पर इस कथा को पढ़ने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पवित्र नदी में स्नान: इस शुभ दिन पर पवित्र नदी में डुबकी लगाने से पिछले जन्मों के सारे पाप धुल जाते हैं।
मां दुर्गा की पूजा: अगर कोई व्यक्ति पौष पूर्णिमा या पूर्णिमा के दिन चंद्रमा या मां दुर्गा की उपासना करता है, तो उसे चंद्र देव की कृपा प्राप्त होती है और उनके नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है।
🤷🏻♀️ पौष पूर्णिमा पर क्या न करें?
तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन न करें।
देर तक सोने से बचें और दिनचर्या सात्विक रखें।
घर के बुजुर्गों, गरीबों या असहाय लोगों का अपमान न करें और क्रोध से दूर रहें।
पूर्णिमा के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
इस दिन पैसों का लेन-देन करने से बचें।
पौष पूर्णिमा का दिन संयम, भक्ति और दान का पर्व है। यदि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा की जाए, तो यह तिथि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
💁🏻♀️ पौष पूर्णिमा का महत्व
गहरे, छायादार बादलों से घिरा एक चमकदार पूर्ण चंद्रमा, पौष पूर्णिमा के आध्यात्मिक सार का प्रतिनिधित्व करता है।
*आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, चंद्रमा और सूर्य की पूजा और अर्घ्य देने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है। पौष पूर्णिमा पर कई भक्त शिप्रा, यमुना, गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान भी करते हैं। पौष पूर्णिमा पर भगवान सूर्य की भी पूजा की जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान को जल अर्पित करने और प्रार्थना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
*_इस दौरान नासिक, उज्जैन, काशी, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण स्थानों का महत्व है, जहाँ हजारों भक्त पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। सुख और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए पौष पूर्णिमा के दौरान भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।
भगवान कृष्ण के हर मंदिर में भक्त “पुष्यभिषेक यात्रा” निकालते हैं। पौष पूर्णिमा पर भक्त भगवद्गीता और रामायण पाठ का आयोजन करते हैं। अविवाहित लोग इस दिन भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाकर उनकी पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इसके अलावा, इस समय महाकुंभ मेला भी लगता है और यह दिन हिंदू तीर्थस्थलों पर पवित्र स्नान करके मोक्ष प्राप्ति के लिए भी जाना जाता है।



