जेरा डैम में जमीन डूबने और मुआवजे से परेशान युवा किसान की मौत, गांव में पसरा मातम

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । सागर जिले में निर्माणाधीन जेरा सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में कृषि भूमि आने और मुआवजे की राशि कम मिलने से परेशान एक युवा किसान की मौत का मामला सामने आया है। रायसेन जिले के बेगमगंज थाना क्षेत्र के ग्राम बांसादेही में 22 वर्षीय किसान यशवंत लोधी की मौत से गांव में शोक का माहौल है। परिजनों के अनुसार, जमीन के मुआवजे को लेकर वह काफी चिंतित था। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सात एकड़ जमीन डूब क्षेत्र में, मुआवजे को लेकर थी चिंता
जानकारी के अनुसार, यशवंत लोधी, पुत्र स्वर्गीय सरदार सिंह लोधी की करीब सात एकड़ कृषि भूमि जेरा डैम के डूब क्षेत्र में आ रही थी। परिजनों के मुताबिक, जमीन के बदले करीब चार लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मिलने की बात से वह संतुष्ट नहीं था और भविष्य में परिवार के भरण-पोषण को लेकर परेशान था।
बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम यशवंत ने अपनी मां से मुआवजे की राशि को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद वह खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी तलाश की, मगर कोई जानकारी नहीं मिली।
अगले दिन सुबह करीब 11 बजे खेत में एक बबूल के पेड़ पर उसका शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही बेगमगंज पुलिस मौके पर पहुंची। आवश्यक कार्रवाई और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
इस घटना के बाद जेरा सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर किसानों की चिंताएं एक बार फिर सामने आई हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जमीन उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है और भूमि अधिग्रहण के बाद मिलने वाली राशि से भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस मामले में ध्यान देने और प्रभावित किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की मांग की है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मृतक के चाचा जीवन सिंह लोधी ने यह भी दावा किया कि पिछले एक साल में डूब क्षेत्र से जुड़ी परेशानियों के बीच किसान की मौत की यह दूसरी घटना है। हालांकि, इन घटनाओं के बीच सीधे संबंध की पुष्टि जांच और संबंधित तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
यशवंत की मौत से परिवार और गांव में शोक है। घटना ने डूब क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि, मुआवजे और प्रभावित किसानों के भविष्य से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।



