कोई भी आनंद स्थाई नहीं है, केवल हरिभजन स्थाई आनंद है : स्वामी रामभद्रचार्य जी
श्री मद भगवत कथा तृतीय दिवस
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी । नगर में रघुकुल फार्म हाउस पर डॉ रामाधार शर्मा जी की पुण्य स्मृति में उनके शिष्य शिववरण सिंह रघुवंशी एवं प्रशांत रघुवंशी के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें धर्म चक्रवर्ती महामहोपाध्याय तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कथा व्यास के रूप में धर्म अनुरागी सज्जनों को संबोधित करते हुए, कहा जीवन में कोई भी आनंद स्थाई नहीं है, केवल स्थाई है तो भगवान श्री हरि का भजन। महाराज जी ने भगवान के भजन का वर्णन करते हुए कहा कि जो सत्य आनंद है, जो कभी नष्ट नहीं होने वाला है, वह भगवान का नाम जाप, गुण कीर्तन है। इसके अतिरिक्त संसार में जो भौतिक आनंद हैं, वह तो सब नश्वर हैं। सभी नष्ट हो जाएंगे। संसार में परमात्मा के अतिरिक्त कुछ भी प्राप्ति का ध्येय लेकर, यदि मनुष्य चल रहा है, तो वह उसकी अज्ञानता है । जगत गुरु जी ने कहा कि भगवान सगुण रूप में अनेक गुणों से युक्त हैं ।उनके गुणों का वर्णन उनके स्वरूप का चिंतन, उनमें अपने आप को लगा देना, आत्मीय भाव से परमात्मा को प्राप्त करने के लिए तत्पर हो जाना ही पवित्र भक्ति है। संसार में जितने भी मनुष्य हैं, सभी में ईश्वर समाहित हैं और वह इस प्रकार अपने भक्तों को प्रेम करते हैं। जिस प्रकार माता अपने पुत्र को प्रेम करती है । अनंत भावनाओं के वशीभूत होकर मनुष्य भौतिक चक्र में उलझ कर ऐसे पवित्र आनंद को भूला हुआ है, जोकि अनंत काल तक साथ देने वाला है । वही आनंद स्थाई है, जो अनंत काल तक हमारे जीवन में व्याप्त रहे। जगत गुरु जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा स्थाई आनंद को प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम है। इस माध्यम से व्यक्ति परमात्मा के सानिध्य को प्राप्त करके, अपने जीवन को आनंदमय कर लेता है । आगे जगतगुरु जी ने कहा कि संसार में जो भगवान की शक्ति है, वह विभिन्न रूपों में व्याप्त होकर जगत का संचालन करती है, वही सभी को नियंत्रित करते हुए ,सभी का जीवन यापन भी करती है ।जगत में व्याप्त व्यामोह के कारण जो व्यक्ति परमात्मा के भजन रूपी आनंद से विमुख है। उसका जीवन सोचनीय है ? परमात्मा संसार सागर में अपने प्रिय भक्तों के उद्धार लिए अवतार लेते हैं। भगवान युगों युगों में तो अवतार लेते ही हैं, लेकिन अपने भक्तों की पीड़ा को दूर करने के लिए भी भगवान जगत में आ जाते हैं, और अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। इसका उदाहरण उन्होंने बहुत सरल माध्यम से प्रदान करते हुए कहा कि, जिस प्रकार कोई पिता अपने पुत्र का आत्म भाव से परिपालन करता है, उसी प्रकार परमात्मा हमारा भला करते हैं। परमात्मा भक्त तक पहुंचने के लिए विभिन्न निमित्त निर्मित करते हैं। जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ तो उन्होंने वसुदेव देवकी को निमित्त बनाया। जबकि श्री राम अवतार में दशरथ कौशल्या जी को निमित्त बनाया। लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जिनमें बिना निमित्त के ही परमात्मा सीधे कल्याण के लिए प्रकट हो जाते हैं । जिस प्रकार प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह रूप में खंबे से ही प्रकट हो गए थे । उन कृपालु परमात्मा के लिए निमित्त से हटकर भी प्रकट होने के विभिन्न माध्यम हैं, लेकिन आवश्यकता है उनके स्वरूप को अपने चित्त में धारण करने की। आगे जगत गुरु रामभद्राचार्य ने भगवत प्रेम के बारे में विषय में भी सुंदर चर्चा करते हुए कहा कि ,परमात्मा का जो पवित्रतम प्रेम है वह इस, श्रीमद् भागवत महापुराण में रम रहा है। उसी पवित्रतम प्रेम के वशीभूत होकर, संपूर्ण भक्ति की विधाएं भागवत के माध्यम से प्रकट होकर जगत कल्याण के लिए, श्री वेदव्यास जी ने हम सभी को प्रदान करके, उपकार किया है। जो सदैव हमारे लिए मार्गदर्शक के रूप में ईश्वर के ही रूप में प्रतिष्ठित है, भागवत भगवान का साक्षात विग्रह स्वरूप है। कथा के प्रारंभ के पूर्व पुराण पूजन पंडित रामकृपाल शर्मा एवं मुख्य यजमान शिव वरण सिंह रघुवंशी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रवचन के माध्यम से बताया कि संपूर्ण भारत वर्ष में परम पूज्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ऐसे विद्वान हैं, जो भारतीय सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए, हमारे लिए जीवन निर्वाह करने का एक अद्वितीय मार्ग दर्शन करके, प्रभु के चरणों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे महापुरुष के दर्शन मात्र से ही, हमारे लिए पुण्य प्राप्त हो जाता है । उनकी कृपा मात्र से ही हमारा उद्धार हो जाता है। कथा कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर बृजेश दीक्षित जबलपुर के द्वारा किया गया।




