गंगा दशहरा 30 मई को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और उपाय
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 गंगा दशहरा 30 मई को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और उपाय
हिंदू धर्म में गंगा को माता या देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गंगा नदी में स्नान करने से और उनकी उपासना करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। धार्मिक विद्वान बताते हैं कि मां गंगा की उपासना के लिए गंगा दशहरा का दिन सर्वश्रेष्ठ होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन को ‘गंगावतरण’ के नाम से जाना जाता है।
🧾 वैदिक पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 30 मई 2023, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। बता दें कि इस विशेष दिन पर कई शुभ योग और नक्षत्र का निर्माण हो रहा है, जिसमें पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से।
⚛️ गंगा दशहरा 2023 पूजा मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार गंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष इस तिथि का शुभारंभ 29 मई 2023 दोपहर 11 बजकर 49 मिनट पर हो रहा है और इस तिथि का समापन 30 मई दोपहर 01 बजकर 07 मिनट पर हो जाएगा। गंगा दशहरा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा-पाठ का महत्व अधिक है। इसलिए यह पर्व 30 मई 2023 के दिन मनाया जाएगा।
🌊 गंगा दशहरा 2023 शुभ योग
गंगा दशहरा के दिन हस्त नक्षत्र का निर्माण हो रहा है जो 30 मई को सुबह 04 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन अगले दिन सुबह 06 बजे हो जाएगा। वहीं इस दिन सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है जो रात्रि 08 बजकर 55 मिनट त रहेगा और रवि योग पूरे दिन रहेगा।
🤷🏻♀️ क्या करें
▪️ गंगा दशहरे के दिन सुबह उठकर गंगा स्नान करें।
▪️ घर को गंगा जल से शुद्द करें।
▪️ गंगा जी पूजा करें, साथ में महादेव की भी पूजा करें।
▪️ चूंकि गंगा दशहरा के दिन बड़ा मंगल है इसलिए हनुमान जी की भी विशेष पूजा करें।
▪️ मां गंगे की आरती करें।
▪️ गरीबों का दान दें और पंडितों को भोजन कराएं।
▪️ इस दिन अन्नदान देने से इंसान कर्ज मु्क्त होता है और वस्त्र दान से उसके घर में कभी भी किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।
▪️ गंगा की पूजा करने से घर हमेशा निर्मल रहता है और सुख-शांति बनी रहती है।
▪️ गंगा जी कथा सुनें और भजन-कीर्तन करें।
▪️ गंगा दशहरे पर जो भी चीजें दान दें, उसमें सभी की संख्या दस होनी चाहिए।
▪️ मां गंगे का रंग सफेद है, तो उन्हें सफेद चीजों की जैसे दूध, दही या खीर का भोग लगाएं।
▪️ आज के दिन मासांहारी भोजन ना करें।
▪️ शराब का सेवन ना करें।
▪️ घर में शांति बनाए रखें।
▪️ किसी से झगड़ा ना करें।
▪️ किसी की निंदा ना करें।
▪️ ब्रहम्चर्य का पालन करें।
▪️ प्याज लहसुन भी ना खाएं।
💮 गंगा दशहरा 2023 पूजा विधि
भक्त ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग और वाराणसी में ध्यान करने के लिए आते हैं और पवित्र स्नान करते हैं। भक्त अपने पूर्वजों के लिए पितृ पूजा करते हैं और पवित्र डुबकी लगाकर गंगा की पूजा करते हैं। गंगा के तट पर, आरती गोधूलि में पत्तों से लदी नौकाओं और नदी में बहाए जाने वाले फूलों से की जाती हैं। देवी गंगा की पूजा करते समय सभी पदार्थ दस की गिनती में होने चाहिए। उदाहरण के लिए, दस प्रकार के फूल, सुगंध, दीपक, दायित्व, बेताल के पत्ते और फल। दस अलग-अलग तरह की चीजों का दान करें। गंगा में स्नान करते समय, आपको दस डुबकी लेनी चाहिए।
🗣️ गंगा दशहरा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, मां गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में हुआ था। माना जाता है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाए थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। मां गंगा ने कहा “मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं , लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है कि मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके।


