क्राइम

फर्जी डम्फर फर्जी चालक फर्जी कागजों पर पेश चालान पर जमानत देने के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त

पुलिस के फर्जी चालान का हुआ खुलासा, मामला 2019 का।
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार में रेत का वैध-अवैध खनन और परिवहन युद्ध स्तर पर जारी थी जिसमें डम्फर बगैर बीमा फिटनेस के मौत बन दौड़ते रहे। औसतन हर वर्ष इन डम्फरों 347 मौत सड़क दुर्घटना में मौतें हुई ।
24 मई 2015 को हुई मौत स्वाभाविक दुघर्टना नहीं ।
बाड़ी थाने अंतर्गत आने वाले ग्राम चंदवार बस स्टैंड पर अल सुबह साढे सात बजे चौहानसिंह चौहान पिता भवानीसिंह चौहान उम्र 45 वर्ष बस स्टैंड पर अपने ट्रेक्टर में हवा भरवाने दुकान पर लगाया ही था कि बाड़ी की और थे तेज गति से नागिन की लहराते हुए डम्फर क्रमांक MP38 G0604 ने ट्रेक्टर को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि नीचे खड़े चौहानसिंह चौहान की घटना स्थल पर ही मौत हो गई । और पुलिस ने डम्फर को अपनी अभिरक्षा में लेकर न्यायालय चालान पेश किया जिसमें फर्जी बीमा के कागज लगाकर डम्फर को मालिक के सुपुर्द कर दिया। जिस प्रकरण में पीड़ित के परिजन आज भी हाईकोर्ट जबलपुर में न्याय के लिए भटक रहे हैं ।
16 फरवरी 2019 को इसी परिवार के परिवार के तीन पुत्रों की मौतें हुई डम्फर से ।
मृतक चौहानसिंह चौहान की मौत का प्रकरण सुलझा भी नहीं कि 16 फरवरी की शाम बकतरा से लौटकर आ रहै शिवम चौहान पिता गनपतसिंह चौहान 18 वर्ष, अजय चौहान पिता लालसिंह चौहान18 वर्ष दीपक चौहान पिता हनुमतसिंह चौहान 19 वर्ष तीनों भाई बकतरा से गाँव वापिस आ रहे थे कि नानपौन पैट्रोल पंप के सामने डम्फर क्रमांक MP04 HE 2893 ने लापरवाही से तेजगति से चलाते हुए मोटर साइकिल को अपने आगोश में समा लिया और तीनों युवकों की मौत घटनास्थल पर हो गई । पुलिस ने डम्फर को अपनी अभिरक्षा में लेकर फिर फर्जी तरीके से चालान पेश कर डम्फर मालिक के हवाले कर दिया।
परिवार में चार मौतों के दंश ने टूटने की जगह किया मजबूत।
अपने भाई भवानीसिंह की मौत के बाद तीन जवान बेटों के गम में गनपतसिंह पिता भवानी सिंह को और मजबूती दी जिसमें उन्होंने लोक सूचना अधिकार अधिनियम का सहारा लेकर इस पीले सोने के काले कारोबार में लिप्त सफेदपोश नेताओं के चेहरे से नकाब हटाने का संकल्प लिया और जिला अपर सत्र न्यायालय से प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त तो किया ही साथ ही लिखा कि पुनः इस डम्फर और डम्फर मालिक चालक को हाजिर करें ।
लोक सूचना अधिकार अधिनियम में निकला काला सच ।
गनपतसिंह चौहान बैसे तो कृषि का कार्य करते हैं लेकिन परिवार में हुई असमय मौतों ने उन्हें लोक सूचना अधिकार अधिनियम से लड़ाई लड़ने को मजबूर किया और उन्होंने निरंतर इस लड़ाई में पीछे नहीं हटे उन्होंने न्यायालय तक में लोक सूचना अधिकार का उपयोग किया और इस फर्जी चालान को फर्जी साबित कराया । इस दुघर्टना में प्रयुक्त डम्फर के मालिक का नाम आरटीओ की साइट पर सबसे पहले रोहित चौहान का नाम दिखाई दिया फिर आठ दिन बाद आरटीओ की साइट पर राहुल ठाकुर नजर आया । इस कड़ी को मिलाना इतना आसान नहीं था , क्योंकि जो पते चालान में लिखे गए बह सभी फर्जी निकले सबसे पहले राहुल ठाकुर का पता 311 शिवनगर, आंनद नगर फिर आनंद नगर झुग्गी बाला फिर आनंद नगर ऊंटवाला , जिसके लिए भोपाल नगर निगम से इस जगह की मतदाता सूची प्राप्त की जिसमें यह पते पूर्णतः फर्जी निकले ।
न्यायालय ने अपने आदेश में किया खुलासा, राहुल सिंह अभियुक्त और रघुवीर सिंह को सजा ।
अपर सत्र न्यायाधीश माननीय सुधांशु सक्सेना ने आदेश के बिंदु नंबर 7 में पुनरीक्षण कर्ता की और भी तर्क दिया गया ड्राइवर संतोष के विरुद्ध धारा 34 ए भारतीय दंड सहायता एवं मोटरयान अधिनियम की धारा 146/196 एवं अभियुक्त राहुल के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम की धारा 66/292/ 166/ 196 के अंतर्गत आरोप पंजीकृत थे। अभियुक्त राहुल ठाकुर दिनांक 20 जून 2019 को न्यायालय के समक्ष अपने अधिकृत अधिवक्ता के साथ उपस्थित हुआ और अपराध किया जाना स्वीकार किया यह भी तर्क किया गया कि प्रकरण में दिनांक 29 जुलाई 2019 नियत थी। किंतु अभियोजन पक्ष को जानकारी दिए बिना प्रकरण दिनांक 20 जून 2019 को श्रवण हेतु स्वीकार किया गया और अभियुक्त रघुवीर को धारा 146/ 196 में न्यायालय उठने तक का कारावास व ₹1000 के अर्थदंड तथा धारा 66/ 192 मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय उठने तक का कारावास व ₹2000 का अर्थदंड से दंडित किया गया जबकि प्रकरण में राहुल सिंह अभियुक्त था ना कि रघुवीर।
बड़ा सबाल।
जब पुलिस ही अपराधियों के संरक्षण के रुप से सहयोगी की भूमिका में नजर आए तो गरीब को न्याय की कैसे उम्मीद की जा सकती हैं ।

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