आउटसोर्स जोडो अभियान के तहत कलेक्ट्रेट पर पंकज चतुर्वेदी के नेतृत्व में 4 घंटे तक चला धरना
18 दिसंबर को भोपाल के हल्लाबोल आंदोलन में पहुंचने का लिया संकल्प
कर्मी कल्चर समाप्त हो सकता है तो आउटसोर्स प्रथा को भी समाप्त होना ही होगा: वासुदेव शर्मा
रिपोर्टर : तारकेश्वर शर्मा
कटनी। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, संविदा, ठेका कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मप्र की ओर से शुरू किए गए आउटसोर्स जोडो अभियान के तहत कटनी कलेक्ट्रेट पर 4 घंटे तक धरना देकर अन्यायकारी प्रथा को समाप्त कराने तक मिलकर संघर्ष करने एवं 18 दिसंबर को अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का संकल्प लिया। आजाद कंप्यूटर आपरेटर संघ के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी के नेतृत्व में दिए गए धरने में व्यावसायिक शिक्षकों के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश यादव, युवा आउटसोर्स समिति भोपाल के दीपक सिंह, महामंत्री प्रकाश पुंज चौधरी, आशीष सिसौदिया भी शामिल हुए। आउटसोर्स प्रथा करने, न्यूनतम 23 हजार रूपए वेतन देने की मांग को लेकर शुरू हुए धरने में मांगपत्र लेने कटनी तहसीलदार तिवारी जी पहुंचे, जिन्हें शिक्षा विभाग के कंप्यूटर आपरेटरों एवं व्यावसायिक शिक्षकों को 7 महीने से वेतन नहीं मिलने की जानकारी दी तो उन्होंने पंकज चतुर्वेदी एवं महेंद्र यादव को सोमवार को बुलाया और संबंधित उच्च अधिकारियों से बात कराकर वेतन दिलाने की बात कही।
व्यावसायिक शिक्षकों के नेता प्रकाश यादव ने संयुक्त संघर्ष के महत्व को समझाते हुए कहा कि 200 नामों से आउटसोर्स कर्मचारी रखे गए हैं, सैकडों आउटसोर्स एजेंसियों हैं, जिस कारण हमारी एकता बनने में मुश्किलें आ रही हैं, लेकिन अब मिलकर चलने की शुरूआत कटनी से हो चुकी है, हमें इसी तरह संयुक्त धरने प्रदर्शन हर जिले में करने होंगे, प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षक हर जिले में साथ रहेंगे।
आउटसोर्स कर्मियों के आंदोलन से एकजुटता व्यक्त करने कर्मचारी, शिक्षक संगठनों के नेता भी पहुंचे जिनमें आजाद अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष रमाशंकर तिवारी, पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के जिला अध्यक्ष सुशील तिवारी, शासकीय अध्यापक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश दुबे ने धरना स्थल पर पहुंचकर आउटसोर्स प्रथा समाप्त कराने के आंदोलन को अपना-अपना समर्थन दिया। 4 घंटे तक चले धरने में अखिलेश तिवारी, लकी बाजपाई, अभिषेक शुक्ला, अफजल खान, महेंद्र यादव, आशीष चौरसिया, आशीष पटेल, अभिषेक गुप्ता, अनिल विश्वकर्मा, राममूर्ति द्विवेदी, हितेश , सुनील बैरागी सरिता शर्मा ,सुधा शर्मा, नेहा द्विवेदी, मनोरमा, सरिता, रीता आदि ने भी अपनी बात रखी।
आउटसोर्सकर्मियों के धरने में बोलते हुए ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, संविदा कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक एवं मप्र कांग्रेस आउटसोर्स एवं संविदा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि अस्थाई कर्मियों की एकता बनाना एवं उनका संघर्ष विकसित करना सबसे मुश्किल काम है और एक बार यदि यह काम कर लिया तब इनकी जीत आसान हो जाती है इसलिए आप लोगों को आउटसोर्स, अस्थाई कर्मियों के बीच निरंतर सक्रिय रहकर इन्हें एकजुट करने का काम करते रहना होगा, कटनी का आउटसोर्स जोडो सम्मेलन एवं धरना इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स अब तक की सबसे बडी अन्यायकारी व्यवस्था है, इसे कोई एक संगठन समाप्त नहीं करा सकता, यदि किसी को यह गलत फहमी है कि वह अकेला अकेला चलकर आउटसोर्स प्रथा को समाप्त करा लेगा, उसे अपनी यह गलतफहमी समय रहते दूर कर लेनी चाहिए।
वासुदेव ने पुराने अनुभव बताते हुए कहा कि 20 साल पहले रोडवेज के कर्मचारी संगठनों ने सबके साथ मिलकर लडने की बजाय अकेले अकेले चलने को प्राथमिकता दी, नतीजा 2006 में रोडवेज में ताला लग गया और कर्मचारी घर विठा दिए गए। शर्मा ने कहा कि अस्थाईकर्मियों के आंदोलन को जीत तक पहुंचाने के लिए सावधानी से आगे बढने, सतर्क और चौकन्ने रहने की जरूरत होती है, जब हम जीत के करीब पहुंचते हैं तब हमारे ही बीच के लोग मनोबल गिराने, एकता को तोडने की कोशिश करते हैं, जैसे जैसे आउटसोर्स कर्मियों का आंदोलन चर्चा में आएगा, गति पकडेगा, मंजिल के करीब पहुंचेगा तब कुछ शक्तिमान टाईप कर्मचारी नेता भी आएंगे, यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि वे अकेले ही सबकुछ कर लेंगे, ऐसी सोच के लोग ही एकता में सबसे अधिक बाधक होते हैं। वासुदेव ने आउटसोर्स कर्मियों को भरोसा दिलाया कि इसी मप्र का कर्मचारी अन्यायकारी कर्मी कल्चर को समाप्त करा चुका है, अब आउटसोर्स कल्चर को खत्म कराने का समय है, 18 दिसंबर को भोपाल में इसकी बुनियाद रख दी जाएगी।




