आज का पंचांग शुक्रवार, 02 दिसम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 02 दिसम्बर 2022
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🚩 02 दिसम्बर 2022 दिन शुक्रवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। इसलिए आज महानन्दा नवमी का पावन व्रत है। आज देवी माता के विधिवत पूजन करने से विष्णुलोक की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। आप सभी सनातनियों को महानन्दा नवमी के पावन व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : दशमी – 05:39 ए एम, दिसम्बर 03 तक एकादशी
✏️ तिथि के स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है। दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।
💫 नक्षत्र : उत्तर भाद्रपद – 05:45 ए एम, दिसम्बर 03 तक रेवती
🪐 नक्षत्र के स्वामी :– उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुंधन्य देव, स्वामी शनि देव जी एवं वहीं राशि स्वामी गुरु है।
📣 योग :- वज्र 7.30 AM तक तत्पश्चात सिद्धि
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 05:53 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 05:39 ए एम, दिसम्बर 03 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:44:12
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:16:56
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:09 ए एम से 06:03 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:36 ए एम से 06:57 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:31 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:13 पी एम से 05:37 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 12:57 ए एम, दिसम्बर 03 से 02:33 ए एम, दिसम्बर 03
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:38 ए एम, दिसम्बर 03
💧 अमृत सिद्धि योग : 05:45 ए एम, दिसम्बर 03 से 06:58 ए एम, दिसम्बर 03
❄️ रवि योग : 06:57 ए एम से 05:45 ए एम, दिसम्बर 03
☄️ वज्र योग – सुबह 7 बजकर 29 मिनट तक
⭐ सिद्धि योग – सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक
☀️ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र – सुबह 5 बजकर 45 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-चींटियों को शकर मिश्रित आटा डालें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अंतरराष्ट्रीय दास प्रथा उन्मूलन दिवस, राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस, ओम प्रकाश रावत – भारत के 22वें मुख्य निर्वाचन जयन्ती, गुरुदास बनर्जी – भारत के प्रमुख शिक्षाशास्त्री पुण्यतिथि, अंतर्राष्ट्रीय कम्प्यूटर साक्षरता दिवस, पंचक जारी
✍🏽 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार, अगर आपको कोई दिमागी परेशानी तो उत्तर पश्चिम, पेट की तो दक्षिण पश्चिम, पैरों में तो पूर्व दिशा, कान में तो उत्तर दिशा और अगर हाथों में दिक्कत है तो ईशान कोण को ठीक करें। वहीं अगर कमर में परेशानी है तो दक्षिण पूर्व, आंखें ठीक रखनी है तो दक्षिण और अगर मुख यानि चेहरे को निरोगी और तरोताजा रखना चाहते हैं तो पश्चिम दिशा के वास्तु को सही कीजिए।
वास्तु शास्त्र का महत्व वास्तु शास्त्र हमारे जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे हमारा जीवन काफी प्रभावित होता है। वास्तु दोष से हमारी कामयाबी से लेकर घर की सुख समृद्धि तक पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में घर और वहां मौजूद चीजों को सही दिशा में रखना बेहद ही जरूरी है। वास्तु शास्त्र में कई तरह की सावधानी और उपाय को बताया गया है, जिसे अपनाकर व्यक्ति संपन्न, प्रसन्न और निरोगी रह सकता है। ऐसे में वास्तु नियम का पालन करना काफी जरूरी हो जाता है।
🐚 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शंखजल का छिड़काव व पान क्यों ?
शंख में जल भरकर उसे पूजा- स्थान में रखे जाने और पूजा – पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़कने का कारण यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है और शंख में जो गंधक, फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है उसके अंश भी जल में आ जाते हैं | इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है |
भगवान कहते हैं : “जो शंख में जल लेकर ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का उच्चारण करते हुए मुझे नहलाता है वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है | जो जल शंख में रखा जाता है वह गंगाजल के समान हो जाता है | तीनों लोकों में जितने तीर्थ है वे सब मेरी आज्ञा से शंख में निवास करते है इसलिए शंख श्रेष्ठ माना गया है | जो शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर मुझे अर्घ्य देता है उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है | जो वैष्णव मेरे मस्तक पर शख का जल घुमाकर उसे अपने घर में छिडकता है उसके घर में कुछ भी अशुभ नहीं होता | मृदंग और शंख की ध्वनि तथा प्रणव (ॐकार) के उच्चारण के साथ किया हुआ मेरा पूजन मनुष्यों को सदैव मोक्ष प्रदान करनेवाला है |” (स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड)
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍶
सफेद जहर से बचें
गन्ने के रस में जितने प्रकार के पोषक तत्व विद्यमान होते हैं वे लगभग सभी तत्त्व गुड़ में पाये जाते हैं | अत: मीठे व्यंजनों में शक्कर के स्थान पर गुड़ का उपयोग हितकारी है | शक्कर शरीर को कोई खनिज तत्व या विटामिन नहीं देती बल्कि वह कैल्शियम, विटामिन डी जैसे शरीर के महत्वपूर्ण तत्त्वों का ह्रास कर देती है | वर्तमान में अधिकतर लोगों में पायी जाने वाली अस्थियों की दुर्बलता व भंगुरता का एक मुख्य कारण शक्कर है | यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को के पीडियाट्रिक न्यूरो-एंडोक्रायनोलॉजिस्ट रॉबर्ट लस्टिंग कहते हैं कि “शक्कर बीमारियाँ बनाती हैं, यह जहर है |
यह ह्रदयरोग, कैंसर, मधुमेह जैसे गम्भीर रोगों का खतरा बढ़ा देती हैं | हानिकारक रसायनों से रहित पुराना देशी गुड़ इसका उत्तम विकल्प है |
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड एप्लिकेशन में प्रकाशित एक शोध के अनुसार गुड़ में शरीर के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज, जैसे – कैल्शियम, फोर्स्फोरस, मैग्नेशियम, पोटैशियम, लौह, जिंक, ताँबा, फोलिक एसिड तथा विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स आदि पाये जाते हैं |
🤷🏻♀️ सावधानियाँ : रसायनरहित देशी गुड़ का ही सेवन करे | गुड़ की प्रकृति गर्म होने से गर्भवती महिलाएँ व पित्त प्रकृतिवाले लोग इसका सेवन अल्प मात्रा में करें | कृमि, मोटापन, बुखार, भूख कम लगना और मधुमेह आदि में गुड़ नहीं खाना चाहिए | गुड़ के साथ दूध व उड़द का सेवन न करें |
📖 गुरु भक्ति योग🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी शास्त्र नीति में आम जीवन से जुड़ी कई बातों के बारे में बताया. जो अब तक किसी को पता नहीं थी. एक श्लोक के जरिए आचार्य ने बताया है कि चार कारणों से किसी के जीवन में बड़ी परेशान खड़ी हो सकती है।
ऋणकर्ता पिता शत्रुर्माता च व्यभिचारिणी
भार्या रूपवती शत्रु: पुत्र: शत्रुरपण्डित:
कर्ज में डूबा पिता हमने बताया है कि पिता कर्ज लेता है, तो वो किसी दुश्मन से कम नहीं है. पिता का कर्तव्य होता है कि अपनी संतान का भरण पोषण सही तरीके से करें. लेकिन अगर पिता ही कर्ज लेगा, तो ये कर्ज आगे आने वाले समय में उसकी संतान को ही चुकाना पड़ेगा और ऐसे में वो पिता अपनी संतान का सबसे बड़ा दु्श्मन बन जाएगा।
मां का भेदभाव आचार्य श्री गोपी राम ने बताया है, कि ऐसी मां जो अपनी दो संतानों के बीच भेदभाव करती है, वो बच्चों के बीच दरार ला सकती है. ऐसे में परिवार जल्द टूट जाते हैं. ऐसी मां अपने परिवार और अपनी संतान की दुश्मन होती है।
रूपवती पत्नी आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि पत्नी की सुंदरता पति के लिए परेशानी हो सकती है अगर वो पति का सम्मान नहीं करें और उससे प्रेम ना करके, दूसरे से संबंध बनाए. ऐसी पत्नी पति के लिए श्राप के समान है. ऐसी पत्नी पति के लिए समाज में अपमान का कारण बनती है।
कम दिमाग संतान अगर संतान बेवकूफ हो, तो भी ये पिता और मां के लिए दुश्मन समान होगी. क्योंकि ऐसी संतान को जिंदगी पर भरण पोषण के लिए माता पिता पर निर्भर रहना पड़ता है. माता-पिता को कभी भी संतान के होने का सुख आर्थिक या सामजिक रुप से नहीं मिलता. ऐसी संतान भविष्य में परिवार की अर्जित संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।

