ज्योतिष

आज का पंचांग शुक्रवार, 16 दिसम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग🧾
शुक्रवार 16 दिसम्बर 2022

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : अष्टमी – 03:02 ए एम, दिसम्बर 17 तक नवमी
✏️ तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है।
💫 नक्षत्र : पूर्वा फाल्गुनी 7.35 AM तक तत्पश्चात उत्तरा फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र के स्वामी :– पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (धन व ऐश्वर्य के देवता) और स्वामी शुक्र देव जी है।
📣 योग :- प्रीति 7.47 AM तक तत्पश्चात आयुष्मान
⚡ प्रथम करण : बालव – 02:25 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 03:02 ए एम, दिसम्बर 17 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:47:52
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:13:26
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:17 ए एम से 06:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:45 ए एम से 07:07 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:16 पी एम से 05:40 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:49 पी एम
💧 अमृत काल : 01:35 ए एम, दिसम्बर 17 से 03:18 ए एम, दिसम्बर 17
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:44 ए एम, दिसम्बर 17
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में श्वेत चन्दन चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कालाष्टमी, कजाकिस्तान – स्वतंत्रता दिवस, दक्षिण अफ्रीका – सुलह दिवस (पूर्व में शपथ दिवस), बांग्लादेश – विजय दिवस,बहरीन – राष्ट्रीय दिवस, ज्ञान सिंह रानेवाला – भारतीय राजनीतिज्ञ जन्म दिवस, शकीला बानो – प्रसिद्ध भारतीय महिला क़व्वाल पुण्यतिथि, सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल – (परमवीर चक्र सम्मानित) स्मृति दिवस, विजय दिवस, काशीनाथ सखाराम देवल, (मराठी सर्कस के मालिक) पुण्य तिथि
✍🏽 तिथि विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है। कई शुभ कामों को कम शुभ और अशुभ मुहूर्त देखकर ही शुरू करते हैं। ठीक उसी तरह खाने को लेकर भी कई नियम और मान्यताएं हैं। दरअसल, रसोई घर में आपको वास्तु का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर आपने इन बातों का ध्यान नहीं रखा तो आपको कई मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। आपको भी कई बार बड़े-बुजुर्गों ने प्लेट में तीन रोटी रखने के लिए टोका होगा।आखिर इसकी वजह क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तीन नंबर को अशुभ माना जाता है इसलिए इसे अच्छा नहीं माना गया है। पूजा या प्रसाद में कोई भी चीज़ 3 की संख्या में नहीं चढ़ाई जाती है। तीन नंबर को पूजा-पाठ में दूर रखा जाता है और इसके अलावा आम जीवन में भी उससे दूरी बनाना अच्छा रहता है, इससे जीवन में बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। कहा जाता है कि थाली में तीन रोटियां रखने से घर परिवार के बीच आपस में कलह पैदा होता है। साथ ही एक-दूसरे के मन में शत्रुता का भाव आता है, सिर्फ रोटी ही नहीं खाने का कोई भी तीन सामान एक प्लेट में नहीं रखना चाहिए।
हिंदू परिवारों में ऐसी कई मान्यताएं हैं, जिन्हें लोग सदियों से निभाते चले आ रहे हैं। आपको बता दें इन सभी मान्यताओं के पीछे कुछ न कुछ वजहें है। 3 रोटी वाली बात भी सदियों से लोग मानते आ रहे हैं। मान्यता है कि मृतक की थाली में तीन रोटियां रखी जाती हैं। इसलिए ज़िंदा व्यक्ति को थाली में तीन रोटी नहीं रखनी चाहिए। इसलिए घर परिवार के बुजुर्ग हमेशा से ये बात बोलते आ रहे हैं कि थाली में 4-5 कितनी भी रोटी या पूरी परोसे। हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक पता नहीं चला है। लेकिन फिर भी कुछ मान्यताएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आती हैं और वो बातें लोगों के स्वभाव का हिस्सा बन जाती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किसकी आयु कम हो जाती है ?
जिनको अति अभिमान होता है, जो अधिक एवं व्यर्थ का बोलते हैं उनकी आयु कम हो जाती है |
जो निंदा-ईर्ष्या करते है या दुर्व्यसन में फँसे हैं अथवा जो जरा-जरा बात में क्रुद्ध हो जाते हैं उनकी भी उम्र कम हो जाती है |
जो अधिक खाना खाते हैं, रात को देर से खाते हैं, बिनजरूरी खाते हैं, चलते-चलते खाते हैं, खड़े-खड़े हैं उनका भी स्वास्थ्य लडखडा जाता है और आयु कम हो जाती है |
जो मित्र, परिवार से द्रोह करते हैं, संतो, सज्जनों की निंदा करते है उनकी भी आयु कम होती है, जो ठाँस- ठाँस के खाता है, ब्रह्मचर्य का नाश करता रहता है वह जल्दी मरता है |
जो प्राणायाम और भगवद-मंत्र का जप नहीं करता उसकी लम्बी आयु होने में संदेह रहता है और जो ब्रह्मचर्य पालते हैं, प्राणायाम करते हैं उनकी आयु बढती है |
🥤 आरोग्य संजीवनी 🍶
ड्राइफ्रूट्स का करें सेवन ड्राइफ्रूट्स ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और चिया सीड्स के नियमित सेवन से जोड़ों का दर्द आसानी से कम होता है। इसलिए अपनी डाइट में आप ड्रायफ्रुट्स ज़रूर इस्तेमाल करें।
फल और बेरीज सेब, क्रैनबेरी और खुबानी जैसे फलों में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाई जाती है। ये फ्रूट्स बॉडी के हानिकारक फ्री रेडिकल को खत्म करते हैं और शरीर में आये सूजन को भी कम करते हैं। साथ ही अगर आपके घुटनों और जोडिन के दर्द को छू मंतर करते हैं।
विटामिन सी है असरदार विटामिन सी रिच फूड्स सिर्फ आपकी स्किन को ही ग्लोइंग नहीं बनाता। बल्कि यह आपको स्वस्थ रखने में भी बेहद मदद करता है। हाल ही में हुए एक रिसर्च के मुताबिक 500 मिलीग्राम विटामिन सी बॉडी के बढ़े हुए यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करने में बेहद फायदेमंद है। इसलिए अपनी डाइट में संतरे, नींबू और विटामिन सी से भरपूर फूड्स और फ्रूट्स को ज़रूर शामिल करें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सीमन्तोन्नयन संस्कार क्यों ?
सोलह संस्कारों में तीसरा संस्कार होता है सीमन्तोन्नयन | इसका उद्देश्य गर्भपात रोकने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु व गर्भवती स्त्री की रक्षा करना तथा गर्भवती स्त्री को मानसिक बल प्रदान करते हुए उसके ह्रदय में प्रसन्नता, उल्लास और सांत्वना उत्पन्न है और गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क आदि को बलवान बनाना है |
यह संस्कार गर्भावस्था के चौथे, छठे या आठवें मास में किया जाता है क्योंकि ४ महीने के बाद गर्भस्थ शिशु के अंग – प्रत्यंग प्रकट हो जाते हैं और चेतना – संस्थान – ह्रदय के निर्माण हो जाने से गर्भ में चेतना का प्राकट्य हो जाता है, जिससे उसमें इच्छाओं का उदय होने लगता है | वे इच्छाएँ माता के ह्रदय में प्रतिबिब्मित होकर प्रगट होती है |
सीमन्तोन्नयन संस्कार में गर्भस्थ बालक का पिता मंत्रोच्चारण करते हुए शास्त्रवर्णित वनस्पतियों द्वारा गर्भिणी पत्नी से सिर की माँग (सीमंत) निकालना आदि क्रियाएँ करते हुए यह वेद – मंत्र बोलता है :
ॐ येनादिते: सीमानं नयति प्रजाप्तिर्महते सौभगाय |
तेनाहमस्यै सीमानं नयामि प्रजामस्यै जरदष्टिं कृणोमि ||
जिस प्रकार प्रजापति ने देवमाता अदिति का सीमन्तोन्नयन किया था, उसी प्रकार इस गर्भिणी का सीमन्तोन्नयन करके इसकी संतान को मैं जरावस्था तक दीर्घजीवी करता हूँ |
तत्पश्यात गर्भिणी को यज्ञावशिष्ट पर्याप्त घीयुक्त खिचड़ी खिलाने का विधान है | अंत में इस संस्कार के समय उपस्थित वृद्ध महिलाएँ गर्भिणी को सौभाग्यवती होने और उत्तम, स्वस्थ व भगवदभक्त संतानप्राप्ति के आशीर्वाद देती हैं |
पाश्यात्य अन्धानुकरण में पडकर सीमन्तोन्नयन संस्कार के स्थान पर ‘बेबी शॉवर’ नामक पार्टी करके केवल बाह्य मौज-मजा में न कपं बल्कि सनातन संस्कृति के अनुसार शिशु को दिव्य संस्कारों से संस्कारित करें |
इस समय गर्भस्थ शिशु शिक्षण के योग्य हो जाता है | अत: आचरण – व्यवहार, चिंतन-मनन शास्त्रानुकूल हो इस बात का गर्भिणी को विशेष ध्यान रखना चाहिए | उसे सत्शात्रों, ब्रह्मवेत्ता महापुरुषों के जीवन-प्रसंगो व उपदेशों पर आधारित सत्साहित्य का अध्ययन करना चाहिए | सत्संग-श्रवण, ध्यान, जप आदि नियमित करना चाहिए | घर में ब्रह्मवेत्ता महापुरुषों के श्रीचित्र अवश्य हों, अश्लील व भयावह तस्वीरें बिल्कुल न लगायें |
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव कहे गए है।अष्टमी तिथि को भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा करने से समस्त सिद्धियां प्राप्त होती है ।
अष्टमी तिथि जया तिथि कहलाती है। अष्टमी तिथि का नाम कलावती भी कहा गया है।
मान्यता कि अष्टमी तिथि में किये गए कार्यो में सफलता मिलती है । लेकिन चैत्र महीने के दोनों पक्षों में पड़ने वाली अष्टमी तिथि शून्य कही गई है।
अष्टमी तिथि को पूजा में भगवान शिव को नारियल का भोग अर्पित करें अथवा शिवजी भगवान के लिए बनाए जाने वाले प्रसाद में नारियल का उपयोग करें लेकिन अष्टमी को नारियल का सेवन ना करें।
अष्टमी तिथि को ॐ नम: शिवाये मन्त्र का अधिक से अधिक जाप अवश्य करें ।
अष्टमी तिथि को दुर्गा जी की आराधना भी शुभ मानी गई है । अष्टमी तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव और मां दुर्गा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

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