ज्योतिष

आज का पंचाग गुरूवार 15 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾आज का पंचाग 🧾

गुरुवार  15 सितम्बर 2022
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
👴🏼 15 सितम्बर 2022 दिन गुरुवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पञ्चमी तिथि है। आज छठे दिवस का श्राद्ध किया जायेगा। आज षष्ठी का तर्पण तथा आज से अगले 10 दिन पर्यन्त प्रतिदिन पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने से वर्षभर सुख बना रहता है। आज श्रीचन्द्रषष्ठी व्रत भी है। आज का चन्द्रषष्ठी चन्द्रोदयव्यापिनी (चन्द्रोदय- रात्रि 09:25) ग्राह्य है। आप सभी सनातनियों को श्रीचन्द्रषष्ठी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 *_शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022_*
🌐 *_संवत्सर नाम-राक्षस_*
✡️ *_शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)_*
☸️ *_काली सम्वत 5123_*
☣️ *_सायन – दक्षिणायन_*
🌦️ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
🌤️ *_मास – आश्र्विन माह_*
🌗 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📆 *_तिथिः-पंचमी तिथि 11:01:00 बजे तक तदोपरान्त षष्ठी तिथि_*
✏️ *_तिथि स्वामीः- पंचमी तिथि के स्वामी नागदेवता हैं तथा षष्ठी तिथि के स्वामी कार्तिकेय जी हैं।_*
💫 *_नक्षत्रः- भरणी नक्षत्र 08:05:00 बजे तक तदोपरान्त कृतिका नक्षत्र_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामीः- भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव जी हैं तथा कृतिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी हैं।_*
📣 *_योगः- व्याघात 06:30:00 बजे तक तदोपरान्त हर्षण_*
⚡ *_प्रथम करण : तैतिल – 11:00 ए एम तक_*
✨ *_द्वितीय करण : गर – 11:34 पी एम तक वणिज_*
🔥 *_गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 09:10:00 से 10:43:00 बजे तक_*
⚜️ *_दिशाशूलः- गुरूवार को दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि ज्यादा आवश्यक हो तो घर से सरसों के दाने या जीरा खाकर निकलें।_*
🤖 *_राहुकालः- आज का राहु काल 01:48:00 से 03:21:00 बजे तक राहुकाल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 05:39:17_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 17:54:52_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 ए एम से 05:19 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : 04:56 ए एम से 06:06 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:41 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : 02:20 पी एम से 03:09 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : 06:14 पी एम से 06:38 पी एम_*
🌃 *_सायाह्न सन्ध्या : 06:26 पी एम से 07:36 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : 11:53 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 16_*
☄️ *_हर्षण योग- अगले दिन सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-किसी वृद्ध ब्राह्मण को भोजन कराएं।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️पर्व एवं त्यौहार – षष्ठी का श्राद्ध (11:02 के बाद या कल ), चन्द्र षष्ठी व्रत, गुरुश्री अंगददेव जी गुरयाई दिवस, महान संत तुकड़ो जी महाराज पुण्य तिथि, लांस नायक करम सिंह परमवीर चक्र सम्मानित जयन्ती,  श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जन्म दिवस, अभियंता इंजीनियर दिवस, संचायिका स्कूल बैंकिंग दिवस भारत, अन्तर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस, विश्व लिंफोमा जागरूकता दिवस
✍🏽विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
  🏘️ Vastu Tips_🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में हर चीज को रखने की अलग दिशा होती है। इसमें सामान ही नहीं बल्कि रंग भी शामिल हैं। वास्तु शास्त्र में यह बताया गया है कि घर में हर रंग का एक अलग स्थान निश्चित है। अगर सही रंग को सही दिशा में रखा जाए तो आपकी किस्मत में चार चांद लग सकते हैं। आचार्य श्री गोपी राम से जानिए कि हरे रंग की वस्तु घर की किस दिशा में रखी जानी चाहिए और ऐसा करने से क्या लाभ मिलता है।
हरे रंग की चीज़ों में बहुत कुछ शामिल हो सकता है, हरी सब्जियां, फ्रूट्स, दालें, कपड़े, बिस्तर आदि। इसके अलावा अगर आप अपने घर में छोटा-सा बाग-बगीचा या पार्क बनाना चाहते हैं तो किस दिशा में बनाएं और इसका क्या प्रभाव होगा, ये वास्तु शास्त्र में लिखा गया है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार हरे रंग से संबंधित चीज़ों को पूर्व या फिर दक्षिण-पूर्व दिशा, यानी कि आग्नेय कोण में रखना अच्छा होता है। साथ ही घर में हरी घास के छोटे-से बगीचे को भी इन्हीं दिशाओं में से एक में बनाना चाहिए। हरे रंग और इन दोनों दिशाओं का संबंध काष्ठ तत्व, यानी कि लकड़ी से है। इसलिए पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में हरे रंग की चीजें रखना शुभ फलदायी है।
पूर्व दिशा में हरे रंग की चीज़ें रखने से घर के बड़े बेटे के जीवन की गति हमेशा बढ़ती रहती है। उसके पैर मजबूत होते हैं। वहीं आग्नेय कोण में हरे रंग की चीज़ें रखने से बड़ी बेटी को फायदा होता है। उसका लगातार विकास होता है और नितम्बों से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। कल हम बात करेंगे सफेद रंग से जुड़ी चीज़ों के बारे में।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां⚜️
अपने पर्स में कभी भी फटे हुए नोट न रखें, यह भी एक तरह से दुर्भाग्य को बुलावा देने जैसा ही है।
पर्स में माता लक्ष्मी का वास माना जाता हैं, अत: उसमें किसी भी व्यक्ति की फोटो नहीं रखनी चाहिए। वर्ना वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है।
अपने पर्स में परिवार के किसी भी मृत व्यक्ति की तस्वीर नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने वाला व्यक्ति कर्ज लेने वाला तथा ऋणी बना रहता है।
पर्स में लोहे की वस्तुएं भी नहीं रखना चाहिए। चाकू, ब्लेड आदि रखने से नेगेटिव एनर्जी बनी रहती है।_
अपने पर्स में पैसे के अलावा अन्य वस्तुएं जैसे- दवाई, कैप्सूल, चॉकलेट, टॉफी आदि नहीं रखना चाहिए
इन सबके अलावा अपने पर्स में हमेशा नोट और सिक्कों को अलग-अलग जगह पर रखना चाहिए।
🫖 आरोग्य संजीवनी 🍯
मुल्तानी मिट्टी एक बाउल में थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी के साथ गुलाब जल या पानी मिलाएं और इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें। तय समय के बाद इसे अच्छी तरह से मिक्स करके अपनी स्किन पर अच्छी तरह से लगाएं। अच्छी तरह से सुख जाने के बाद चेहरे को अच्छी तरहह से धो कर कोई मॉश्चराइजर लगा लें।
हल्दी ग्लोइंग स्किन के लिए हल्दी सबसे बेस्ट है। इसका इस्तेमाल करके आप कील-मुहांसों के साथ-साथ ब्लैकहैड्स जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए एक बाउल में हल्दी और नींबू की कुछ बूंदे डालकर अच्छी चरह से मिक्स करके इसे अपने चेहरे पर ठीक ढंग से लगा लें। फिर इसे अच्छे से धो लें। आपको अपनी चेहरे में खुद फर्क दिखना शुरू हो जाएगा।
   📖गुरु भक्ति योग 🕯️
     भक्ति योग विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु पुराण(1-20-19) में भक्तियोग की सर्वोत्तम परिभाषा दी गयी है :-
।या प्रीतिरविवेकानां विषयेष्वनपायिनी ।
त्वामनुस्मरत: सा मे हृदयान्मापसमर्पतु ।
          ‘‘हे ईश्वर! अज्ञानी जनों की जैसी गाढ़ी प्रीति इन्द्रियों के भोग के नाशवान् पदार्थों पर रहती है, उसी प्रकार की प्रीति मेरी तुझमें हो और तेरा स्मरण करते हुए मेरे हृदय से वह कभी दूर न होवे ।’’  भक्तियोग सभी प्रकार के संबोधनों द्वारा ईश्वर को अपने हृदय का भक्ति-अर्घ्य प्रदान करना सिखाता है- जैसे, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, सर्वशक्तिमान्, सर्वव्यापी आदि । सबसे बढ़कर वाक्यांश जो ईश्वर का वर्णन कर सकता है, सबसे बढ़कर कल्पना जिसे मनुष्य का मन ईश्वर के बारे में ग्रहण कर सकता है
          वह यह है कि ‘ईश्वर प्रेम स्वरूप है’ । जहाँ कहीं प्रेम है, वह परमेश्वर ही है । जब पति पत्नी का चुम्बन करता है, तो वहाँ उस चुम्बन में वह ईश्वर है । जब माता बच्चे को दूध पिलाती है तो इस वात्सल्य में वह ईश्वर ही है । जब दो मित्र हाथ मिलाते हैं, तब वहाँ वह परमात्मा ही प्रेममय ईश्वर के रूप में विद्यमान है । मानव जाति की सहायता करने में भी ईश्वर के प्रति प्रेम प्रकट होता है । यही भक्तियोग की शिक्षा है ।
         भक्तियोग भी आत्मसंयम, अहिंसा, ईमानदारी, निश्छलता आदि गुणों की अपेक्षा भक्त से करता है क्योंकि चित्त की निर्मलता के बिना नि:स्वार्थ प्रेम सम्भव ही नहीं है । प्रारम्भिक भक्ति के लिए ईश्वर के किसी स्वरूप की कल्पित प्रतिमा या मूर्ति (जैसे दुर्गा की मूर्ति, शिव की मूर्ति, राम की मूर्ति, कृष्ण की मूर्ति, गणेश की मूर्ति आदि) को श्रद्धा का आधार बनाया जाता है । किन्तु साधारण स्तर के लोगों को ही इसकी आवश्यकता पड़ती है ।
●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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