आठ साल से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार, हादसा होने से पति हुआ दिव्यांग, पत्नी बनी साथी
रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
छतरपुर । एक ओर एसडीएम ज्योति मौर्य का मामला सुर्खियां बटोर रहा है, जिन पर पति के साथ धोखाधड़ी के आरोप हैं दूसरी ओर जिले में पत्नी दिव्यांग पति को गोद में लेकर न्याय की मांग कर करीब 4 साल से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रही है। मंगलवार को जनसुनवाई में पति को लेकर आई महिला ने कहा मरते दम तक पति का साथ नहीं छोड़ेगी और जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता तब तक वह संघर्ष करती रहेगी। हालांकि यह बातें कहते हुए वह भावुक भी हो उठी। यह है मामला लवकुशनगर क्षेत्र के ग्राम परसनियां निवासी अंशुल गौंड ने बताया मां शिक्षा विभाग में थीं जिनका 2015 में आकस्मिक निधन हो गया था। अंशुल की अनुकंपा नियुक्ति होनी थी जो करीब 8 साल बाद भी नहीं हो सकी। 2019 में अंशुल सड़क दुर्घटना में दिव्यांग हो गया। तबसे पत्नी प्रियंका गौंड साथ दे रही है। अंशुल चलने-फिरने में असमर्थ है, इसलिए प्रियंका उसे गोद में उठाकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास ले जाती है। पिछले दिनों उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें नेहा अपने पति अंशुल को गोद में उठाकर जा रही थी। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे अंशुल ने बताया 8 वर्षों से वह न्याय की आस में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। पिछले दिनों कलेक्टर को आवेदन दिया था जिस पर कलेक्टर ने लवकुशनगर एसडीएम को जांच तथा कार्यवाही के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने जांच भी की लेकिन नियुक्ति नहीं हो सकी। कलेक्टर को पुन: आवेदन देकर अंशुल ने न्याय की गुहार लगाई है। अंशुल की पत्नी प्रियंका ने कहा चूंकि अब उसके पति दिव्यांग हो गए हैं तो ऐसे में उनका साथ देने की जिम्मेदारी उसकी है। हक न मिलने पर प्रियंका ने दु:ख व्यक्त किया और भावुक हो उठी। प्रियंका ने बताया सास-ससुर का निधन हो चुका है। परिवार में पति-पत्नी के अलावा अंशुल की दो बहनें हैं जिनके विवाह की जिम्मेदारी भी अंशुल पर है। आय का स्रोत न होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है।
इस संबंध में संदीप जीआर, कलेक्टर, छतरपुर का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों
का शिविर लगाकर निराकरण कराया जा रहा है। हम संवेदनशीलता और प्राथमिकता से अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण कर रहे हैं। जो लंबित हैं, उनका भी जल्द निराकरण होगा।



