धार्मिकमध्य प्रदेश

आस्था और अंधविश्वास के चलते होली के दहकते अंगारो से निकलते ग्रामीण, सालो पुरानी अनोखी परम्परा

होली पर दिनेश चौरसिया एडिटर की स्पेशल रिपोर्ट
सिलवानी।रायसेन जिले के सिलवानी के दो ग्रामों में अनोखे तरीके से होली मनाई जाती है। यह परम्पर ग्राम चंद्रपुरा में 15 साल से चला आ रहा है वही ग्राम मेंहगवा पांच सौ साल पुरानी परंपरा आज के आधुनिक युग में भी जारी है। होली का त्योहार और परंपराओं का समागम है। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। कहीं फूलों से होली खेली जाती है, तो कहीं पर लोग एक दूसरे पर बरसाती होली खेलते हैं। लेकिन आपने कभी आग के जलते अंगारों पर चलकर होली खेलने के बारे में सुना है। इस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन सिलवानी तहसील के दो गांवों में होली के दिन अंगारों की परंपरा है।
अंधविश्वास कहें या विश्वास, लोगो का मानना ​​है कि ग्रामीण आपदाएं और बीमारियों से दूर रहें।
सिलवानी में आस्था व श्रद्धा के कारण ग्रामीण धधकते हुए अंगारों के बीच से नंगे पैर जुड़ी हुई है। ग्रामीणो की आस्था का आलम यह है कि नाबालिग बच्चों से लेकर महिलाएं उम्र बुजुर्ग तक बुजुर्ग तक अंगारों पर सीधी पैर की आवश्यकताएं हैं लेकिन जलते हुए होलिका दहन के अंगारों पर सड़कों के बाद भी बच्चों और महिलाओं से लेकर बुजुर्ग तक के पैर आग पर चलने के बाद भी किसी भी समझौते के पैर नहीं जलते और ना ही किसी गांव के व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती। सभी ग्रामीण बारी-बारी से आग लगने की घटनाएं हैं। गुरुवार की रात होलिका के बाद जलती हुई रात में सिलवानी तहसील चौक से 14 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत हैमर के ग्राम महगवा और मेज 4 किमी दूर बसे ग्राम पंचायत डुंगरिया कला के ग्राम चंदपुरा का है। चंदपुरा में ग्रामीण पिछले वर्षों से आग पर से तय आ रहे हैं और ग्राम महगवा में ग्रामीण करीब पांच साल से आग पर चलते आ रहे हैं। ग्राम महगवा में लगभग सौ से अधिक मकान की वर्तमान आबादी लगभग एक हजार है। यहां प्रत्येक वर्ष होलिका दहन के बाद रात में ही सभी ग्रामीण धधकते हुए अंगारों के बीच से ग्राम के बच्चों से लेकर बड़े बुर्जुग तक व्यक्ति बेधड़क होकर लगभग पांच सौ प्रकाशों से होलिका दहन के बाद होलिका दहन के धधकते हुए अंगारों पर नंगे पैर आ गए रहे है। लेकिन अंगारों के बीच से निकालने के बाद भी किसी भी व्यक्ति या बच्चे को ना तो पैर में जलन होती है और ना ही किसी तर्क को लेकर जलन होती है जिससे बच्चे महिलाएं जलते हुए अंगारों पर ऐसे चलते हैं जैसे फूलों पर चल रहे हो बेरोकटोक बिना किसी हिचकिचाहट की ग्रामीण इस आस्था में बारी से भाग जुड़ रहे हैं और यह प्रथा कई वर्षों से आज भी लगातार बनी हुई है। ग्राम महगवा की पहाड़ियों पर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना के सहयोग से होलिका दी जाती है। होलिका दहन को देखने के लिए आसपास के कई ग्रामों के ग्रामीण बड़ी संख्या में देखने के लिए
इसी तरह ग्राम चंदपुरा में भी लगभग 15 साल से यह स्थिति हो रही है। इस वर्ष के आसपास कई बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं और प्रसाद चढ़ाया और दहकते अंगारों से बड़े बच्चे, और युवा और महिलाएं भी अंगारों से जुड़े हैं। और उनके मन में प्राकृतिक आपदा से मुक्त जीवन का विश्वास रहता है। कई सालों से हो रहा है
ग्राम में करीब होलिका प्रतिक्रिया के धधकते अंगारों से नंगे पैर निकालने की चिल्ली करीब सौ साल से चल रहे हैं। इसे क्यों और किसके कारण जान से मार दिया जाता है। इसकी सटीक जानकारी किसी भी ग्रामीण के पास नहीं है। लेकिन आस्था इसलिए है कि पर्व के आगमन के कई दिन पूर्व से ही तैयारियां विवरण के द्वारा शुरू कर दी जाती हैं बड़ी संख्या में ग्रामीण इस स्थिति में भाग लेते हैं।
ग्राम पर प्राकृतिक आपदा नहीं आती
हालांकि धधकते अंगारों पर चलने की सही जानकारी को लेकर ग्रामीण स्पष्ट रूप से कुछ भी जानकारी नहीं देते हैं। लेकिन ग्राम के बुजुर्ग ग्रामीण केशवसिंह, रामेश्वर, नरेंद्र सिंह, लक्ष्मीनारायण रघुवंशी, बाबूलाल साहू, परसोत्तम रघुवंशी, हरगोविंद पटेल, शिवराज कुशवाहा, नारायण राजपूत, नरेन्द्रसिंह, आदित्य रामशरण, कोमल सिंह रघुवंशी आदि का कहना है कि ग्राम में कभी भी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं आई है। सुख शांति समृद्धि के लिए हमारे रोधक सैकड़ों वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है, इसी मान्यता के कारण प्रत्येक वर्ष होली दहन के बाद यह स्थिति बताई जाती है। शिकायत का कहना है कि पहले सभी लोग अंगारों पर चलते हैं उसके बाद सभी एक दूसरे को रंग गुलाल दावेदार हैं।
ग्राम चंदपुरा जयदीप पटेल के निवास स्थान में होने वाले कार्यक्रम में शामिल संबंधितों में सावित्रीबाई, रोशनी ठाकुर, कामिनी, विकास साहू सुरेन्द्र सिंह, मनोज शास्त्री आदि ने भी कार्यक्रम को लेकर ईश्वर पर श्रद्धा पर भरोसा जताते हुए कहाकि दहगते अंगारों से हटकर अपने पैरों में कोई भी परेशानी नहीं होती उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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