देवी भागवत कथा में मातारानी की महिमा, नारद की माया और हरिश्चंद्र के सत्य का बखान

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । पहरुआ खेरमाई प्रांगण में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा पुराण में चल रही देवी भागवत कथा के पांचवे दिवस पर शनिवार कोटि श्री श्री 1008 बनवारी दास जी महाराज के सानिध्य में कथा व्यास पंकज गर्ग भटिया आश्रम द्वारा श्रद्धालुओं को माता भगवती की अद्भुत लीलाओं का श्रवण कराया। कथा व्यास पंकज गर्ग ने ने माता रानी द्वारा दुर्गम दैत्य के वध की रोमांचक कथा सुनाते हुए धर्म की विजय और अधर्म के नाश का महत्व प्रतिपादित किया।
कथा के इस भाग में, माता के प्रचंड रूप और दुर्गम के अहंकार को चूर-चूर करने की शक्ति का जीवंत वर्णन किया गया, जिसे सुनकर भक्तगण भक्तिभाव से ओतप्रोत हो उठे।
इसके पश्चात, नारद मुनि के स्त्री रूप धारण करने और भगवान विष्णु की माया का सुंदर निरूपण किया गया । कथा व्यास पंकज गर्ग ने बताया कि किस प्रकार देवर्षि नारद भी भगवान की माया से मोहित हो गए थे, जिससे यह शिक्षा मिलती है कि माया अत्यंत प्रबल है और उससे केवल भगवत कृपा से ही बचा जा सकता है । इस कथा ने श्रोताओं को सांसारिक मोह-माया से विरक्त रहने और परमात्मा में ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दी। कथा के अंतिम भाग में, सत्यनिष्ठ राजा हरिश्चंद्र के त्याग और धर्म पर अटल रहने की मार्मिक कथा सुनाई गई । राजा हरिश्चंद्र ने सत्य की रक्षा के लिए अपना राज्य, परिवार और अंततः स्वयं को भी बेच दिया, परंतु अपने वचन से कभी नहीं डिगे । इस उपाख्यान ने श्रोताओं को सत्य के मार्ग पर चलने और किसी भी परिस्थिति में धर्म का पालन करने का संदेश दिया।
कथा में मातारानी की शक्ति, भगवान की माया और राजा हरिश्चंद्र के सत्यनिष्ठा के अद्भुत संगम को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए । कथा स्थल पर भारी संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही, जिन्होंने भक्तिमय वातावरण में देवी भागवत के अमृतमय वचनों का श्रवण किया।
कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।



