कन्याएं कन्यादान का सौभाग्य अपने पिता को ही दें:- प्रभु नागर
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । ज्ञान गंगा यज्ञ समिति द्वारा उत्कृष्ट स्कूल के मैदान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन मालवा माटी के वरद पुत्र संत श्री कमल किशोर नागर के पुत्र प्रभु नागर ने कन्याओं से करबद्ध निवेदन कर संकल्प लेने को कहा की वह अपने कन्यादान का सौभाग्य अपने पिताजी को ही दें। क्योंकि बेटी का धन, सेवा और मरने के बाद कंधा पिता नही लेते । बेटियां सिर्फ पिता को एक ही चीज देती है वह है कन्यादान । उन्होंने कहा की पिता की दहलीज धन्य हो जाती है जब वह अपनी बेटी को विदा करते है ।
उन्होंने आज के परिवेश पर ज्ञान देते हुए महिलाओं सभी माताओं बहनों से कहा कि वे शालीन और सभ्य वस्त्र पहने उन्होंने उदाहरण के रूप में कहा की बाहर बिकने वाली मिठाई खुले में सजा कर रखी जाती है और लक्ष्मी पूजन में बनने वाली घर की मिठाई ढांक कर रखी जाती है । इसी प्रकार माता बहने सिर को ढांक कर रखे यही भारतीय सभ्यता है।
संत श्री ने कहा की वह सरल भाषा हिंदी में कथा करते है जो सर्व साधारण की समझ में आए । उन्होंने कहा की संस्कृत भाषा यदि श्रीकृष्ण को जन्म देने वाली मां है तो हिंदी उन्हें पालने वाली मां यशोदा है। आदिवासी अंचलों में सरल भाषा में कथा करने की वजह से तीन सौ लोग सिर्फ इसी वर्ष जो की सनातन धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना चुके थे वह सनातन धर्म में वापस आए है । इसलिए सरल भाषा हिंदी का उपयोग ही करना चाहिए।
उन्होंने मानव देह और देश के बारे में कहा की हमे कभी भी अपने देश और देह की निंदा नहीं करना चाहिए । आप पढ़ लिख कर बाहर चले भी जाए तो भी अपने गांव व देश को नहीं भूलना चाहिए। व्याधि और व्यवधान तो चलते रहते है परंतु देह अंत तक साथ देती है इसलिए देह की निंदा नहीं करना चाहिए । ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु की शरण लेना अति आवश्यक है भगवान श्री कृष्ण गुरु सांदीपनी और भगवान राम को ज्ञान प्राप्ति के लिए विश्वामित्र गुरु के साथ जाना पड़ा । पुस्तक सिर्फ पुस्तक है लेकिन गुरुदेव की कृपा पुस्तक है । इस समय की सबसे बड़ी विडंबना है की व्यक्ति सिर्फ धन कमाने में लगा है। धन कमाने के साथ साथ संतान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने उपस्थित कथा श्रवण करने वालों से कहा कि कभी भी गलत लाइन में मत पड़ो, भागवत की कृपा से सभी भक्तो की लाइन बन गई है । लाइन बनाना है तो गुरु के सानिध्य में रहना ही पड़ेगा । मौन के विषय में गुरुदेव ने कहा की झगड़ा करके छह माह तक मुंह नही बोलने से अच्छा है की जब झगड़ा हो तब कुछ समय के लिए मौन हों जाओ तो झगड़ा ही नहीं होगा।
कथा के अंत में मुख्य यजमान हरिकेश राय, संतोष राय, सहित उनके सहयोगियों ने व्यासपीठ की आरती की। बुधवार को कथा का अंतिम दिन है जिससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने का अनुमान है आयोजक समिति ने अंतिम दिन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।




