करप्शन पर कार्यवाही कब ? सिलवानी जनपद पंचायत करप्शन चरम पर
उपयंत्री और एसडीओ की मिलीभगत सचिव, सरपंच कर रहे भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार के माॅडल के रूप में उभर रही जनपद पंचायत
पूर्व के भ्रष्टाचार की जांच में दोषियों पर कलेक्टर के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सिलवानी। गांव की चौपाल, चौराहे पर चर्चा आम है मुन्नी से ज्यादा ग्राम पंचायतें बदनाम है यह कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, गांव की चौपाल हो या नगर के चाय पान की दुकानो पर इन दिनों ग्राम पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार की चर्चा सुनने को मिल जायेगी, फला ग्राम पंचायत ने फर्जी बिल लगाकर इतनी राशि निकाल ली, तो फला ग्राम पंचायत ने पुराने काम को नया दर्शाकर अधिकारियों की मिलीभगत से सीसी तक जारी करा ली। ग्राम पंचायत सचिव, सरपंच, रोजगार सहायक के साथ जनपद पंचायत के उपयंत्री, सहायक यंत्री और जिम्मेदार अधिकारी भी उनके इन कार्यों में पूरा साथ देते है।
सरकार ने 15 जून तक अमृत सरोवरों का काम पूर्ण करने के निर्देश दिए थें, लेकिन आज भी इन अमृत सरोवरों का काम पूरा नहीं हो पाया है। सिलवानी विकासखंड में 13 सरोवर स्वीकृत हुए हैं, एक अमृत सरोवर लगभग 19 लाख रुपए का बन रहा है। लगभग 2 करोड़ 47 लाख की लागत से इन 13 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
जनपद पंचायत सिलवानी की ग्राम पंचायतों में पूर्व में हुए गड़बड़झाले तो किसी से छिपे नहीं है। लेकिन वर्तमान में भी नए सरपंच और पंचायत कर्मियों ने शासकीय योजनाओं में गड़बड़झाला करना शुरू कर दिया है। ताजा मामला ग्राम पंचायत समनापुर का साामने आया है जहां ग्राम पंचायत ने केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर जमुनिया गनेशराम के निर्माण कार्य का ठेका एक ठेकेदार को देकर कार्य कराया जा रहा है जिसमें ठेकेदार द्वारा स्थल से ही मिट्टी खोदकर लाखों रूपये के बिल मुरम पिचिंग के नाम पर लगा कर सरकारी राशि की बंदरवाट कर ली। जबकि ग्राम पंचायत और खासतौर पर मनरेगा में किसी कार्य का ठेका नहीं दिया जा सकता है, इसके बाबजूद ठेकेदारी से कार्य धडल्ले से हो रहे है।
मनरेगा पोर्टल पर अमन बिल्डिंग मटेरियल के बिल क्रमांक 151, 152, 153, 154, 155, 156, 157 सभी की एक ही दिनांक 20 मई 2023 और सभी बिलों में एक जैसी राशि 98899 रूपये कुल 834192 रूपये का भुगतान प्राप्त किया है। वही इस कार्य में अभी तक 1084864 रूपये का भुगतान होना दर्शाया गया है। मौके पर शमशान भूमि के पास पूर्व से मिट्टी निकालने की गई खुदाई पर अमृत सरोवर का निर्माण किया गया है।
जिम्मेदार मनरेगा उपयंत्री, सहायक यंत्री कार्यालय में ही बैठकर कार्यो का मानीटिरिंग कर रहे है। वही ग्राम पंचायत और ठेकेदार 10 लाख से अधिक का भुगतान हो गया है जिम्मेदार कुछ भी बताने से बचते नजर आ रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि अमृत सरोवर निर्माण में पूरा कार्य जेसीबी मशीन से कराया गया है। जबकि मनरेगा में मशीनरी उपयोग पर प्रतिबंध है हार्ड मुरम होने पर ही तय मापदंड तक ही जेसीबी का उपयोग किया जा सकता है। ग्राम पंचायत और ठेकेदार योजना की इसी बात का फायदा उठाकर पूरा कार्य ही जेसीबी से करा दिया।
ठेकेदार ने लगाये मुरम के बिल, जानकारी के अनुसार ठेकेदार के पास ना प्रशासन से किसी भूमि की लीज ली और ना ही राजस्व में रायल्टी की राशि जमा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि कार्य स्थल से ही जेसीबी से मिट्टी खोदकर अमृत सरोवर की पार का निर्माण किया गया है।
अभी तक नहीं हुई चिचोली के दोषियों पर कार्यवाही।
जनपद पंचायत सिलवानी की ग्राम पंचायत चिचोली में खेत तालाब बनाए बिना ही 25 लाख 47 हजार 446 रुपए की राशि निकालने के मामले में दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया था, वहीं रोजगार सहायक, मनरेगा के उपयंत्री और एसडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इस भ्रष्टाचार को मीडिया ने उजागर किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराई। इतना ही नहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
चिचोली पंचायत में तालाब निर्माण कार्य की जांच कराई थी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर दो पंचायत सचिवों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई है। तीन अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था।
अरविंद दुबे, कलेक्टर रायसेन इन अफसरों को थमाए थे कारण बताओ नोटिस
ग्राम पंचायत चिचोली में खेत तालाब निर्माण की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी उपयंत्री कमलेंद्र धाकड़ और मनरेगा के एसडीओ सुशील गोयल पर थी, लेकिन अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से नहीं निभाई। इस कारण इन दोनों अधिकारियों के साथ ही गांव के रोजगार सहायक ओपी गौर को भी कारण बताओ नोटिस देकर उनसे जवाब मांगा गया था। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। जबकि उक्त मामले पंचायत सचिव के साथ उक्त अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार थे। आनन फानन में जांच की फाइल को दबा दिया गया जिससे इन अधिकारियों के हौसले बुलंद है और अब वह अन्य ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार के कारनामों को अंजाम दे रहे है।




