पर्यावरणमध्य प्रदेश

एसडीओपी आलोक श्रीवास्तव का पर्यावरण जागरूकता अभियान

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । अमूमन, पुलिस की छवि को लेकर आम धारणा कुछ और ही रही है। और कई तरह के सवाल भी उठते रहे हैं, मगर, पुलिस विभाग में आरक्षक से लेकर आईपीएस स्तर तक के ऑफीसरों ने इस आम धारणा को ग़लत साबित कर दिखाया है कि पुलिस के हाथ में डंडा ही बेहतर लगता है। आज पुलिस महकमे में आरक्षक से लेकर आईपीएस स्तर तक के ऐसे ऑफीसरों की तादाद है जिनका कला, साहित्य और. संस्कृति में जबर्दस्त दखल है। जिनकी सकारात्मक सोच ने यह साबित कर दिखाया है कि पुलिस में भी लेखक, कवि, कलाकार, और समाजसेवी ऑफीसरों की कमी नहीं है। आईपीएस ऑफीसरों में उपेन्द्र मोहन जोशी, दिनेश जुगरान, विजय वाते, बृजलाल हाण्डा, संजय कुमार झा, मुकेश जैन, अजीत चौधरी, अनुराधा शंकर, अगम जैन, वेदप्रकाश शर्मा, मदन मोहन समर, पल्लवी त्रिवेदी आदि ऐसे बहुत से नाम हैं जिन्होंने लेखन के जरिए एक अलहेदा पहचान बनाई है। इनकी सकारात्मक सोच पुलिस की प्रणाली में भी देखी गई है। ये ऑफीसर बेहतर सोच की वजह से आमजन के काफी करीब रहे हैं। पिछले दिनों भोपाल अशोका गार्डन थाने में पदस्थ पुलिस निरीक्षक आलोक श्रीवास्तव ने जहाँ लॉकडाउन के दौरान जो कार्य किया था और जन सामान्य में अपने कार्य के जरिए तमाम पुरस्कार अर्जित कर अशोका गार्डन थाने का नाम रोशन कर दिखाया था। पदोन्नति के बाद आलोक श्रीवास्तव रायसेन जिले में स्थानांतरित होकर चले गए। बेगमगंज एसडीओपी हैं। आलोक श्रीवास्तव यहाँ भी अपने अनूठे और सराहनीय कार्यों के जरिए आमजन का दिल जीतने में कामयाब हुए हैं। एसडीओपी आलोक श्रीवास्तव पर्यावरण जागरूकता का कार्य भी बड़ी सक्रियता से कर रहे हैं। जहाँ आलोक खुद पौधारोपण करते दिखाई देते हैं, वहीं हाल ही में उन्होंने स्कूली बच्चों को सीड बॉल्स से अंकुरित पौधे वितरित कर पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।
इसके लिए आलोक श्रीवास्तव से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि हर घर में आम, जामुन, इमली, मुनगा खाकर उसकी गुडली फेंक दी जाती है। हम इस गुठली को इकट्ठा कर उससे सीड बॉल तैयार करते हैं ।
सीड बॉल्स तैयार करने में कोई अतिरिक्त लागत नहीं लगती। सिर्फ मिट्टी, गोबर की खाद और चूल्हे की राख को मिलाकर उसका पेस्ट बना लिया जाता है। और फलों की गुठली उसके बीच रखकर गोली बना ली जाती है। यह गोली ही आगे चलकर पौधे का रूप लेती है। क्योंकि गोबर की खाद प्राकृतिक उर्वरक है तथा चूल्हे की राख प्राकृतिक कीटनाशक है। यह सीड बॉल किसी भी जगह फेंक देने पर पानी पड़ने और अनुकूल वातावरण मिलने पर प्राकृतिक रूप से पनप कर पौधे का रूप लेती है।
क्योंकि यह पौधा प्राकृतिक रूप से तैयार होता है, इसलिए इसे अतिरिक्त देखरेख की आवश्यकता नहीं पड़ती, और यह पौधा धीरे-धीरे पेड़ का रूप लेता है।
सीड बॉल्स का सक्सेस रेश्यो 99.99% है। इसे तैयार करने में कोई लागत भी नहीं आती।
इस तरह के पौधारोपण में ना कोई गड्ढे करने पड़ते हैं और ना कोई अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है।
हर व्यक्ति इसे अपने घर पर भी तैयार कर सकता है और इस तरह से हम पर्यावरण बचाने और वृक्षारोपण में अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं।
अभी तक आलोक श्रीवास्तव करीब 5000 सीड बॉल तैयार कर निशुल्क वितरण कर चुके हैं, तथा आने वाली पीढ़ी को भी सीड बॉल एवं पर्यावरण संरक्षण के संबंध में निरंतर जागरूक कर रहे हैं।
आलोक श्रीवास्तव का पर्यावरण जागरूकता अभियान तो लोकप्रिय हुआ ही है, उनके द्वारा किए जा रहे जनहित के कार्यों को देखकर कहा जा सकता है।

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