Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 19 अगस्त 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 19 अगस्त 2023
19 अगस्त 2023 दिन शनिवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया तिथि है। आज शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष की हरियाली तीज व्रत है। इसको कजरी तीज या श्रावणी तीज या मधुश्रुवा व्रत भी कहते हैं। आज स्वर्ण गौरी व्रत ठकुराईन जयन्ती जिसे सुकृत व्रत भी कहा जाता है है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को हरियाली तीज या कजरी तीज या श्रावणी तीज व्रत की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण माह शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 10:19 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 01:47 AM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। तथा राशि स्वामी ग्रह शुक्र है।
🔕 योग – सिद्ध योग 09:18 PM तक, उसके बाद साध्य योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 09:11 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 10:19 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:20:06
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:03:03
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:25 ए एम से 05:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:47 ए एम से 05:52 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:35 पी एम से 03:28 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:57 पी एम से 07:19 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:57 पी एम से 08:03 पी एम
💧 अमृत काल : 05:44 पी एम से 07:32 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, अगस्त 20 से 12:47 ए एम, अगस्त 20
❄️ रवि योग : 01:47 ए एम, अगस्त 20 से 05:53 ए एम, अगस्त 20
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/मधुश्रवा तीज (हरियाली तीज),मां पार्वती व भगवान शिव को समर्पित त्योहार हरियाली तीज उत्सव, अफगान स्वतंत्रता दिवस (अफगान विजय दिवस), पद्म भूषण से सम्मानितअब्दुल राशिद ख़ान जयन्ती, राष्ट्रपति पं शंकरदयाल शर्मा जयन्ती, क्रांतिकारी नेता एस. सत्य मूर्ति जन्म दिवस, विश्व मानवीय दिवस, विश्व फोटोग्राफी दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे घर के नैऋत्य कोण, यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा में मिट्टी के बड़े गमले लगाने के बारे में। वास्तु शास्त्र के अनुसार मिट्टी के छोटे गमले लगाने के लिए ईशान कोण और बड़े गमले लगाने के लिए नैऋत्य कोण का चुनाव करना चाहिए। नैऋत्य कोण, यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा में मिट्टी के बड़े गमले लगाने से आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। इससे आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। खासकर कि आपको पेट संबंधी किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। साथ ही इससे माता के साथ आपके रिश्ते अच्छे बने रहते हैं। आपको अपने कामों में अपनी माता से पूरा सहयोग मिलता रहता है।
वास्तु के मुताबिक, ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा में मिट्टी के गमले लगाने से आपको जीवन में कभी अवरोध, यानि मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर फिलहाल कोई परेशानी आपके जीवन में चल भी रही है तो वो भी जल्द ही दूर हो जाएगी। साथ ही अगर आपके परिवार में कोई छोटा बेटा है तो उसके जीवन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नींबू की पत्ती खाने से क्या फायदा है?रोजाना नींबू की पत्तियां चबाने से स्ट्रेस यानी तनाव कम होता है। नींबू की पत्तियों में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जिनसे स्ट्रेस कम होता है। नींबू के पत्तों को सूंघनें पर इसमें भीनी खुशबू आती है।
नींबू की तरह ही इसकी पत्तियों में भी विटामिन सी पाया जाता है, जो कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है। इसके सेवन से आप मौसम बदलने के दौरान फैलने वाले इंफेक्शन से बच सकते हैं।
नींबू की पत्तियों को चबाने से आपकी वजन कम करने की जर्नी आसान हो सकती है। नींबू का पेड़ आपको किसी भी पार्क में मिल सकता है, इसके अलावा आप घर में भी नींबू का पेड़ लगा सकते हैं।
तनाव के कारण होने वाले सिर दर्द में भी नींबू की पत्तियां फायदेमंद साबित होती है। रोजाना नींबू की पत्तियों को चबाकर खाने से आप सिर दर्द जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
लकवा किसकी कमी से होता है- लकवा मारने के पीछे एक बड़ा कारण विटामिन बी 12 हो सकता है। दरअसल, विटामिन बी12 की कमी की वजह से आपके न्यूरल फंक्शन प्रभावित हो सकते हैं। इसे ऐसे समझें कि ये तंत्रिका तंत्र की समस्या का कारण बनती है। तंत्रिका तंत्र आपके शरीर की कमान और संचार प्रणाली है। यह आपके पूरे शरीर में मस्तिष्क से संकेत भेजता है और बताता है कि क्या करना है। अब जब विटामिन बी12 की कमी होती है तो, ये चीज तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाती है, तो संदेश मांसपेशियों तक नहीं पहुंच पाते हैं और ये लकवा मारने का कारण बन सकता है।
*शेष कल 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ ज्योतिष में सूर्य देवता को ग्रह सम्राट की उपाधि प्राप्त है। क्योंकि उनका स्वभाव राजाओं जैसा है। इसलिए जो लोग सूर्य देव के प्रभाव से प्रभावित होते हैं उनके अंदर राजसी गुण होते हैं। वह सभी भौतिक सुखों का आनंद लेता है। साथ ही, वे आत्मविश्वासी और दूरदर्शी होते हैं। इसके साथ ही सूर्य देव को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, सरकारी नौकरी और पिता का कारक माना जाता है। इसलिए ज्योतिष में सूर्य की स्थिति को जितना प्रमुख माना जाता है, वास्तु में सूर्य की दिशाओं का पालन करना उतना ही आवश्यक माना जाता है। क्योंकि सूर्य की ऊर्जा सकारात्मकता का कारक है और इसकी ऊर्जा मानव जीवन में रोशनी लाती है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से सूर्य से जुड़े वास्तु उपाय 💁🏻♀️ इस समय करें पूजा
शास्त्रों के अनुसार शाम 4 बजे से 6 बजे तक का समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है और इस समय सूर्य देव घर के उत्तरी भाग में होते हैं। इसलिए यह समय पूजा के लिए सर्वोत्तम है। इस समय आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। साथ ही आपको मंदिर ईशान कोण में ही बनाना चाहिए।
🚪 सभी खिड़कियां और दरवाजे खोलें
ऐसा माना जाता है कि जिन घरों में सुबह के समय सूरज की रोशनी आती है वहां रहने वाले लोग कम बीमार पड़ते हैं। इसलिए वास्तु में कहा गया है कि सुबह के समय घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल दें।
🤷🏻♀️ इस दिशा में होना चाहिए किचन और वॉशरूम
सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक सूर्य देव घर के दक्षिण-पूर्व में होते हैं। इसलिए यह समय स्नान करने और भोजन पकाने के लिए उत्तम है। इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इनका स्थान दक्षिण दिशा में होना चाहिए। ताकि सूरज की रोशनी यहां तक जा सके।
👉🏽 इस दिशा में शयनकक्ष होना चाहिए_
दोपहर 12 से 3 बजे तक विश्राम का समय होता है और इस समय सूर्य देव दक्षिण दिशा में होते हैं। इसलिए शयनकक्ष इसी दिशा में होना चाहिए। साथ ही बेडरूम में गहरे रंग के पर्दे लगाने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य देव से पराबैंगनी किरणें निकलती हैं, इसलिए गहरे रंग के पर्दे रखने से आपकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
🌞 कमजोर सूर्य को मजबूत कैसे करें?
सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन स्नान करने के बाद लाल वस्त्र पहनें। साथ ही ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:’ मंत्र का 3, 5 या 12 माला जाप करें। इससे लाभ होगा।
रविवार के दिन नमक का सेवन न करें। दलिया, दूध, दही, घी, चीनी और गेहूं की रोटी जैसी चीजें खाएं। इसके अलावा, यह सूर्य की स्थिति को बढ़ाता है।
रविवार का व्रत करने से सूर्य शुभ फल देता है, शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य के कमजोर होने पर व्यक्ति को लाल और पीले रंग के वस्त्र, गुड़, सोना, तांबा, माणिक, गेहूं, लाल कमल, मसूर की दाल, गाय आदि का दान करना चाहिए।
माणिक्य रत्न धारण करने से सूर्य की शक्ति प्रबल होती है। इसके अलावा सूर्य के ऊपर तांबा, लाल या सूर्यकांत मणि भी धारण किया जा सकता है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


