कृषिमध्य प्रदेशव्यापार

गेहूं की कमी का असर गरीब उपभोक्ताओं पर, भाव बढ़ने से दोगुनी हुई मुसीबत

बाजार में गेहूं 2700 रुपए क्विंटल, कंट्रोल पर गेहूं की मात्रा कम कर दी, चावल बढ़ाया, लोग बोले- कैसे भरें पेट
सिलवानी। गरीबों को अब दाल रोटी की जगह दाल चावल खाना होगा। क्योंकि गेहूं की कमी को देखते हुए केंद्र शासन ने प्रदेश के साथ जिले में गेहूं का आवंटन कम कर दिया है, वहीं चावल का बढ़ा दिया है। उधर गेहूं की कमी का असर अब बाजार में भी दिखाई दे रहा है। इसका उदाहरण यह है कि बाजार में 1900 से 2000 रुपए क्विंटल मिलने वाला गेहूं अब 2700 रुपए क्विंटल पर जा पहुंचा है। बताया गया है कि यह स्थिति गेहूं की मांग बढ़ने और स्टॉक कम होने के कारण निर्मित हुई है। यहां बताना जरूरी है कि नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में पीडीएस दुकानों से ग्रामीणों को प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की ओर से अलग-अलग योजनाओं के तहत राशन दिया जाता है जिसके तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में पात्र हितग्राही को 3 किलो चावल और 2 किलो गेहूं जबकि इससे पूर्व प्रति व्यक्ति को 4 किलो गेहूं 1 किलो चावल दिए जाते थे। मालूम हो कि केंद्र व राज्य की ओर से क्षेत्र की पीडीएस दुकान पर चावल का ज्यादा आवंटन किया गया है। जबकि गेहूं का आवंटन कब भेजा गया। वहीं बाजार में गेहूं के भाव में एकाएक तेजी आ गई है। वजह यह है कि गेहूं का स्टॉक कम हैं। इन दिनों गेहूं 2 हजार 700 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि 6 माह पूर्व गेहूं भाव 1900 से 2 हजार रुपए था। इस संबंध में व्यापारी जगदीश साहू का कहना है कि मांग और आपूर्ति के फेर में गेहूं के भाव आसमान छू रहे हैं। परेशानी की बात यह है कि अभी गेहूं की नई फसल आने के लिए 4 माह का समय लगेगा तब तक गेहूं के दाम कम होने की कोई संभावना नहीं है। बढ़े हुए दाम का सीधा असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। केंद्र की ओर से निःशुल्क जबकि प्रदेश सरकार एक रुपए किलो अनाज देती है। राशन दुकानों पर अनाज मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के जरिए जिले के वेयरहाउस में पहुंचाया जाता है जहां से अनाज को राशन दुकान पर पहुंचाया जाता है। अनाज की डिमांड नागरिक आपूर्ति निगम को भेजी जाती है। मांग के अनुसार अनाज जिले में नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा भेजा जाता है।

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