पर्यटन स्थल के रुप में हो सकता है विकसित, लगातार की जा रही मांग
सिलवानी। घोघरा जलप्रपात पर इस समय पर्यटकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। नगर से करीब 10 किलो मीटर दूर घोघरा नामक स्थान पर प्राकृतिक झरना स्थित है। करीब 25 फिट ऊंची पहाड़ी से कलकल करता हुआ पानी नीचे गिरता है। जो कि राहतगढ़ के वॉटर फॉल व रायसेन के महादेव पानी नामक पर्यटन स्थल की याद दिलाता है बल्कि घोघरा झरना लोगों के खास कर युवाओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यूं तो प्रतिदिन लोग झरने का आनंद लेने पहुंच रहे है। लेकिन रविवार को घोघरा पहुंचने वाले युवाओं की संख्या बढ़ जाती है। रविवार को अनेकों की संख्या में युवा वहां पर पहुंचते है। यहां चारों तरफ पहाड़ों के ऊपर से पानी गिरता हैं इसे देखने के लिए पर्यटक पहुुंच रहे और झरने में नहा रहे हैं। रविवार को इस जगह सैलानियों का तांता ज्यादा लगा रहता है। जिसमें कई लोग झरने पर नहाते और सेल्फी लेते हुए दिखाई देते हैं।
पैदल करना पड़ता है सफर
नगर से प्राकृतिक जल प्रपात घोघरा की दूरी करीब 10 किलो मीटर है। लेकिन 4 किलो मीटर का रास्ता डामर युक्त है जबकि 6 किलो मीटर का रास्ता पूर्णतः कच्चा व पहाड़ी युक्त होने के कारण उबड खाबड है। 6 किलो मीटर का उक्त रास्ते को पैदल ही पूरा करना पड़ता है। जंगल के रास्ते से होकर ही घोघरा झरने तक पहुंचा जा सकता है। घोघरा जाने वालों को 6 किलो मीटर का रास्ता पैदल ही पूरा करना पड़ता है। मात्र 4 किलो मीटर ही वाहन से सफर किया जा सकता है। घोघरा जाने के लिए गैरतगंज मार्ग पर स्थित जुनिया पुल के पास से जंगल से होकर रास्ता घोघरा झरने तक जाता है।
तहसील में मात्र घोघरा ही एक मात्र प्राकृतिक झरना नहीं है जहां कि करीब 25 फिट ऊपर पहाड़ी से पानी गिरता हो जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुचंते हो बल्कि जुगनखोह, हाथीडोल, मृगेन्द्रनाथ सहित अनेक ऐसे स्थल है जहां कि अनेकों फिट ऊपर पहाड़ी से दूधिया पानी गिरता है। तहसील के उक्त सभी स्थल पर्यटन के रुप में विकसित हो सकते है।
बारिष से निखरा प्रकृति का सौंदर्य
बारिष के कारण प्रकृति चारों ओर खिली-खिली है। जिस तरफ भी नजर घुमाई जाए हरियाली ही हरियाली नजर आती है। नगर के जमुनिया घाटी और सियरमउ घाटी इलाके पहाड़ी हैं और यहां पर साल भर मौसम सुहाना बना रहता है, लेकिन बरसात के दिनों में इलाके में हर दिन रिमझिम बारिष हो जाती है। इससे मौसम सुहाना बना रहता है। खासकर बरसात के दिनों में पहाड़ों पर उड़ती धुंध मानो स्वर्ग के जैसे नजारों का एहसास कराने लगती है। इन घाटों पर अक्सर लोग रूककर सेल्फी या फोटो लेने बरबस ही रूक जाते हैं।



