छात्रों के भविष्य से होता खिलवाड़, जिम्मेदारो ने अब तक साथी चुप्पी
पढ़ाई अंग्रेज़ी माध्यम में कराई और परीक्षा ली हिन्दी माध्यम से
ब्यूरो चीफ : संजय द्विवेदी
गैरतगंज । मामला गैरतगंज के शासकीय नवीन एकीकृत माध्यमिक शाला का है जिसमे आरोप हे कुछ शिक्षको की लापरवाही की वजह से छात्रों के भविष्य से खिलाबड हुआ है जिसकी विभागीय जांच महिनो से चल रही हे लेकिन अब तक कुछ नही हो पाया है या यूँ कहा जा सकता है कि शिक्षा विभाग उन शिक्षकों पर कोई भी कार्यवाही करने से बच रहा है या बचा रहा है ? जिन की वजह से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है ? गैरतगंज के शासकीय नवीन एकीकृत माध्यमिक शाला मे अंग्रेज़ी माध्यम के कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 वीं तक के छात्रों को प्रवेश भी दिये गये थे और छात्रों की पढ़ाई भी ठीक चल रही थी और अर्धवार्षिक परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से करवाई भी गई लेकिन लापरवाह शिक्षकों की वजह से वार्षिक परीक्षा अंगेजी माध्यम के छात्रों को हिन्दी माध्यम से देना पड़ी जिससे उन परिजनों के साथ थोखा हुआ जो नर्सरी से कक्षा 5 तक तो जेसे तेसे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दिला पाये थे लेकिन फिर किसी कारण वस वें 5वीं से उन शालाओ मे अपने बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पा रहे थे।
तभी शासन की योजना अन्तर्गत गैरतगंज के शासकीय नवीन एकीकृत माध्यमिक शाला को 2014 मे अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिये शासन द्वारा शिक्षा सुधार और कम खर्च पर छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुये कक्षा 5वीं से 8वीं तक अंग्रेजी माध्यम के छात्र छात्राओं के एडमिशन लिये गये जिस से परिजनों को एक उम्मीद जागी की उन्के बच्चे भी अब अंगेजी माध्यम से शासकीय स्कूल में पढ़ लिख कर भविष्य में कुछ कर सकेंगे।
लेकिन कुछ शिक्षकों को ये गवारा नही गुजरा की कही ये बच्चे भविष्य मे उनके बच्चो से जो प्राईवेट नाम चीन स्कूलो मे महंगी शिक्षा अध्यन कर रहे हे ये सरकारी स्कूल के बच्चे उन से आगे ना निकल जाये शायद यही सोच कर उन मासूम बच्चों के भविष्य से ही खिलवाड़ कर दिया। जबकी लाखों रुपये खर्च कर अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिये शासन ने एक विल्डिग भी वनबाई और उचित व्यवस्थाएं भी दी लेकिन शासन की उम्मीदों पर कुछ शिक्षकों की मिली भगत से पानी फेरने का प्रयास किया गया जिसमें वो शिक्षक अभी तक की स्थितियों में सफल भी रहे । अब देखने वाली बात यह हे की शासन प्रशासन कर तक ऐसे शिक्षकों पर कार्यवाही करता है ? जो शासन की शिक्षा सुधार नीति को पलीता लगा रहे हे। इस मामले मे शिक्षा विभाग भी विगत कई महिनों से इस मामले मे केवल जांच के नाम पर स्कूल मे जा जाकर चाय पानी कर खानापूर्ति कर रहा है।



