मोहर्रम का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । नवासए रसूल हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कर्बला के मैदान में हक और सच्चाई के लिए जो बेमिसाल कुर्बानी पेश की थी वह रहती दुनिया तक याद की जाती रहेगी। उस कुर्बानी की याद में मनाया जाने वाला मोहर्रम का त्योहार नगर साहित ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से मनाया गया। मुस्लिम त्योहार कमेटी के नेतृत्व में आशूरा 10 मोहर्रम का जुलुस काजी मोहल्ले से शुरू हुआ जो विभिन्न रास्तो से होता हुआ गांधी बाजार पहुंचा जहां अखाड़े के प्रदर्शन उपरांत समापन किया गया।
वहीं इससे पहले चांद की 6 तारीख से रात में बराबर सवारियां निकाली जाती रहीं पुराना बस स्टैंड टेकरी चांद शाह बाबा की दरगाह से उठी सवारी के बाद दूसरे दिन किले से शाही सवारी, तीसरे दिन काजी मोहल्ला से कदीमी सवारी चौथे दिन हिदायतपुर की परम्परागत सवारी निकाली गई जिसमें किले की सवारी भी शामिल हुई और अलाव बुझाया।
सवारियों पर सभी वर्गों के लोगों द्वारा नाल पेश कर लोभान छोड़कर मन्नते पूरी करने की गुहार लगाई गई।
ताजियों के परंपरागत जुलूस में हिलाली अखाड़े के युवाओं ने अखाड़े के करतब दिखाकर सभी का मनमोह लिया।


