धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 20 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 20 जून 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 09:49 AM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रेवती 09:45 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। रेवती नक्षत्र के देवता पूषन हैं। पूषन को हिंदू धर्म में एक सौर देवता माना जाता है।
⚜️ योग – शोभन योग 11:46 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : गर – 09:49 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 08:36 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:12:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:48:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 07:30 पी एम से 09:00 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जून 21 से 12:43 ए एम, जून 21
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : 05:24 ए एम से 09:45 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में सवाकिलो बताशे चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/पंचक समाप्ति 21.44/सर्वार्थसिद्धियोग/अमृतसिद्धि योग/ संत कबीर जयन्ती, ग्रीष्म संक्रांति दिवस, राष्ट्रीय अमेरिकी ईगल दिवस, सबसे बदसूरत कुत्ता दिवस, विश्व शरणार्थी दिवस, विश्व उत्पादकता दिवस, भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिज्ञ द्रौपदी मुर्मू जन्म दिवस, महान विजेता सिकंदर जन्म दिवस (356: ईसा पूर्व), अभिनेता राजेंद्र कुमार जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर रमाकांत देसाई जन्म दिवस, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह जन्म दिवस, प्रसिद्ध पा‌र्श्वगायिका गीता दत्त स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🌷 Vastu Tips 🌹
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार,नींबू, कैक्टस आदि काटेदार पेड़-पौधों को घर के अन्दर नहीं लगाना चाहिए साथ ही ऐसे पौधे जिनसे दूध निकलता है उन्हें भी नहीं लगाना चाहिए, ऐसे पौधों को अशुभ माना जाता है। ऐसे पौधों से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है जिससे घर में अशांति रहती है।
लेकिन गुलाब का पौधा घर में लगाना शुभ माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि काला गुलाब घर में नहीं लगाना चाहिए क्योंकि काला गुलाब लगाने से चिंता बढ़ती है। साथ ही घर में ऐसे पेड़-पौधे भी नहीं लगाने चाहिए जो सांप, मधुमक्खी, उल्लू आदि को आमंत्रित करते हैं।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्रसंस्कृत रूप में
चाय: चाय की पत्तियां (चाय के पौधे की पत्तियां) सबसे आम उदाहरण हैं जिनका हम पेय के रूप में सेवन करते हैं।
जड़ी-बूटियां और मसाले: करी पत्ता, तेज पत्ता, और अजवाइन के पत्ते (अजमोद) जैसे कई पत्ते सूखने के बाद मसालों के रूप में इस्तेमाल होते हैं। कुछ औषधीय पौधों की पत्तियों का उपयोग आयुर्वेदिक या हर्बल दवाओं में होता है, जैसे नीम की पत्तियां या तुलसी की पत्तियां।
पाउडर: कुछ पत्तियों को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, जैसे मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों का पाउडर, जिसका सेवन पोषण पूरक के रूप में किया जाता है।
पेय पदार्थ और अर्क: कुछ पत्तियों से अर्क या जूस निकालकर पेय पदार्थ बनाए जाते हैं।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍻
सुबह एक साथ सारा मल त्याग करने के लिए कुछ घरेलू उपाय और आदतें अपनाई जा सकती हैं:
सुबह खाली पेट करें ये काम
गुनगुना पानी: सुबह उठकर खाली पेट एक या दो गिलास गुनगुना पानी पिएं। यह आंतों को सक्रिय करता है और मल त्याग को आसान बनाता है।
गुनगुने पानी में नींबू और शहद: एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट साफ होता है।
गुनगुने दूध में घी: रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीने से आंतें चिकनी होती हैं और सुबह मल त्याग में आसानी होती है।
📚 गुरु भक्ति योग
कृष्ण के समागम से अधिकाधिक आनन्द प्राप्त करने की इच्छा से गोपियों की ग्रीवाएँ लालिमा से युक्त हो गई। उन्हें संतुष्ट करने के लिए, कृष्ण उनके गाने के साथ-साथ ताल देने लगे। वस्तुतः सारा संसार
कृष्ण के गायन से ओत-प्रोत है, किन्तु विभिन्न जीव उसे भिन्न-भिन्न रूपों में सराहते हैं।
इसकी पुष्टि भगवद्गीता में हुई है- ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजामि अहम्। कृष्ण नाच रहे हैं तथा प्रत्येक जीवात्मा भी नाच रहा है, किन्तु आध्यात्मिक तथा भौतिक जगत के नृत्यों में अन्तर होता है। इसे चैतन्य-चरितामृत के लेखक ने व्यक्त किया है और कहा है कि कृष्ण नर्तकाचार्य हैं और प्रत्येक व्यक्ति उनका सेवक है।
प्रत्येक व्यक्ति कृष्ण के नृत्य का अनुकरण करने का प्रयास कर रहा है। जो लोग कृष्णभावनाभावित हैं, कृष्ण के नृत्य का ठीक से अनुसरण कर पाते हैं; वे स्वतंत्र रूप से नाचने का प्रयत्न नहीं करते। किन्तु जो भौतिक संसार में हैं, वे भगवान् के रूप में नाचते और कृष्ण का अनुकरण करने का प्रयास करते हैं।
सारे जीव कृष्ण की माया के निर्देश से नाच रहे हैं और यह सोचते हैं कि वे कृष्ण के तुल्य हैं। किन्तु यह सही नहीं है। कृष्णभावनामृत में यह भ्रम नहीं होता, क्योंकि कृष्ण भावना भावित व्यक्ति जानता है कि कृष्ण परम स्वामी हैं और हर व्यक्ति उनका दास है।
मनुष्य को कृष्ण का अनुकरण करने या श्रीभगवान् के तुल्य बनने के लिए नहीं, अपितु कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए नाचना होता है। गोपियाँ कृष्ण को प्रसन्न करना चाहती थीं, अतः ज्योंही कृष्ण गाने लगे तो सारी गोपियाँ दुहरा कर उन्हें प्रोत्साहित करती हुई बोलीं, “बहुत अच्छा, बहुत अच्छा।”
कभी-कभी वे कृष्ण की प्रसन्नता के लिए स्वयं गातीं और कृष्ण उनकी प्रशंसा करते। वे हुए जब कुछ गोपियाँ नाचने तथा अपने शरीर थिरकाने से थक गईं, तो उन्होंने अपनी बाहें कृष्ण के कंधों पर रख दीं। तब उनके केशपाश शिथिल हो गये और फूल जमीन पर गिर पड़े।
जब उन्होंने अपनी बाँहों को कृष्ण के कंधों पर रखा, तो वे उनके शरीर की सुंगधि से, जो कमल से, अन्य सुगन्धित पुष्पों से तथा चन्दनलेप से निकल रही थी, अभिभूत हो गईं। वे उनके आकर्षण से फूल उठीं और उन का चुम्बन करने लगीं।
कुछ गोपियों ने कृष्ण के कपोलों से अपने कपोल सटा दिये और कृष्ण उन्हे अपने मुख की चबाई सुपारी देने लगे, जिसे उन्होंने चुम्बन लेकर अत्यन्त हर्ष के साथ -ग्रहण किया। इस प्रकार सुपारी के ग्रहण करने से गोपियाँ आध्यात्मिक रूप से ऊपर उठ गई।
बहुत देर तक नाचने तथा गाने से गोपियों थक गई। कृष्ण उनके पास ही नाच रहे थे। अपनी थकान मिटाने के लिए गोपियों ने उनका हाथ लेकर अपने उन्नत उरोजों पर रख लिया। कृष्ण का हाथ तथा गोपियों के उरोज शाश्चत रूप से शुभ हैं; अतः जब दोनों मिल गये, तो वे आध्यात्मिक रूप से बहुत ऊपर उठ गये।
गोपियों ने लक्ष्मीपति कृष्ण के साथ इतना आनन्द लूटा कि वे यह भूल गई कि संसार में उनके कोई अन्य पति भी हैं और कृष्ण के साथ नाचने, गाने तथा उनकी भुजाओं द्वारा आलिंगित होकर वे सर्वस्व भूल गईं।
श्रीमद्भागवत में कृष्ण के साथ रासनृत्य करती गोपियों के सौन्दर्य का वर्णन इस प्रकार मिलता है उनके दोनों कानों के ऊपर कमल के फूल थे और उनके मुख चन्दन लेप से सुसज्जित थे। वे तिलक लगाये थीं और उनके स्मित मुखों पर पसीने की बूँदें थीं।
उनके कंगनों से और पैरों से नूपुरों की ध्वनि आ रही थी। उनके केश के फूल कृष्ण के चरणकमलों पर गिर रहे थे और वे अत्यन्त संतुष्ट थे।” जैसाकि ब्रह्म-संहिता में कहा गया है, ये समस्त गोपियाँ कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति की विस्तार हैं।
अपने हाथों से उनका स्पर्श करते तथा उनकी मोहक आँखों को देखते हुए कृष्ण गोपियों के साथ वैसा ही आनन्द लूट रहे थे जिस तरह एक बालक शीशे में अपने शरीर का प्रतिबिम्ब देखकर खेलने का आनन्द पाता है।
जब कृष्ण गोपियों के शरीर के विभिन्न अंगों का स्पर्श करते, तो गोपियाँ आध्यात्मिक शक्ति से परिपूरित हो उठतीं। वे चाह कर भी अपने वस्त्रों को सँभाल न पातीं। उनके केश तथा वस्त्र बिखर गये और उनके आभूषण ढीले पड़ गये क्योंकि कृष्ण के संग के कारण वे अपने आपको भूल गई।
इस प्रकार जब कृष्ण रासनृत्य में गोपियों के संग का आनन्द ले रहे थे, तो देवता तथा उनकी पत्नियाँ अत्यन्त विस्मित होकर आकाश में एकत्र होने लगे। चन्द्रमा भी एक काम-मोहित होकर नृत्य देखने लगा और आश्चर्य से चकित रह गया।
गोपियों ने देवी कात्यायनी से प्रार्थना की थी कि उन्हें कृष्ण पति रूप में प्राप्त हों। अब कृष्ण स्वयं को गोपियों की संख्या के अनुरूप विस्तारित करके तथा पति-रूप में उनका भोग करके उनकी उस इच्छा की पूर्ति कर रहे थे।
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा है कि कृष्ण आत्मनिर्भर हैं, अर्थात् वे आत्माराम हैं। उन्हें अपनी तुष्टि के लिए किसी की भी आवश्यकता नहीं रहती। चूंकि गोपियों ने उन्हें पति-रूप में चाहा था, इसलिए वे उनकी इच्छापूर्ति कर रहे थे।
जब कृष्ण ने देखा कि गोपियाँ उनके साथ नाचने के कारण थक गई हैं, तो वे तुरन्त अपने हाथ उनके मुखों पर फेरने लगे जिससे उनकी थकान दूर हो जाये। कृष्ण के इस सौजन्य का बदला चुकाने के लिए वे प्रेमपूर्वक उनकी ओर देखने लगीं।
वे कृष्ण के शुभ कर-स्पर्श से अतीव प्रसन्न थीं। हँसी से युक्त उनके कपोल सुन्दरता से चमक उठे और वे परमानन्दित होकर कृष्ण का यशोगान करने लगीं। शुद्ध भक्तों के रूप में गोपियों ने कृष्ण-संग का जितना सुख भोगा उतनी ही अधिक वे उनकी महिमा से परिचित होती गईं और इस प्रकार उन्होंने उनका बदला चुकाया।
वे कृष्ण की दिव्य लीलाओं का यशोगान करके उन्हें प्रसन्न करना चाहती थीं। कृष्ण भगवान् हैं, स्वामियों के भी स्वामी हैं और गोपियाँ अपने ऊपर असामान्य कृपा प्रदर्शन के लिए उनकी पूजा करना चाह रही थीं।
रासनृत्य की थकान मिटाने के लिए गोपियाँ तथा कृष्ण यमुना के जल में प्रविष्ट हुए। कृष्ण के शरीर का आलिंगन करने से गोपियों के गले की कुमुदिनी पुष्प की मालाएँ खण्ड-खण्ड हो गई थीं और उनके वक्षस्थलों पर लेपित कुंकम से रगड़ कर वे पुष्प लाल-लाल हो गये।
भौरें इन फूलों से मधु प्राप्त करने के लिए मँडरा रहे थे। कृष्ण गोपिकाओं के साथ यमुना जल में उसी प्रकार प्रविष्ट हुए जिस प्रकार हाथी अपनी अनेक संगिनी हथिनियों के साथ जल के पूरित ताल में प्रवेश करता है।
जल में क्रीड़ा करते और एक दूसरे के संग का आनन्द लूटते तथा रासनृत्य के श्रम को दूर करते हुई गोपियाँ तथा कृष्ण दोनों ही अपने-अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गये। गोपियाँ कृष्ण के शरीर पर पानी उलीचने लगीं और लगातार हँसती रही।
कृष्ण इसका सुख लूट रहे थे। जब कृष्ण इस तरह की हँसी तथा जल उलीचे जाने से हर्षित हो रहे थे, तो देवता उन पर स्वर्ग से पुष्पों की वर्षा करने लगे। इस तरह देवताओं ने परम भोक्ता कृष्ण के अद्वितीय रास-नृत्य की तथा यमुना जल में गोपियों के साथ उनकी लीला की प्रशंसा की।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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