धार्मिक

देश की रक्षा के लिए एकजुट हो जाओ सभी धर्म – कमलेश कृष्ण शास्त्री

बेगमगंज । साजखेड़ा में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के छटवे दिन में पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहां कि वही संतान सच्चे अर्थों में अच्छी होती है जो अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करती है, उनका सम्मान करती है और उनके दिखाए मार्ग पर चलती है। ऐसी संतान न केवल अपने माता-पिता की प्रिय होती है, बल्कि भगवान को भी प्रिय लगती है।
देश की रक्षा के सभी हिन्दुओं, मुसलमानों सिखों ईसाइयों को आपसी मतभेदों को भुलाकर एक होना होगा । जाति, पंथ, भाषा, क्षेत्र या किसी भी तरह के भेदभाव को त्यागकर अगर हम सब एकजुट हो जाएँ, तभी हम धर्म की रक्षा कर सकते हैं। जब हम आपस में बँटते हैं, तो हमारी शक्ति कमज़ोर होती है और इसका नुकसान देश को होता है।
जब समाज का हर वर्ग—चाहे वह महिला हो या पुरुष, अमीर हो या गरीब—एक साथ खड़ा होगा, तभी हमारें धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव होगी। हमें अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर, समाज और धर्म के लिए कार्य करना होगा।
सबसे बड़ा पाप है—दूसरों को दुख देना। और सबसे बड़ा पुण्य या सुख है—दूसरों को सुख देना। जब हम किसी जरूरतमंद की सेवा करते हैं, उसका दुख दूर करते हैं, तो वह केवल उसका नहीं, बल्कि हमारी आत्मा का भी कल्याण होता है। सेवा ही सच्चा धर्म है, और परोपकार ही वह मार्ग है जो हमें ईश्वर के निकट ले जाता है।
सनातनियों को अपने बच्चों को शास्त्रों का ज्ञान अवश्य देना चाहिए, क्योंकि शास्त्र ही हमारी संस्कृति, मूल्य, आचरण और धर्म की जड़ हैं। जब बच्चे बचपन से ही वेद, उपनिषद, भगवद गीता, रामायण, महाभारत जैसे शास्त्रों की शिक्षाओं से परिचित होते हैं, तो उनका चरित्र भी उसी अनुरूप ढलता है।

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