मध्य प्रदेशव्यापारहेल्थ

ग्रामीण क्षेत्र से बाजार तक पहुंच रहीं मौसमी भाजियां, आयुर्वेद में मानी जाती हैं स्वास्थ्य वर्धक

20 से 40 रुपए किलो में मिल रहीं औषधीय गुण वाली भाजी
सिलवानी । ठंड के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार तक पहुंच रही मौसमी भाजियां न सिर्फ स्वाद बढ़ा रही हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो रही हैं। इन दिनों गांवों से कई प्रकार की भाजियां बाजार में बिकने आ रही हैं, जिनमें चार की खेती की जाती है, जबकि चार भाजियां प्राकृक्तिक रूप से स्वयं उग आती हैं।
किसानों के अनुसार मैथी, पालक, चना और सरसों ऐसी भाजियां हैं, जिनकी नियमित बुआई की जाती है। वहीं नौरपा, नौनिया, मकोईआ और चंदन बथुआ बिना बोए अपने आप उग जाती हैं। इन्हें इकट्ठा कर बाजार तक लाना मेहनत भरा काम होता है, इसके बावजूद इनके दाम 20 से 40 रुपये किलो ही मिल पाते हैं। गांव की किसान तुलाराम पटैल बताते हैं कि नौरपा, नौनिया, मकोईआ और चंदन बथुआ को खेतों व मेड़ों में ढूंढकर उखाड़ना पड़ता है। लोग इन्हें दवा के रूप में भी उपयोग करते हैं। आयुर्वेद – चिकित्सक डॉ. पारस जैन
का कहना है कि मौसमी सब्जियों में विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये पाचन शक्ति को मजबूत करने, इम्युनिटी बढ़ाने, रक्त शुद्ध करने और ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाव में सहायक होती हैं। भाजियों में फाइबर, विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में होते हैं।
ठंड के मौसम में चार-पांच बार इनका सेवन करने से स्वास्थ्य संतुलित रहता है। पहले के समय में लोग इनका अधिक उपयोग करते थे। मेथी और पालक खून की कमी दूर करने में उपयोगी हैं, वहीं चना और सरसों की भाजी शरीर को ऊर्जा
प्रदान करती हैं। चंदन ककुड़ा और मुक्खया जैसी सब्जियां जोड़ों के दर्द, गैस और पाचन संबंधी समस्याओं में लाभ देती हैं। ठंड के मौसम में सप्ताह में चार से पांच बार इन मौसमी सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। बाजारों में इन सब्जियों की उपलब्धता बढ़ने से उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों को भी लाभ
मिल रहा है। चिकित्सक के अनुसार नौरपा की भाजी में विटामिन ए, सी, के और कैल्शियम होता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने, हार्मोन संतुलन और कब्ज दूर करने में सहायक है। नौनिया की भाजी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर यह भाजी पाचन सुधारती है, जोड़ों की सूजन कम करती है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मददगार है। मकोईआ की भाजी का सेवन करते ही दर्द से राहत, भूख बढ़ाने, मुंह के छाले ठीक करने और रक्त शुद्ध करने में उपयोगी है। चंदन बथुआ की भाजी में फाइबर व पानी की अधिकता के कारण पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। हड्डियां मजबूत करता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक है। सरसों की भाजी ऊर्जा बढ़ाने के साथ पाचन, हृदय, फेफड़े और हड्डियों को स्वस्थ रखती है। मैथी की भाजी पाचन सुधारने, वजन नियंत्रित करने और इंसुलिन स्तर संतुलित करने में लाभकारी है। चना की भाजी प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, ब्लड शुगर नियंत्रण और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है। पालक की भाजी आयरन और विटामिन सी से भरपूर, हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने और आंखों के लिए लाभदायक है।

Related Articles

Back to top button