जो स्वयं पर नियंत्रण करना जानते हैं वे ही धन्य हैं: कमलेश शास्त्री
ब्यूरो चीफ़ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । ग्राम तिन्सुआ में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के में पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जैसे नदी की सम्पूर्णता सागर तक पहुँचने व अपने अस्तित्व को उसमें विलीन कर देने में निहित है, ठीक उसी प्रकार जीवन की सार्थकता अहंकार के निर्मूलन एवं ईश्वरीय विधान के प्रति समर्पण से सिद्ध होती है । जो स्वयं पर नियंत्रण करना जानते हैं वे ही धन्य हैं। सभ्य व्यक्ति वो है जो अपरिग्रही है। आपके संग्रह में जो कुछ भी बहुत अधिक है उसे बांटिए। धन्य वे ही है जिनमें देने की भावना है, ऐसा भक्ति से सम्भव हो पाएगा। भक्ति वस्तुओं को प्रसाद बनाती है। प्रसाद की एक ही फिलासफी है, वह बटना चाहता है। प्रसाद भोगा नहीं बाँटा जाता है, जो बाँटा जाए वो प्रसाद है, जो संग्रह किया जाए वो विषाद है। इस संसार में जो कुछ भी गतिशील है उस सबमें परमेश्वर का वास है। उस परमात्मा द्वारा प्रदत्त पदार्थों का त्याग से उपभोग करो। लोभ मत करो। भला धन किसके साथ जाना है। इस तरह का जीवन जीए कि देवता आप से ईर्ष्या करने लगे। इतने ऊचें विचार हो, ऐसा चिन्तन, ऐसी पवित्रता हो आपके आसपास ।


