अधिकारियों को लक्ष्मी देकर सुला दिया कुम्भकर्णीय निद्रा में, आज तक जांच नहीं पहुंची
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान l इन दिनों तहसील ढीमरखेड़ा की सहकारिता समाचार के माध्यम से जमकर सुर्खियां बटोर रही हैं। अगर विक्रेतो को यह कहे कि गरीबों के मुंह से निवाला छीनने का काम कर रहे हैं तो गलत नहीं हैं। इसी प्रकार उमरियापान सहकारिता में जमकर खेल चालू हैं। उचित मूल्य दुकान खुलने का कोई समय नहीं हैं। विक्रेता नवीन चौरसिया को दुकान से कम अपने ऐसो आराम से ज्यादा मतलब रहता हैं। इनके सहकारिता वाले पोर्टल में ज्यादा राशन बता रहा हैं फिर भी इनकी दुकान में राशन नहीं रहता आखिर इनका राशन जाता कहां हैं, लगता हैं गाड़ी दुकान न पहुँचकर कहीं और भेज दी जाती हैं। तब तो विक्रेता चंददिनों में लखपति बन जाते हैं।
खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार
सहकारिता के नियम के अनुसार जिन उपार्जन केंद्रों में खरीदी गुणवत्ताविहीन पाई जाती हैं तो उनको खरीदी नहीं मिलनी चाहिए पर यहां तो कुछ और ही हैं नोट दो और अपना काम करवाओ यहां ऐसा चल रहा हैं। पूर्व समय में नवीन चौरसिया के केंद्र में जमकर अनियमितता पाई गई थी, फिर भी इनकी उच्चाधिकारियों से ऐसी साठ- गाठ हैं कि इनके लिए कुछ नियम नहीं बने ये खुद नियम बनाकर अपने हिसाब से केंद्र चलाते हैं। जो वाहन केंद्र आता हैं उनसे आपसी समंजस्य बनाकर उनसे ही माल कम दामों में खरीदकर ज्यादा दामों में बेच दिया जाता हैं।
उच्चाधिकारी भी संदेह के घेरे में
लगातार समाचार का प्रकाशन होने के बाद भी आज तक कोई जांच नहीं आई ऐसा लगता हैं मानो! जैसे लक्ष्मी का वजन इतना भारी हैं, कि उच्चाधिकारी के कान में चुं तक नहीं बोल रहा हैं, उच्चाधिकारियों की मिली भगत से उचित मूल्य दुकान में राशन की जमकर हेराफेरी की जा रही हैं। गरीबों के राशन को गमन करके इनके ऐसो आराम के शौक बढ़ते जा रहे हैं। इतना ही नहीं इनकी पार्टी रात में दोस्तों के साथ होती हैं। विक्रेता नवीन चौरसिया शराब के बहुत शौकीन हैं इनका कहना हैं कोई मेरा कुछ नहीं कर लेगा चाहे कोई भी अधिकारी हों। मै तो अपना मायाजाल वहां तक बिछाया हू,जहां तक शिकायतकर्ता पहुँच ही नहीं पायेंगे।
ग्रामीणों का कहना
ग्रामीणो के द्वारा बताया गया कि साहब हम तो गरीब लोग हैं क्या कर सकते हैं जब हम कहते हैं कि हम आपकी शिकायत करेगे तो विक्रेता नवीन चौरसिया के द्वारा कह दिया जाता हैं कि कटनी से बाहर मेरी शिकायत करना वरना! मेरा कुछ नहीं होगा अब सोचा जा सकता हैं कि आखिर इनका कटनी जिला के अंदर शिकायत करने में कुछ क्यूं नहीं हो सकता मतलब इनकी साठ- गाठ बहुत ऊपर तक हैं। बेचारे आदिवासी लोग हँसते हुए आते हैं उचित मूल्य दुकान की हमकों राशन मिलेगा पर बेचारे रोते हुए जाते हैं, क्यूंकि उनको राशन तो नहीं पर अपशब्दो का सामना करना पड़ता हैं। ग्रामीणों की मांग हैं, कि- इनको उचित मूल्य दुकान उमरियापान से अलग कर देना चाहिए।



