मध्य प्रदेश

सरकारी ज़मीन की लूट वंशीपुर पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि का अवैध मकान

पहाड़ों का दोहन और अफसरों की चुप्पी से सिस्टम पर बड़े सवाल
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। जबेरा जनपद की ग्राम पंचायत वंशीपुर इन दिनों अवैध कब्जे, अवैध उत्खनन और प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। आरोप हैं कि पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि डाल सिंह ठाकुर उर्फ डल्लू ने सरकारी भूमि पर खुलेआम कब्जा कर पक्का मकान निर्माण कराया है। इतना ही नहीं, मकान के पीछे और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र में अवैध रूप से मुरम का उत्खनन लगातार जारी है, जिससे पहाड़ों का सीना छलनी हो चुका है। सूत्रों के अनुसार सरपंच प्रतिनिधि डाल सिंह ठाकुर का आपराधिक प्रवृत्ति का इतिहास भी रहा है। बताया जाता है कि उनके खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न मामलों में प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें पंचायत में प्रभावशाली भूमिका मिलना और कानून को खुलेआम चुनौती देना, प्रशासनिक संरक्षण और राजनीतिक दबाव की आशंका को और मजबूत करता है।
सूत्रों के अनुसार जिस भूमि पर निर्माण और उत्खनन किया जा रहा है, वह संभावित रूप से वन विभाग की भूमि है। इसके बावजूद न तो वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही राजस्व विभाग ने अब तक कोई सख्त कदम उठाया। जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों का अंजान बने रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
पूरे मामले में कथित राजनीतिक संरक्षण और दबाव की चर्चाएं तेज़ हैं। कहा जा रहा है कि प्रभावशाली पहुंच के चलते कार्रवाई फाइलों से आगे नहीं बढ़ पा रही।
हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी के क्षेत्र में हो रहा है, जहां कानून का राज दिखाई देना चाहिए था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। वंशीपुर पंचायत इससे पहले भी विवादों में घिरी रही है। पंचायत में हुए निर्माण कार्यों में कथित फर्जीवाड़े और लाखों रुपये के घोटालों की गूंज पहले भी उठ चुकी है। इन मामलों को लेकर सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने आज तक जांच करने की जहमत नहीं उठाई। इससे कहीं न कहीं मिलीभगत और भ्रष्टाचार की बू साफ महसूस की जा रही है। आरोप है कि गुणवत्ताहीन कार्य दर्शाकर भुगतान निकाल लिए गए, लेकिन न तो किसी जांच दल का गठन हुआ और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई।
अवैध उत्खनन के चलते जहां एक ओर प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट हो रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ों को खोखला किया जा रहा है, जिससे भविष्य में भू-स्खलन और पारिस्थितिक असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी समझ से परे है। यह पूरा मामला पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के पूर्व संसदीय क्षेत्र दमोह से जुड़ा हुआ है। सवाल उठता है कि जिस क्षेत्र को कभी विकास और सुशासन का प्रतीक बताया जाता था, वहीं आज भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे और प्रशासनिक निष्क्रियता की तस्वीर क्यों उभर रही है? जनता पूछ रही है—आखिर कब थमेगा दमोह में पंचायत स्तर पर फैलता भ्रष्टाचार?
अब प्रशासन से मांग की जा रही है कि सरकारी एवं संभावित वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए, अवैध उत्खनन पर सख्ती से रोक लगाकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए, पंचायत में इस पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान हुए सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। जब तक निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वंशीपुर पंचायत का यह मामला सत्ता के संरक्षण में पनपते भ्रष्टाचार और सिस्टम की विफलता का प्रतीक बना रहेगा।
इस संबंध में ईश्वर जरांडे, जिला वनमण्डल अधिकारी दमोह का कहना है कि जांच के लिए बोला है, अगर वन भूमि पर होगा, तो कार्रवाई करेंगे।

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