आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 21 जून 2024
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
☸️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 07:32 AM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 06:18 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
⚜️ योग – शुभ योग 06:42 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 07:31 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 07:08 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:04 ए एम से 04:44 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 09:27 ए एम से 11:04 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जून 22 से 12:43 ए एम, जून 22
🚕 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मीठा दही चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ वट सावित्री पूर्णिमा/ अयन करिदिवस/ पूर्णिमा प्रारंभ सुबह 07.31/ ग्रीष्म संक्रांति/ राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र योग दिवस, राष्ट्रीय सेल्फी दिवस, विश्व संगीत दिवस, विश्व मानवतावादी दिवस, विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस, विश्व संगीत दिवस, विश्व सेल्फी दिवस, पिता दिवस, नोबेल पुरस्कार विजेता ज्यां-पाल सार्त्र जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏕️ Vastu tips ⛺
वास्तु शास्त्र के मुताबिक परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए नए घर में जाने से पहले गृह प्रवेश पूजा जरूर करनी चाहिए। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त पर गृह प्रवेश की पूजा करने से बुरी शक्तियां घर से दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसके साथ ही परिवारवालों पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। गृह प्रवेश करने के बाद ग्रहों का पूजन करना चाहिए। फिर वास्तु देवता का पूजन करना चाहिए। वास्तु पूजन के लिए कुछ शुभ समय भी बताए गए हैं- चित्रा, शतभिषा, स्वाती, हस्त, पुष्य, पुनर्वसु, रोहिणी, रेवती, मूल, श्रवण, उत्तरा फाल्गुनी, धनिष्ठा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, अश्विनी, मृगशिरा और अनुराधा नक्षत्रों में वास्तु पूजन करना शुभ होता है।
इन नक्षत्रों में से किसी भी एक में वास्तु पूजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वास्तु देवता के पूजन के बाद अपने देवी-देवताओं का पूजन करके ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए और उन्हें कुछ दक्षिणा देनी चाहिए। अगर आप सक्षम हैं तो गृह प्रवेश के दिन किसी ब्राह्मण को गाय का दान भी करना चाहिए। इस प्रकार ब्राह्मण आदि की पूजा के बाद जरूरतमंदों को, साधु-संतों को और अपने बंधु-बांधवों को भोजन खिलाना चाहिए। फिर अंत में स्वयं भोजन करके आराम से अपने घर में निवास करना चाहिए।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चबाकर खाने से मिलते हैं कई फायदे:
पाचन में होता है सुधार: खाना जितना अधिक चबाया जाता है, वह उतना ही छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाता है।इससे पेट में पाचन क्रिया को मदद मिलती है और भोजन को अच्छी तरह से पचाने में आसानी होती है।
विटामिन और मिनिरल अच्छी तरह से मिलते हैं: भोजन को अच्छे से चबाने से उसमें मौजूद पोषक तत्व बेहतर तरीके से अब्सॉर्ब होते हैं।जिससे शरीर को आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स अच्छी तरह से मिल पाते हैं।
वजन होता है कंट्रोल: धीरे-धीरे खाने से और अधिक चबाने से पेट भरने का अहसास जल्दी होता है। इससे आप कम मात्रा में खाना खाते हैं, जो वजन नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
एंटी-इंफ्लेमेटरी- कई रिसर्च में इस बात का जिक्र किया गया है कि स्पिरुलिना एक बेहतरीन एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण एलर्जी रायनाइटिस की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं। स्पिरुलिना का सेवन करने से हिस्टामाइन्स रिलीज कम होता है जिससे कई तरह की एलर्जी का खतरा भी कम होता है।
भरपूर एंटीऑक्सिडेंट- शरीर में सूजन की समस्या को कम करने में स्पिरुलिना मदद करता है। इसमें पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो सूजन की समस्या को कम करते हैं। किसी भी इंफेक्शन से बचाने में भी स्पिरुलिना मदद करता है। इसके सेवन से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आज हम आपको अपनी एक ऐसी नीति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि जीवन में कुछ फैसले बहुत सोच-समझ कर लेना चाहिए!
कर्मायत्तं फलं पुंसां बुद्धि: कर्मानुसारिणी।
तथापि सुधियश्चार्याः सुविचार्यैव कुर्वते॥
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी इस नीति में कर्म के बारे में बताते हुए कहते हैं कि कर्मफल व्यक्ति के कर्म के अधीन ही रहता है। मनुष्य की बुद्धि भी कर्म के अनुसार ही कार्य करती है। फिर भी ज्ञानी व्यक्ति भली-भांति सोच-समझकर ही किसी कार्य को शुरू करते हैं। अगर बिना सोचे समझे आप किसी कार्य को करेंगे तो सफलता हाथ नहीं लगेगी। किसी भी कार्य को करने से पहने उसके लिए एक अच्छी नीति बनाएं तब उस कार्य में जुट जाएं, आपको सफलता निश्चित मिलेगी।
कुछ भी करने से पहले रखें इस बात का ध्यान कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है। उनका कहना है कि प्रत्येक बात को अच्छी तरह से सोच समझ कर उसका आंकलन करने के बाद ही उस कार्य पर विचार करना चाहिए। कुलमिलाकर उनका यही कहना है कि बिना-सोचे समझे एकाएक किसी भी कार्य की शुरुआत करना ठीक नहीं है। जो भी कार्य हम करने जा रहे हैं पहले उस पर गंभीरता से विचार कर लें और सही तैयारी के साथ ही उस कार्य को करने में भलाई है। जीवन में निर्णय लेना जरूरी है लेकिन उसके लिए विचार विमर्श भी करना पड़ता है। जो लोग जल्दबाजी में फैसला लेते हैं उन्हें पग-पग पर निराशा हाथ लगती है, वहीं अगर एक सटीक योजना बना कर किसी कार्य को करते हैं तो दिमांग में यह बात स्वीकार होती है कि यहा कार्य में क्यों कर रहा हूं और इसका परिणाम क्या होगा। एकबार मन किसी बात को स्वीकार कर लेता है तो कितनी बार भी निराशा हाथ लगे व्यक्ति की हिम्मत नहीं टूटती है। कहते भी हैं मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।


