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दीपावली पर मिट्टी के दीयों का ही करें उपयोग

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज ।
अब दीपावली में कुछ ही दिन रह गए हैं लोग अपने-अपने घरों की सजावट में जोर-शोर से लगे हुए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के पश्चात जब वापस अयोध्या लौटे थे तो अयोध्यावासियों ने उनका स्वागत लाखों दीप जलाकर किया था। यह परंपरा आज भी कायम है। दीपावली के दिन सभी घर दीयों से जगमग-जगमग रहते हैं, इस दिन मां लक्ष्मी और श्री गणेश जी की पूजा- अर्चना की जाती है। माना जाता है कि घर को साफ-सुथरा रखने से इस दिन मां लक्ष्मी स्वयं घर पधारती हैं, इसलिए दीपावली के दिन हर कोने में दीएं जलने चाहिए। हालांकि, आजकल एक से बढ़कर एक रंग-बिरंगे बल्ब लगाने का चलन हैं लेकिन मिट्टी के दीयों का आज भी कोई जवाब नहीं हैं, वैसे भी मिट्टी के दीयों को सबसे शुद्ध माना जाता है। त्योहार की परंपरा के अनुरूप मिट्टी के दीये ही सर्वमान्य हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये भारतीयता की खुशबू से भरपूर हैं। इसी उद्देश्य को लेकर एचपी पब्लिक स्कूल के वाइस प्रेसिडेंट द्वारा मिट्टी के दीए खरीद कर पूरे स्टाफ को प्रदान किए गए और भी अन्य कई संस्थाएं इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को मिट्टी के दीए खरीदने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वहीं जिला प्रशासन ने मिट्टी के दीए बेचने वालों से नगर पालिका द्वारा बाजार बैठकी शुल्क नही लेने का आदेश भी जारी किया है।
आप भी अपने घर को सस्ते में दीयों से रोशन करना चाहते हैं, तो मिट्टी के दीयों से बढ़कर कोई चीज नहीं है। वैसे तो हरेक जगह दीयों की दुकान मिल ही जाएंगी नगर में गर्ल्स स्कूल रोड, गांधी बाजार, एसडीएम के बंगले के पास व बस स्टैंड पर विभिन्न प्रकार के दीयों की दुकाने सजी हुई है। तो कुछ लोग हाथ ठेलों पर दिए रखकर मोहल्ले मोहल्ले दिये बेंचते घूम रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में लोग इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर ज्यादा आकर्षित है इसलिए समाजसेवी संस्थाओं सहित जनप्रतिनिधि भी इस बात के लिए प्रयत्नशील है और लोगों से आह्वान कर रहे हैं कि वह मिट्टी के दीयों का ही उपयोग करें।

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