मध्य प्रदेश

धार्मिक महत्व की करोड़ों रूपए कीमत की ऐतेहासिक धरोहरों, अनूठी कलाकृतियों पर मूर्ति चोरों की नजर

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । नगर से सागर की ओर ग्राम बेरखेडी होते हुए मात्र 9 किमी दूर नेपाल से आए राजा सूर्य नरेश की नगरी कुन्तलपुर जिसका बिगड़ा नाम कोकलपुर है में प्रवेश करते ही छ इंच से लेकर चार फुट तक की मूर्तियों के दर्शन होते है। जिनका संरक्षण नहीं होने से मूर्ति चोरों का आवागमन यहां पर अधिक हो गया है पिछले कुछ सालों मे कुछ मूर्तिया यहां से गायब भी हो चुकी है। आखिरकार गाव वाले कहाँ तक इनका संरक्षण करेंगे। जिन मूर्तियों को ग्रामीणों ने अपने घर आगन या परिसर में स्थित वृक्षों के नीचे स्थापित कर दिया है वे तो सुरक्षित है। लेकिन जो गाव के बाहर या तालाब के किनारे है उन पर मूर्ती चोरों की नजर जमी हुई है। नवाबी शासन काल में भोपाल नवाब के कारिंदे भी कुछ मूर्तियां यहां से उठवा ले गए थे वे अब कहा है किसी को पता नही है।
ऐतेहासिक है गांव- महाभारत युद्ध के पूरा होने के बाद दिग्विजय यज्ञ का घोड़ा छोड़कर पाण्डु पुत्र देश भ्रमण पर निकले तो कुन्तलपुर के राजा चन्द्रहास ने उक्त घोड़ा पकड़ लिया जिस पर पाण्डु पुत्र अर्जुन और राजा चन्द्रहास के बीच युद्ध की स्थिती निर्मित हो गई तब द्वारकाधीश श्री कृष्ण ने अपने दोनों भक्तों के बीच आकर मित्रता करवाई और साढ़े तीन दिन तक श्री कृष्ण यहां पर रुके फिर पाण्डु पुत्र राजा चन्द्रहास को भी साथ लेकर अन्य राजाओं को अपने अधीन करने निकल पड़े तब काशी के समीप हुए युद्ध में राजा चन्द्रहास वीर गति को पहुंच गए तो उनका पार्थिव शरीर जब कुन्तलपुर लाया गया तो रानी विषया ने अपने आप को सती कर लिया ।
राजा चन्द्रहास और उनके ससुर राजा सूर्य नरेश मंत्री दृष्टबुद्ध के समय बनवाई गयी इन बेशकीमती कलाकृतियों को शासन प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग ने कभी सहेजने की पहल नहीं की जिस कारण आज ये बरबादी की कगार पर है। रजिस्टर हुकूक में दर्ज 126 एकड़ भूमि में फैला कुन्तलपुर का क्षेत्र जिसमे 32 एकड़ का विशाल तालाब राजा सूर्य नरेश द्वारा बनवाया गया था जिसके चार घाट ब्राहम्ण घाट, राज घाट, क्षत्रिय घाट एवं सूद्र घाट आज भी मौजूद है तलाब का संरक्षण नहीं किए जाने से वह धीरे धीरे अतिक्रमण की भेंट चड़ गया। अब मात्र 15-16 एकड में बचा अपने संरक्षण का इंतेजार कर रहा है। इसी से लगा हुआ वह प्राचीन बरगद का वृक्ष भी है जहा राजा सूर्य नरेश आकर रूके थे। वहीं तलाब के किनारे ही रानी सती विषया का सिद्ध स्थान है जहा आज भी लोग दूर दराज से आकर अपनी मनोकामनाए पूर्ण कराते है यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को एक दिन का मेला भरता है।
ग्राम के बुजुर्ग अपने बुजुर्गो से जो सुनते आए वही बात बतलाते हुए कहते है कि ऐतेहासिक महत्व का यह ग्राम कुन्तलपुर यहां पुरा सम्पदा करोड़ों की गली चौराहो दरख्तों के नीचे बिखरी पड़ी है। अब यहा राजा चन्द्रहास की 88 खम्बों की बैठक के मात्र 11 खम्बे शेष बचे है जिसका उपयोग ग्राम के लोग मवेशी बाधने के लिए कर रहे है। बाकी गिरे खबों को लोगों ने अपने घरों चोखटो एव चबूतरों में लगा लिया है जो अतीत की कहानी को बयां करते हैं। गांव के हर आंगन में कचरे के ढेर की तरह रखी मूर्तिया दिखलाई देती है। कुछ मूर्तियों को पीपल के नीचे देवी विषया के सती स्थान पर एवं अन्य स्थानों पर रख दिया गया है। इसके अलावा कई लोग चोरी छिपे भी इन मूर्तियों को उठा ले गए और बिचौलियों को बेच चुके है सरक्षण के अभाव में यह लावारिश पड़ी है।
किन किन की मूर्तिया है-
ग्राम में मौजूद मूर्तियों में अधिकतर नागदेव महाराज, गणेश जी सरस्वती जी नादिया, हनुमान जी, देवी जी. शंकर जी, नवदुर्गा, खैरापति मैया, इन्द्र जी तथा कुछ जैन धर्म से मिलती जुलती तथा दो शेरो की एवं सतियों की व विभिन्न मुद्राओं में तीर कमान खेचे हुए, सरपर पहाड़ लिए हुए, नृत्य करते वीणा बजाते, इत्यादि ।
ग्राम के रूप सिंह लोधी ने बताया कि सन 1997 में कमलसिंह लोधी ने कुछ मूर्तिया एकत्रित करवा कर कई स्थानों पर रखवा दी तथा विषया देवी के सती स्थल पर रखदी जिसे गांव के लोग पूजते है। सभी मूर्तिया खंडित है यहा लगा बीजक जरूर सरकार के नुमाइदे ले गए और कहा रखा पता नहीं है। तहसील का यह गांव ऐतेहासिक धरोहरों के विशाल भण्डार को समेटे हुए है जहां पगपग पर द्वापर युग में बनी मूर्तिया मौजूद है लेकिन अनूठी कलाकृतिया संरक्षण के अभाव में नष्ट हो रही है।
ग्राम के रूपसिह लोधी, गनेश राम, नर्वदा प्रसाद, घासीराम, धनराज लोधी, रूपसिंह, कमलसिंह पटेल, सेठ प्रमोद जैन, प्रकाशनारायन तेंगुरिया, महाराज सिंह लोधी, अमरसिंह लोधी, बट्टूलाल, नंदराम, गोटीराम, आदि ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शिकायत कि थी कि वे अपने ही क्षेत्र में ऐतेहासिक स्थल का संरक्षण नहीं करवा पाए जबकि ग्राम के लोग उनके संसदीय काल में कई बार स्मरण करा चुके थे। ग्रामीणों एक बार फिर कलेक्टर अरविंद दुबे से इस ऐतिहासिक गांव में बिखरी पड़ी मूर्तियों का संरक्षण कराने की मांग की है।

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