आज का पंचांग आज का पंचांग शनिवार, 27 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 27 जनवरी 2024
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार माघ माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 03:37 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है । द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 01:01 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध होता है। अश्लेषा नक्षत्र के देवता नागों के राजा शेषनाग को माना गया है।
📣 योग – आयुष्मान योग 08:08 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 02:25 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 03:36 ए एम, जनवरी 28 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:37:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:52 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:21 पी एम से 03:04 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:53 पी एम से 06:20 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:56 पी एम से 07:15 पी एम
💧 अमृत काल : 11:15 ए एम से 01:01 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जनवरी 28 से 01:00 ए एम, जनवरी 28
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-ज़रूरतमन्दों को इमरती दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – आयुष्मान योग, यहूदी स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय स्मरणोत्सव दिवस, प्रलय के पीड़ितों की स्मृति में अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अंतर्राष्ट्रीय प्रलय स्मरण दिवस, विश्व ब्रेस्ट पंपिंग दिवस, चॉकलेट केक दिवस, कार्य दिवस पर राष्ट्रीय मनोरंजन दिवस, प्रलय स्मरण दिवस, राष्ट्रीय बड़ा विग दिवस, राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन स्मृति दिवस, अभिनेता बॉबी देओल जन्म दिवस, हुमायूँ, मुग़ल बादशाह स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu tips 🌸
वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा का बहुत महत्व है। यदि इस दिशा में वास्तु शास्त्र का सही ख्याल रखा जाये तो घर के सदस्यों पर और खासकर कि घर के मुखिया पर इसका अच्छा असर होता है। इन्द्र देव के साथ सूर्य देव की कृपा भी आप पर बनी रहती है क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य देव को समर्पित दिशा है। इन दोनों दिशाओं के ठीक होने पर समाज में मान-सम्मान बना रहता है और घर में खुशहाली आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में फर्श के लिए गहरे हरे रंग के पत्थर का चुनाव करना चाहिए। वहीं अगर घर की दक्षिण-पूर्व दिशा की बात करें तो यह दिशा स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की मानी जाती है। इस दिशा में बैंगनी रंग के फर्श का होना शुभ माना जाता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हमें बार-बार सर्दी-खांसी क्यों होती है?
विटामिन सी की कमी से बार-बार व्यक्ति को खांसी जुकाम हो जाता है
खांसी एक तरह से एलर्जिक रिएक्शन है जो मौसम में बदलाव या अन्य कारणों से होता है। खांसी के लक्षण में गले में दर्द, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द, उल्टी, छाती में जकड़न और दर्द, श्वास नली में सूजन, साइनस में इंफेक्शन, नाक बहना इत्यादि। इसके कारण में सर्दी या फ्लू, वायरल संक्रमण, प्रदूषण, धूम्रपान, टीबी इत्यादि।
🍻 आरोग्य संजीवनी 🍶
_कुछ आम चेतावनी संकेत हैं:
दर्द: दर्द एक संकेत है कि कुछ गलत है। यह चोट, बीमारी, या अन्य समस्या का संकेत हो सकता है।
थकान: थकान एक संकेत है कि शरीर को आराम और पोषण की आवश्यकता है।
अनियमित मासिक धर्म: अनियमित मासिक धर्म एक संकेत हो सकता है कि हार्मोन असंतुलित हैं।
वजन में तेजी से बदलाव: वजन में तेजी से बदलाव एक संकेत हो सकता है कि कुछ गलत है।
खराब नींद: खराब नींद एक संकेत है कि शरीर को आराम करने की आवश्यकता है।
एकाग्रता में कठिनाई: एकाग्रता में कठिनाई एक संकेत हो सकता है कि शरीर को आराम और पोषण की आवश्यकता है।
भूख में परिवर्तन: भूख में परिवर्तन एक संकेत हो सकता है कि हार्मोन असंतुलित हैं।
मुंह में छाले: मुंह में छाले एक संकेत हो सकता है कि शरीर को आराम और पोषण की आवश्यकता है।
खांसी या सांस लेने में तकलीफ: खांसी या सांस लेने में तकलीफ एक संकेत हो सकता है कि फेफड़े या श्वास नलिका में कोई समस्या है।
पेट दर्द: पेट दर्द एक संकेत हो सकता है कि पाचन तंत्र में कोई समस्या है।
पेशाब में जलन या बदलाव: पेशाब में जलन या बदलाव एक संकेत हो सकता है कि मूत्राशय या गुर्दे में कोई समस्या है।
त्वचा पर बदलाव: त्वचा पर बदलाव एक संकेत हो सकता है कि शरीर में किसी तरह का संक्रमण है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण का क्या रहस्य है?
सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण का ज़िक्र हिंदू संस्कृति के ग्रंथों में बहुतायत में होता है। यदि एक-एक लाइन में तीनों गुणों का परिचय दिया जाए तो वह कुछ इस प्रकार है —
सतोगुण — हर प्रकार की बुराइयों से दूर रहते हुए अच्छाइयों में रमने का गुण। (श्रेष्ठ)
रजोगुण — सांसारिक सुख-सुविधाओं और मान-सम्मान प्राप्त करने की क्रियाशीलता में रमने का गुण। (व्यावहारिक)
तमोगुण — आलस्य, निष्क्रियता और बुरी आदतों में रमने का गुण। (निकृष्ट)
जब जीव प्रकृति के संपर्क में आता है तो त्रिगुणात्मक प्रकृति के उपरोक्त तीनों गुणों का उस पर प्रभाव पड़ता है — किसी गुण का कम और किसी गुण का अधिक। परंतु हर जीव में एक समय में तीनों के तीनों गुण अलग-अलग अनुपात में उपस्थित होते हैं। जिस गुण की प्रखरता होती है मनुष्य का व्यक्तित्व प्रायः वैसा नज़र आता है। गौण अनुपात वाले गुण अक्सर उजागर भी नहीं होते।
जन्म-जन्मांतरों में जैसे जैसे मनुष्य के यथार्थ ज्ञान का स्तर बढ़ता जाता है और उसे सांसारिक वस्तुओं के खोखलेपन और अस्थायी स्वरूप का एहसास होता जाता है, उसके तमोगुण और रजोगुण के अनुपात कम होते जाते हैं और सतोगुण का अनुपात बढ़ता जाता है।
सतोगुण की प्रगाढ़ता सामान्य मनुष्य को मोक्ष मार्ग (निष्काम कर्म योग) की ओर अग्रसर होने में मदद करती है। निष्काम कर्मयोग अर्थात् अच्छी-बुरी सभी सांसारिक जड़-चेतन वस्तुओं से निरासक्ति और अपने स्वास्थ्य, परिवार और समाज के प्रति अपने हिस्से में आये कर्तव्यों की पूर्ति, परंतु कर्म-फलों में निष्कामता।
श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय १४ में सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के कारण, स्वरूप और प्रभावों को अच्छी तरह विवेचन किया गया है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।


