नाबालिग बालक के साथ गलत काम करने वाले आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 5,000 रूपये का जुर्माना

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। माननीय न्यायालय अनन्य विशेष न्यायाधीश (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) रायसेन द्वारा आरोपी संतोष बंजारा पिता दीपसिंह बंजारा निवासी रायसेन, थाना कोतवाली को अपने निर्णय में धारा 377 भादसं. में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 4 में 20 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं 5,000 रुपए के अर्थदण्डं से दण्डित किया गया। इस मामले में शासन की ओर से भारती गेडाम, विशेष लोक अभियोजक/ अति. जिला लोक अभियोजन अधिकारी रायसेन ने पैरवी की।
अभियोजन के मुताबिक पीडि़त नाबालिक लड़के ने थाना कोतवाली रायसेन में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई। कि दिनांक 2 अक्टूबर 2020 के रात्रि करीब 10.30 बजे उसके घर में वह और उसके मम्मी-पापा खाना खाकर टी.वी. देख रहे थे। उसी समय मोहल्ले का संतोष बंजारा आया और उससे बोला कि चल गुटखा लेकर आते हैं। तो वह उसके साथ गुटखा लेने चला गया। फिर आरोपी संतोष बंजारा उसका हाथ पकड़कर उसे फॉरेस्ट कार्यालय के पीछे शमशान घाट के रास्ते में बाजू में उसके साथ गंदी-गंदी हरकतें करने लगा। उसने मना किया तो संतोष बंजारा नहीं माना और जबरदस्ती उसका लोवर और चड्डी उतारकर उसके साथ गलत काम किया। वह चिल्लाने लगा और जैसे-तैसे छूटकर भागने लगा। संतोष बंजारा ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से खत्म कर दूंगा। उसे रास्ते में उसके मोहल्ले का राजेश राठौर मिला। जिसे उसने घटना बताई, राजेश राठौर ने उसके भाई को फोन करके बुलाया। जिसके साथ वह घर गया और घर जाकर अपने मम्मी-पापा को घटना के बारे में बताया। पीडि़त की रिपोर्ट के आधार पर थाना कोतवाली रायसेन में धारा 377, 506 भादसं. धारा ¾ पाक्सो की प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई।
प्रकरण की विवेचना के दौरान घटना स्थल का नक्शा मौका बनाया गया, मेडिकल परीक्षण करवाया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पत्रक बनाया गया। संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। माननीय न्यायालय द्वारा विचारण उपरांत आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।



