निकाय चुनाव: क्या यह सत्ता विरोधी लहर थी…. कांग्रेस ने एक तो भाजपा ने दो निकाय की सत्ता गवाईं

दूसरे चरण के चुनाव बीजेपी को लगा करार झटका
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। जिले की मंडीदीप में कांग्रेस ने सत्ता गवांने के साथ भाजपा को नगरीय निकाय चुनाव में जिला मुख्यालय रायसेन की नगर पालिका परिषद में 18 साल बाद सत्ता में धमाकेदार वापसी की और गैरतगंज नगर परिषद में भाजपा को कांग्रेस ने करारी शिकस्त दी। जिससे साँची विस और विदिशा लोकसभा में कांग्रेस पार्टी ने सेंध लगाकर सत्ताधारी सरकारों के सांसद, मंत्रियों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। भाजपा के मजबूत व सुरक्षित अजेय किले फिलहाल कांग्रेस ने ढहाने की पूरी तैयारी कर ली है। आगामी 2023 में विस् चुनाव होना है। ऐसे में भाजपा की खतरे की घण्टी बजने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जिले के प्रभारी व सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद सिंह भदौरिया ने गांव की सरकार और नगर सरकार के चुनावों से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखी थी। विदिशा रायसेन लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा सांसद रमाकांत भार्गव और साँची अजा सीट का प्रतिनिधित्व शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री व लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी करते हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान का विशेष लगाव वाला रायसेन जिला है।
मंडीदीप में काबिज कांग्रेस की नगर सरकार को भाजपा ने इस बार हुए निकाय चुनाव में छीन ली है। वहीं 18 सालों से काबिज भाजपा की रायसेन नगर सरकार सत्ता गवाना पड़ी जिससे भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा। वहीं गैरतगंज नगर परिषद अब कांग्रेस के बनने के पूरे आसार नजर आ ने लगे हैं। यहां के 15 वार्डों में निर्दलियों और कांग्रेस के बागी प्रत्याशी निकाय चुनाव में जीत गए हैं। कांग्रेस और कांग्रेस के बागी और निर्दलीय मिलजुलकर नगर परिषद गैरतगंज में नगर सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं। जहां कांग्रेस ने मंडीदीप, बाड़ी नगर सरकार की सत्ता खोना पड़ी है। वहीं बीजेपी को मंडीदीप नगर पालिका,ओबेदुल्लागंज नगर परिषद, बाड़ी, बरेली उदयपुरा सिलवानी, साँची सुल्तानपुर नगर परिषद में विजयी पताका फहराया है।
जहां भाजपा निकाय चुनाव हारी वहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और भाजपा की गुटबाजी अंतर्कलह हावी….
जहां बीजेपी की नगर सरकार सत्ता में थीं वहां सत्ता विरोधी मतदाताओं ने वोटिंग की है। पिछली परिषद में हुए भृष्टाचार, गंदा पानी नलों में सप्लाई, पार्षदों अधिकारी कर्मचारियों गरीबों के पीएम आवास योजना में सक्रिय दलालों की मोटी कमीशनखोरी भी एक बहुत बड़ा कारण रहा है।



