सप्तशक्ति संगम : मातृशक्ति संगोष्ठी का भव्य आयोजन

ग्राम कुण्डाली में मातृशक्ति के जागरण और कुटुंब प्रबोधन पर सार्थक विचार
रिपोर्टर : विपिन शर्मा
बम्होरी/कुण्डाली। सरस्वती शिशु मंदिर, कुण्डाली द्वारा विद्या भारती मध्यभारत प्रान्त के अंतर्गत “सप्तशक्ति संगम” कार्यक्रम के तहत मातृशक्ति संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य समाज की मातृशक्ति को एक मंच पर एकत्र कर स्व के बोध का जागरण करना एवं “आओ सखी संवारे अपना घर” विचार को पोषित करना रहा।
इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर के भैया-बहिनों ने विविध सांस्कृतिक व प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ दीं। ग्राम की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मला लोधी जनपद सदस्य, सिलवानी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में चन्द्रवती लोधी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, कुण्डाली उपस्थित रहीं।
मुख्य वक्ता के रूप में पूनम अग्रवाल जिला संयोजिका, मातृशक्ति दुर्गा वाहिनी रहीं, तथा सहयोगी अतिथि रचना लोधी (बम्होरी) थीं।
सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पमालाओं से किया गया।
मुख्य प्रवक्ता पूनम अग्रवाल ने कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण संरक्षण विषयों पर अपने सारगर्भित विचार रखे।
उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवार में एकता और संस्कारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
दीदी ने सभी मातृशक्तियों से आग्रह किया कि परिवार में प्रतिदिन एक समय एक साथ भोजन करें, भजन करें और संवाद बनाए रखें।
उन्होंने कहा “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” अर्थात — “यह मेरा है, वह पराया है” यह विचार संकुचित मन वालों का है, जबकि उदार चरित्र वाले लोगों के लिए पूरा विश्व ही एक परिवार है।”
दीदी ने आगे कहा कि आज के समय में हम धीरे-धीरे अपने संस्कार, धर्म और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने मातृशक्ति से आग्रह किया कि वे भाषा, भूसा, भोजन, भजन, भवन और भ्रमण — इन छह आयामों में अपने परिवार और समाज के हित में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय परिवार द्वारा किया गया तथा समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।
अंत में सभी मातृशक्तियों ने सामूहिक रूप से भारत माता की जयकार के साथ संगोष्ठी का समापन किया।



