पितृपक्ष प्रारम्भ, अपने पूर्वजो को किया जल अर्पण, शुभ कार्य रहेंगे बंद
सिलवानी । नगर के प्राचीन श्रीराम मंदिर जमुनियापुरा के तट नदी घाट पर पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोगों ने तर्पण किया। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृपक्ष रहता है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत अधिक महत्व है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और जल से तर्पण किया जाता है। तथा उनकी मृत्यु तिथि पर पार्वण श्राद्ध करते है। इस पक्ष में विधि. विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है। पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष के अवसर पर नगर के श्रीराम मंदिर नदी घाट पर पंडित नगर खेरापति पंडित भूपेन्द्र शास्त्री द्वारा पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चार के बीच लोगों को अपने पूर्वजों के लिए तर्पण कराया गया।
नगर खेरापति पं. भूपेन्द्र शास्त्री ने बताया की पिता माता सहित परिवारिक सदस्यों की मृत्यु के पश्चात उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धा पूर्वक किये जाने वाला कर्म को श्राद्ध कहते है।
हिंदू संस्कृति में मनुष्य पर माने गए सबसे बड़े ऋण पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए निर्धारित विशेष समय काल पितृपक्ष की शुरूआत शनिवार से प्रारंभ है। इस दौरान सनातन धर्म के अनुयायी अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक पूर्वजों का श्राद्ध करेंगे पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में दिवंगत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है। इस मौके पर श्राद्ध का विशेष महत्व है जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग पितृपक्ष के दौरान गया जी की यात्रा भी करते है और पितरो का तर्पण करते है। इस दौरान शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश शादी विवाह, मुंडन जैसे अनेक कामो मे विराम लग जाता है।



