फूड इंस्पेक्टर के आदेश को केन्द्र प्रभारी दिखा रहा ठेंगा, उमरियापान उर्पाजन केन्द्र का मामला, बिना साफ हुये खरीदी जा रही धान
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । उमरियापान उर्पाजन केन्द्र में व्याप्त अनियमित्ताएं सुधरने का नाम नहीं ले रही है और केन्द्र प्रभारी शरद उर्फ बल्लू बर्मन की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है।
उल्लेखनीय है कि अभी दो दिन पूर्व ही फूड इंस्पेक्टर प्रमोद मिश्रा के द्वारा जांच की गई और जांच के दौरान यह पाया था कि केन्द्र में अमानक धान का उर्पाजन किया जा रहा था वहीं कुछ बोरिया में निर्धारित मात्रा से कम उपज मिली थी और कुछ किसानों की धान तौल भी गई थी लेकिन गुणवत्ता बहुत ही खराब थी। लिहाजा फूड इंस्पेक्टर ने केन्द्र प्रभारी को आदेशित किया था कि जिस धान की तौल हो चुकी है उसे साफ करवाकर ही उर्पाजित करवाया जाये लेकिन नियमों को ताक पर रख केन्द्र प्रभारी द्वारा उक्त धान साफ नहीं करवाई गई और जिस दिन केन्द्र में फूड इंस्पेक्टर के द्वारा जांच की गई उसी रात को ट्रक में लोड करवाकर उक्त खराब धान को वेयर हाऊस भेज दिया गया। यहां पर यह सवाल उठता है कि क्या केन्द्र प्रभारी अधिकारियों से बड़े हो गये है या फिर अपने मन से ही केन्द्र का संचालन करेंगे।
3 दिन बाद भी पंखा, छन्ना लापता
उर्पाजन केन्द्र उमरियापान में बिना पंखा, छन्ना, ग्रेडर लगाये ही धान की खरीदी की जा रही थी उसका कारण यह था कि उक्त धान में केन्द्र प्रभारी को अच्छा खासा कमीशन मिलता है लिहाजा उनके द्वारा धान साफ नहीं करवाई जाती है और तीन दिन पूर्व जब जांच की गई तो फूड इंस्पेक्टर ने भी यह पाया कि केन्द्र प्रभारी बिना पंखा, छन्ना ग्रेडर लगाये धान की तौल करवा रहे है। लिहाजा सख्त लहजे में फूड इंस्पेक्टर के द्वारा केन्द्र प्रभारी को हिदायत दी गई थी जो भी अयिमित्ताएं है उसे सुधार लें अन्यथा केन्द्र किसी अन्य को आवंटित किया जायेगा लेकिन इसके बाद केन्द्र प्रभारी की मनमानी स्पष्ट परिलक्षित हो रही है और गुरुवार को जब हमारे संवाददाता ने खरीदी केन्द्र का मुआयना किया तो जिन बिन्दुओं को लेकर फूड इंस्पेक्टर ने केन्द्र प्रभारी को हिदायत दी थी उनमें से किसी भी बिन्दु का पालन केन्द्र प्रभारी द्वारा नहीं किया गया और जानकारी तो यह भी मिली है कि केन्द्र प्रभारी बल्लू के द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि हम तो ऊपर तक अधिकारियों को कमीशन देते है। अखबार वालों को जो छापना हो छाप दें इससे हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि केन्द्र प्रभारी को प्रभाव पड़े या न पड़े इससे समाचार पत्र का कोई सरोकार नहीं है। समाचार पत्र जनता की आवाज होते है जो समय पर जन समस्या के माध्यम से उनकी आवाज बनते रहते है।



