Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 12 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 12 जनवरी 2025
12 जनवरी 2025 दिन रविवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। आज राष्ट्रीय युवा दिवस अर्थात आज नविन मत के अनुसार स्वामी श्रीविवेकानंद जी की जन्म जयन्ती है। आज जैन समाज के लोगों का णमोकार 35 व्रत चौदस का उपवास भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “स्वामी श्रीविवेकानंद जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☁️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार पौष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 05:03 AM तक उपरांत पूर्णिमा
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 11:24 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है।वहीं इसके देवता चंद्रमा हैं।
⚜️ योग : ब्रह्म योग 09:09 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग 06:44 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : गर – 05:45 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 05:03 ए एम, जनवरी 13 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:44:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:09 पी एम से 12:51 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:14 पी एम से 02:56 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:08 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:44 पी एम से 07:05 पी एम
💧 अमृत काल : 12:57 ए एम, जनवरी 13 से 02:30 ए एम, जनवरी 13
👸🏻 निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जनवरी 13 से 12:57 ए एम, जनवरी 13
❄️ रवि योग : 11:24 ए एम से 07:15 ए एम, जनवरी 13
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवि योग/ राष्ट्रीय युवा दिवस, छत्रपति शिवाजी की माता जीजाबाई जयन्ती, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष प्रियंका गाँधी जन्म दिवस, स्वामी विवेकानन्द जयन्ती, भारतीय आत्मिक योगी महर्षि महेश योगी जयन्ती, अभिनेता अमरीश पुरी स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ साहा स्मृति दिवस, भारतीय क्रांतिकारि प्यारे लाल शर्मा पुण्य तिथि, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व स्मृति दिवस, भारत रत्न’ सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी भगवान दास जयन्ती, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय), राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक ✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी है। 🏘️ *Vastu Tips* 🏚️
वास्तु शास्त्र आचार्य श्री गोपी राम से घर से सूखे हुए फूलों को हटाने के बारे में बात करेंगे। घर में रखे सूखे फूल शव की तरह होते हैं। जैसे घर में शव नहीं रखा जाता है, वैसे ही सूखे फूल भी घर में नहीं रखने चाहिए। सुप्रसिद्ध तंत्र ग्रंथ ‘मंत्र महार्णव’ में कहा गया है कि भगवान को चढ़ाए हुए सभी पुष्प तत्काल निर्मालय हो जाते हैं।उसी में आगे बताया गया है कि निर्मालयों को तत्काल हटा देना चाहिए, वरना उसके भोग के लिए चण्डाली, चण्डांशु और विश्वकसेन जैसी निगेटिव शक्तियों के आने की बात कही गयी है। आजकल सुखाए हुए पोट पोरी के फूलों को रखने का फैशन है, लेकिन आपको बता दूं कि आप नकली फूल लगा लें वो बेहतर है, परन्तु पोट पोरी के फूल विष के समान है। अतः सदा ताजे फूलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मूंगा का पत्ता विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ये तत्व शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” इस सवाल का जवाब देते हुए कहा जा सकता है कि यह कई तरह की बीमारियों में लाभकारी हो सकता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: मूंगा का पत्ता इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है: “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” इस सवाल का एक जवाब यह भी है कि यह पाचन संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, एसिडिटी और अपच में लाभकारी होता है।
रक्तचाप को नियंत्रित करता है: मूंगा का पत्ता रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।
शरीर को डिटॉक्स करता है: “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” यह सवाल पूछने वाले को यह भी बताना चाहिए कि यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
त्वचा के लिए फायदेमंद: मूंगा का पत्ता त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
🍷 आरोग्य संजीवनी 🍶
अजवाइन के प्रमुख फायदे:
पाचन में सुधार: अजवाइन पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके पाचन में सुधार करती है। यह गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है।
दर्द निवारक: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, सिरदर्द और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याओं में राहत देते हैं।
सर्दी-खांसी: अजवाइन का सेवन सर्दी-खांसी, जुकाम और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है।
पाचन तंत्र को साफ करता है: यह पाचन तंत्र को साफ करके विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है।
इम्यूनिटी बढ़ाता है: अजवाइन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं और शरीर को संक्रमण से बचाते हैं।
🌷 गुरु भक्ति योग_ 🌸
एक बार की बात है, देवताओं के राजा इंद्र ने किसानों से किसी कारण से नाराज होकर बारह वर्षों तक बारिश न करने का निर्णय लेकर किसानों से कहा -“अब आप लोग बारह वर्षों तक फसल नही ले सकेंगे।”
सारे किसानों ने चिंतातुर होकर एक साथ इंद्रदेव से वर्षा करवाने हेतु प्रार्थना की। इंद्र ने कहा -” यदि भगवान शंकर अपना डमरू बजा देंगे तो वर्षा हो सकती है।” इंद्र ने किसानों को ये उपाय तो बताया लेकिन साथ में गुप्तवार्ता कर भगवान शिव से ये आग्रह कर दिया कि आप किसानों से सहमत न होना।
जब किसान भगवान शंकर के पास पहुँचे तो भगवान ने उन्हें कहा -” डमरू तो बारह वर्ष बाद ही बजेगा।”
किसानों ने निराश होकर बारह वर्षों तक खेती न करने का निर्णय लिया।
उनमें से एक किसान था जिसने खेत में अपना काम करना नहीं छोड़ा। वो नियमति रूप से खेत जोतना, निंदाई, गुड़ाई, बीज बोने का काम कर रहा था। ये माजरा देख कर गाँव के किसान उसका मज़ाक उड़ाने लगे। कुछ वर्षों बाद गाँव वाले इस परिश्रमी किसान से पूछने लगे -” जब तुम्हे पता है कि बारह वर्षों तक वर्षा नही होने वाली तो अपना समय और ऊर्जा क्यों नष्ट कर रहे हो?”
उस किसान ने उत्तर दिया- *मैं,भी जानता हूँ कि बारह वर्ष फसल नही आने वाली लेकिन मैं, ये काम अपने अभ्यास के लिए कर रहा हूँ
क्योंकि बारह साल कुछ न करके मैं, खेती किसानी का काम भूल जाऊँगा, मेरे शरीर की श्रम करने की आदत छूट जाएगी। इसीलिए ये काम मैं, नियमित कर रहा हूँ ताकि जब बारह साल बाद वर्षा हो तब मुझे अपना काम करने के लिए कोई कठिनाई न हो।
ये तार्किक चर्चा माता पार्वती भी बड़े कौतूहल के साथ सुन रही थी। बात सुनने के बाद माता, भगवान शिव से सहज बोली – “प्रभु, आप भी बारह वर्षों के बाद डमरू बजाना भूल सकते हैं।”
माता पार्वती की बात सुन कर भोले बाबा चिंतित हो गए।अपना डमरू बज रहा या नही ये देखने के लिए उन्होंने डमरू उठाया और बजाने का प्रयत्न करने लगे।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।



