Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 20 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 20 मई 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 05:52 AM तक उपरांत अष्टमी तिथि 04:55 AM तक उपरांत नवमी।
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 07:32 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है। तथा धनिष्ठा नक्षत्र के देवता अष्टवसु हैं।
⚜️ योग – इन्द्र योग 02:50 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : बव – 05:51 ए एम तक बालव – 05:28 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – कौलव – 04:55 ए एम, मई 21 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:39:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:05 ए एम से 04:46 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:26 ए एम से 05:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:35 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:07 पी एम से 07:27 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:08 पी एम से 08:10 पी एम
💧 अमृत काल : 09:07 ए एम से 10:43 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 21
🪷 द्विपुष्कर योग : 05:28 ए एम से 05:51 ए एम
🚕 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय- हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा लगाकर सवाकिलो मसूर दाल चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्विपुष्कर योग/ संत श्री दादूदयाल पुण्यतिथि/ कालाष्टमी/ पंचक प्रारंभ (पंचांग भेद)/ स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल स्मृति दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी टी. प्रकाशम शहीद दिवस, विश्व मधुमक्खी दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मानव संसाधन दिवस, राष्ट्रीय करोड़पति दिवस, विश्व मेट्रोलॉजी दिवस, विश्व माप विज्ञान दिवस, कैमरून राष्ट्रीय दिवस, साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत जन्म दिवस, पंडित चंद्रशेकरेंद्र सरस्वती जन्म दिवस, पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध मूर्तिकार रामकिंकर बैज जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗽 Vastu tips ⛲
अगर आपको धन की प्राप्ति नहीं हो रही है, तो ऐसे में आप तिजोरी को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें। वास्तु जानकारों की मानें, तो गलत दिशा में तिजोरी को रखने से जीवन में धन की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से आपको किसी कर्ज लेना पड़ सकता है। तिजोरी को सही दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
सनातन धर्म में हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं, मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा विधिपूर्वक होती है। ऐसे में इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और प्रभु को गुड़ और चने का भोग लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से कर्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गुड लिसनर बनने की कोशिश करें अक्सर लोग अपनी बात को समझाने के चक्कर में इतना ज्यादा फोकस्ड रहते हैं कि सामने वाले की बात को सुनते ही नहीं हैं। अगर आप भी यही करते हैं, तो आपको गुड लिसनर बनने की कोशिश करनी चाहिए। जब आप अपनी बात कहने के साथ-साथ अपने पार्टनर की बात को सुनकर समझने की कोशिश करेंगी, तो रिश्ते में आने वाली आधी से ज्यादा चुनौतियां खुद-ब-खुद हैंडल होने लगेंगी।
जरूरी है समझौता करना अगर आप अपनी ईगो को अपने रिश्ते के भी ऊपर रखते हैं, तो यकीन मानिए इस तरह के बर्ताव की वजह से आपका रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। आपको अपने रिश्ते को और अपने पार्टनर को सबसे आगे रखना है। ईगो के चक्कर में समझौता न करना और हर बात पर सिर्फ अपनी चलाना, इस आदत की वजह से अक्सर रिश्ते बर्बाद हो जाते हैं। रिश्ते की लंबी उम्र के लिए दोनों ही पार्टनर्स को कभी-कभी एक दूसरे के सामने झुक जाना चाहिए।
☕ आरोग्य संजीवनी 🫖
सर दर्द के प्रकार और कारण 🎯
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सर दर्द के कई प्रकार होते हैं। हर दर्द की वजह अलग हो सकती है और उसी के हिसाब से दवा भी अलग होती है।
टेंशन या तनाव का सिर दर्द जब हम मानसिक या शारीरिक तनाव में होते हैं, तो सिर के पीछे या माथे पर भारीपन या दबाव महसूस होता है। यह सबसे आम दर्द है।
माइग्रेन (द्विध्रुवी दर्द) यह तेज़ और अचानक होता है, अक्सर सिर के एक तरफ होता है। माइग्रेन में उल्टी, नाक बहना और रोशनी या आवाज़ से संवेदनशीलता होती है।
साइनस सिर दर्द नाक के आसपास और माथे में दबाव महसूस होता है, जो साइनस इंफेक्शन की वजह से होता है।
क्लस्टर सिर दर्द यह बहुत तेज़ दर्द होता है, जो अक्सर एक तरफ आंख के पास केंद्रित होता है।
अन्य कारण हाई ब्लड प्रेशर आंखों की समस्या डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) गलत पोस्चर या नींद की कमी मस्तिष्क संबंधी गंभीर समस्या (बहुत कम)
✡️ गुरु भक्ति योग 🕯️
मंगल दोष की शांति और निवारण की स्थितियाँ: मंगल दोष के निवारण और शांति के विभिन्न उपाय और स्थितियाँ ज्योतिष शास्त्र में मान्य हैं और इन्हें व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। इन स्थितियों में मंगल दोष का प्रभाव कम हो जाता है या समाप्त हो जाता है:
दूसरी कुंडली में भी पाप ग्रहों का होना: जब किसी की कुंडली के 1, 4, 7, 8, और 12वें भाव में राहु, सूर्य, या अन्य पाप ग्रह जैसे मंगल स्थित होते हैं, तो यह दोष स्वतः शांत हो सकता है। इन ग्रहों की उपस्थिति से मंगल के दोष का प्रभाव कम हो जाता है क्योंकि ये ग्रह उसकी उग्रता को संतुलित करते हैं।
मंगल का स्वगृही, उच्चगृही या मित्रगृही होना: अगर मंगल अपनी स्वयं की राशि (मेष या वृश्चिक), उच्च राशि (मकर), या मित्र ग्रहों की राशि (सिंह, धनु) में हो, तो मंगल दोष का प्रभाव स्वतः कम हो जाता है। कुंभ लग्न में शनि के प्रभाव में स्थित मंगल का दोष भी शांत माना जाता है।
मंगल का स्वामित्व वाले भाव में होना: अगर मंगल उन भावों में स्थित हो, जिनका वह स्वामी है, जैसे कि मेष और वृश्चिक, और साथ ही कुंडली में शुक्र या चंद्रमा उच्च या त्रिकोण में हो, तो यह मंगल दोष के प्रभाव को कमजोर करता है।
सिंह लग्न में मंगल दोष का शमन: सिंह लग्न की कुंडली में, सूर्य के साथ मित्रता के कारण मंगल दोष का प्रभाव स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। यह स्थिति मंगल की उग्रता को नियंत्रित करती है।
3, 6, 11 भाव में मंगल का होना: अगर मंगल 3, 6, और 11वें भाव में स्थित हो और साथ में चंद्र, बृहस्पति, या शुक्र जैसे शुभ ग्रह हों, तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है क्योंकि ये भाव मंगल के लिए शुभ माने जाते हैं।
चंद्रमा की कुंडली में शुभ दृष्टि का होना: अगर चंद्रमा की कुंडली में मंगल पर गुरु, शुक्र, या बुध की दृष्टि हो, तो यह मंगल दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है।
शुभ ग्रह दृष्टि का होना: अगर मंगल पर गुरु, शुक्र, या बुध की दृष्टि हो, तो मंगल दोष स्वतः शांत हो जाता है। ये ग्रह मंगल की उग्रता को नियंत्रित करते हैं और दोष को समाप्त कर देते हैं।
वृष या तुला लग्न में मंगल का प्रभाव: वृष और तुला लग्न में मंगल दोष का प्रभाव स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है क्योंकि ये राशियाँ शुक्र के स्वामित्व में होती हैं, जो मंगल के मित्र नहीं हैं, और मंगल यहाँ कमजोर हो जाता है।
गुरु और शुक्र का प्रभाव: अगर कुंडली में गुरु और शुक्र दोनों का प्रभाव हो, तो मंगल दोष स्वतः शांत हो जाता है। ये ग्रह मंगल की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदल देते हैं।
गुरु और शुक्र की युति या दृष्टि का मंगल पर होना: अगर कुंडली में मंगल पर गुरु और शुक्र की युति या दृष्टि हो, तो मंगल दोष का प्रभाव शांत हो जाता है और शुभ परिणाम देने लगता है।
अष्टम भाव में मंगल का होना: अगर मंगल अष्टम भाव में शत्रु ग्रहों (राहु, शनि) के साथ हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव कमजोर हो जाता है।
सप्तम भाव में मंगल का होना: अगर मंगल सप्तम भाव में हो और उस पर गुरु या शुक्र की दृष्टि हो, तो यह दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
चार पाप ग्रहों के साथ मंगल का प्रभाव: अगर मंगल चार पाप ग्रहों (सूर्य, शनि, राहु, केतु) में से किसी एक के साथ 1, 4, 8, या 12वें भाव में हो, तो मंगल दोष का प्रभाव संतुलित हो जाता है और कम हो जाता है।
चतुर्थ और सप्तम भाव में शुभ ग्रहों की युति: अगर चतुर्थ या सप्तम भाव में मंगल के साथ कोई शुभ ग्रह जैसे गुरु या शुक्र की युति हो, तो मंगल दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
लग्नेश का बलवान होना: अगर लग्नेश ग्रह मजबूत और शुभ स्थिति में हो, तो यह मंगल दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
अष्टकवर्ग में मंगल के अंक: अगर अष्टकवर्ग में मंगल के अंक उच्च हों, तो यह मंगल दोष के प्रभाव को कम करता है।
दशम भाव में मंगल: अगर मंगल दशम भाव में स्थित हो और वहां शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो मंगल दोष शांत हो जाता है।
👉🏼 ये सभी स्थितियाँ और उपाय मंगल दोष के शांत या क्षीण होने के महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इन्हें ध्यान में रखकर ही दोष का आकलन और निवारण किया जाता है ताकि जीवनसाथी के साथ सुखी और सफल जीवन सुनिश्चित किया जा सके।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



