भोजपुर महोत्सव में काव्य वंदना : कवियों ने अर्पित की श्रीरामचरित मानस, राष्ट्र गौरव गीत गाकर शब्दों की सुंदर माला
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। तीन दिवसीय महादेव भोजपुर महोत्सव के अंतिम दिन कवियों ने महादेव के दरबार में काव्य पाठ किया। इस अवसर पर कवियों की धर्म संस्कृति राष्ट्र प्रेम, हास्य, व्यंग और श्रृंगार की कविताओं से देर रात काव्य कला प्रेमियों ने देर रात रसास्वादन किया। अंतिम दिन भोपाल से अरविंद सोनी, सुनीता सिंह के भक्ति गायन के बाद अखिल भारतीय कवि सम्मेलन शुरू हुआ।ख्याति प्राप्त कवियों ने महादेव को कवियों ने मुक्ताकाश मंच से काव्य पाठ कर स्रोताओं को देर रात तक श्रीरामचरित मानस, शिव पुत्री गंगा, श्रृंगार, स्वाभिमान, राष्ट्र प्रेम, हिंदी की महानता और राष्ट्र गौरव गीत गाकर समान तक बांधे रखा।
अंतिम दिवस की प्रथम प्रस्तुति भोपाल के अरविन्द सोनी और सुनीता सिंह के भक्ति गायन से हुई। उन्होंने सबसे पहले भगवान शिव को समर्पित भजन पेश किया। इसके बाद मंदिर मंदिर में बिराजे भगवान, दरस की तो बेरा भई रे, शंकरा शिव शंकरा, हर गंगा हर गोपाल और शिव अद्भुत रूप बनाए जैसे भजन अपने अनूठे अंदाज और सुमधुर आवाज में गाकर वातावरण में दिव्यता घोल दी। उन्होंने अंत में तुलसी के बिरछा तरे बैठे हिमांचल की प्रस्तुति देकर भजन गायन को विराम दिया। उनके साथ बांसुरी पर वीरेंद्र कोरे, सिंथसाइजर पर राजेश उबनारे, ढोलक पर रघुवीर सिंह एवं तबला पर रवि राय ने सहभागिता निभाई।
कवियों ने गाई रामचरित से राष्ट्र प्रेम बलिदान की गाथा…..
भक्तिमय भजनों की मधुरम प्रस्तुति के बाद अखिल भारतीय काव्य पाठ प्रारंभ हुआ। जिसमें लखनऊ के डाॅ. सर्वेश अस्थाना, उदयपुर के अजातशत्रु, ओरछा के सुमित मिश्रा, बड़ौदा की श्वेता सिंह, भिंड के प्रतीक चौहान और उज्जैन की शिवांगी शर्मा ने काव्यपाठ किया।
ताल देने को मजबूर हुए काव्य प्रेमी….
श्रृंगार रास की कवयित्री श्वेता सिंह ने मेरे रेशम के आंचल में सितारा मैं अभी जड़ लूं, और हृदय द्वार के कोई ऐसे खटकाया सांकल, धड़कन धड़कन उसके खातिर हो बैठी पागल पर स्रोत गीत के साथ ताली की लय देने को मजबूर हो गए। कवि सुमित मिश्रा ने देववाणी की सौम्य सुता है,शास्त्र सार की भाषा है, भावों का दिग्दर्शन देती, प्रेम प्यार की भाषा है…. कविता से भरपूर तालियां बटोरीं।
इस अवसर पर कवयित्री शिवांगी शर्मा ने जग जननी का दर्शन करने, नारद पहुंचे पर्वत घर, जन्म पत्रिका देखकर बोले वर है इनका गंगाधर, कठिन तपस्या मां गौरा की, सफल हुई प्रगटे भगवन, कंकर कंकर बोल रहा है, जय जय जय गौरीशंकर पढ़कर मंच से महादेव के चरणों में शब्दों की सुंदर माला अर्पित की।
वहीं उत्तर प्रदेश के डॉ. सर्वेश अस्थाना ने रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनके प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है पढ़कर पारिवारिक संबंधों के महत्व को कविता में बयां किया। छोटे वाक्यों से भरपूर हास्य परोस कर श्रोताओं का मन मोह लिया।
अजात शत्रु में हिंदी की महिमा और कविता जिंदाबाद गायी।कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे जाने माने कवि अजातशत्रु ने कविता जिंदाबाद हमारी कविता जिंदाबाद! शीर्षक की कविता ये बोली तो युग बोला, ये गायी तो सबने गाया, इसने ही आजादी का परचम सीमा पर लहराया, वंदे मातरम बन कर गूंजी और तिरंगा थाम लिया, बिस्मिल चन्द्र शेखर आजाद भगत सिंह मंगल पांडे का नाम लिया, पराधीनता की बेड़ी से करने को आजाद, कविता जिन्दाबाद हमारी कविता जिन्दाबाद । पढ़कर खूब तालियां बटोरी।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर आदित्य रिछारिया, एडिशनल एसपी अमृत मीणा, मंदिर के महंत पवन गिरी गोस्वामी, एसडीएम प्रमोदसिंह गुर्जर, एसडीओपी मलकीत सिंह, तहसीलदार रघुवीर सिंह मरावी सहित क्षेत्र के वरिष्ठ गणना नागरिक समापन तक उपस्थित रहे।



