धार्मिकमध्य प्रदेश

मन्त्रोक्त अस्थमा की दवाई रविवार को पिलाएंगे विद्वान ब्रम्हचारीजी

नर्मदा के मांगरोल तीर्थ धाम पर रविवार 29 अक्टूबर की रात निशुल्क मिलेगी दवाई
रिपोर्टर : कमल याज्ञवल्क्य
बरेली । इस बार खीर के साथ दी जाने वाली वैदिक मंत्रोक्त अस्थमा की दवाई मैया नर्मदा के मांगरोल तीर्थ धाम पर रविवार को रात में पिलाई जाएगी। आमतौर पर यह दवाई शरद पूर्णिमा की रात अस्थमा रोगियों को पिलाई जाती है, किन्तु इस बार मांगरोल धाम पर शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन रविवार, 29 अक्टूबर की रात विद्वान संत पूज्य ब्रम्हचारी जी द्वारा पिलाई जाएगी। यह जानकारी मांगरोल धाम से जुड़े पंडित नरसीप्रसाद शर्मा ने देते हुए बताया कि माँ नर्मदा के तट मंग्लेश्वर तीर्थ मांगरोल धाम में मां रेवा मंदिर पर शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन रविवार की रात दमा-स्वास अस्थमा के मरीजो को आयुर्वेद के विद्वान जानकार पूज्य व्रह्मचारीजी महामण्डलेश्वर वापोली मांगरोल एवं वृन्दावन धाम द्वारा आयुर्वेदीय परंपरा और वैदिक मंत्रोक्त औषधि से तैयार खीर रात्री 12 बजे निशुल्क रुप से पिलाई जाएगी। रस रसायन और आयुर्वेद के विद्वान जानकर और परम तपस्वी संतश्री पूज्य ब्रम्हचारी जी महाराज ने बताया कि दिव्यातिदिव्य आयुर्वेदिक औषधियों से दवा तैयार करने की प्रक्रिया काफी समय पहले से ही शुरू कर दी जाती है। जैसे ही प्रक्रिया पूर्ण होती है दवाई तैयार हो जाती है । तो सबसे पहले भगवान की पूजा अर्चना कर पहुचें सभी भक्तजनों को निशुल्क वितरण की जाती है। इस बर्ष पूर्णिमा के दूसरे दिन रविवार को जिन लोगों को स्वास सबंधी बीमारी है वह मांगरोल धाम पहुंच कर निशुल्क वैदिक मंत्रोक्त एवं आयुर्वेदिक दवाईयों से तैयार दिव्य खीर का सेवन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बाहर से आए मरीजो को आश्रम में ठहरने की व्यवस्था रहेगी। पूज्य ब्रह्मचारी जी ने बताया की दिव्य आयुर्वेदिक औषधियो द्वारा तैयार खीर जब भगवान को भोग लगाकर चन्द्रमा के प्रकाश में रखते तो उसमें अमृत बर्षता है। जिससे प्रतिवर्ष सैकड़ो मरीजो को लाभ होता है। उल्लेखनीय है कि पूज्य ब्रम्हचारी जी महाराज आयुर्वेद के विद्वान हैं। करीब दो दशक से अधिक समय तक वापोली धाम में पूज्य गुरुजी वापोली वालों के सानिध्य में उन्होंने रस रसायन के साथ आयुर्वेद पर रिसर्च किया है। तपस्वी संत और रस रसायन के साथ ही आयुर्वेद के विद्वान ज्ञाता पूज्य ब्रम्हचारी जी महाराज ने बताया कि आज भी आयुर्वेद पद्धति रोगों के निदान में प्रभावी है। उन्होंने बताया कि पूज्य गुरुजी के सानिध्य और मार्गदर्शन में करीब दो दशक तक वापोली धाम में बने रिसर्च सेंटर में रस रसायन और आयुर्वेदिक दवाईयों पर गहन अध्ययन किया है। काफी मरीजों का इलाज भी किया जो आज भी स्वस्थ्य हैं।मां रेवा मंदिर मांगरोल धाम पर सेवा को समर्पित बरेली क्षेत्र के समाजसेवी पंडित नरसीप्रसाद शर्मा तथा उदयपुरा क्षेत्र के समाजसेवी बाल गोविंदसिंह रघुवंशी एवं खरगोन क्षेत्र के समाजसेवी पटेल शशिमोहन शर्मा ने बताया कि आयुर्वेदिक एवं वैदिक मंत्रोक्त विधि द्वारा पूज्य ब्रम्हचारीजी महाराज के मार्गदर्शन में रविवार को खीर के साथ मरीजों को दवा दी जाएगी। उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि जो स्वास, दमा और अस्थमा से परेशान हैं वह रविवार को मांगरोल धाम आकर निशुल्क रूप से दवाई का सेवन कर स्वास्थ्य लाभ जरूर लें। उल्लेखनीय है बीस सालों से अधिक समय से पूज्य ब्रम्हचारीजी द्वारा काफी संख्या में अस्थमा रोगियों को यह दवा पिलाई जा चुकी और है मरीजों को काफी लाभ भी हुआ है। पिछले वर्ष मध्यप्रदेश के कई जिलों के लोग शामिल हुए थे।

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